पादरी बनने के लिए योग का ज्ञान आवश्यक : बिशप थ्योडोर मास्करेन्हास

रांची। सेहत सुधारने और मन संवारने के अलावा कैथोलिक चर्च के फादर यानी पादरी बनने के लिए योग का ज्ञान भी आवश्यक है। फादर बनने के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में योग को अनिवार्य किया गया है। इस कारण रांची स्थित कैथोलिक चर्च के फादर प्रशिक्षण केंद्र (सेंट अलबर्ट कॉलेज ) के सिलेबस में भी इसे शामिल किया गया है। प्रशिक्षण की अवधि में सुबह के समय योग की कक्षाएं लगती है। यहां से निकलने वाले पादरी योग में प्रवीण होकर निकलते हैं। इसमें से अधिकतर जीवन भर इसका अभ्यास भी करते हैं। कैथोलिक चर्च के रांची महाधर्मप्रांत के सहायक बिशप थ्योडोर मास्करेन्हास कहते हैं कि योग का संबंध अपने मन की शांति पाने और दूसरों को मन की शांति देने से है।

इसका मकसद कैथोलिक चर्च के भावी फादर को सारे विभेदों को भूलकर मानव मात्र की सेवा के लिए तैयार करना है। कैथोलिक चर्च में याजक ( धर्म गुरु) के रूप में अपना जीवन समर्पित करने के बाद 12 से 14 साल की पढ़ाई करनी होती है। प्रारंभिक पढ़ाई माइनर सेमिनरी में होती है। यहां बाइबल की विशद व्याख्या से अवगत कराया जाता है। एडवांस स्टेज के प्रशिक्षण मेजर सेमिनरी में दिया जाता है। इस दौरान प्रचलित राजनीति विचार प्रणालियों की विशेषताओं और दूसरे धर्मों के तुलनात्मक धार्मिक अधिष्ठान से अवगत कराया जाता है। इसके बाद ही फादर की पदवी दी जाती है। रांची का सेंट कॉलेज मेजर सेमिनरी है।

ध्यान पद्धतियों से लेकर एकाग्रता तक का करते हैं अभ्यास : कैथोलिक चर्च मैं फादर बनने की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न ध्यान पद्धतियों से लेकर एकाग्रता तक का अभ्यास कराया जाता है। यौगिक क्रियाएं भी कराई जाती हैं। कुछ क्रियाओं का चयन शारीरिक जरूरतों के आधार पर भी होता है। फादर बनने के बाद भी यह अध्यात्मिक साधना के लिए योग का सहारा लेते हैं। ध्यान की प्रक्रिया से गुजरते हैं। मानसिक मजबूती के लिए भी याजको को योग ध्यान के लिए कहा जाता है।

साभार : दैनिक जागरण

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