Mahalaya : महालया के अवसर पर गंगा किनारे उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

बेगूसराय, 06 अक्टूबर । महालया के साथ ही बुधवार को पितृपक्ष समाप्त होने के साथ देवी पक्ष शुरू हो गया। इस मौके पर गंगा समेत तमाम नदियों के किनारे लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा है।

पितृपक्ष में तर्पण करने वाले लोगों ने जहां नदियों में अंतिम विसर्जन कर पूर्वजों को जल दिया। वहीं, गुरुवार से शुरू होने वाले नवरात्र को लेकर जल लेने वालों की भारी भीड़ लगी हुई है। बेगूसराय के सिमरिया गंगा घाट, झमाटिया घाट, मथुरापुर घाट, सीहमा घाट, चाक घाट, मीरअलीपुर घाट एवं राजघाट साहेबपुर कमाल समेत गंगा नदी के तमाम घाटों पर अहले सुबह से लोगों की भीड़ उमड़ी हुई है। अमावस्या के पावन अवसर पर लोग गंगा स्नान कर माता गंगा की पूजा अर्चना कर गंगाजल लेकर अपने अपने घरों को लौट रहे हैं। सबसे अधिक भीड़ सिमरिया गंगा घाट पर उमड़ पड़ी है, यहां सुबह तीन बजे से मिथिला और मगध के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई है।

जल स्तर में वृद्धि के कारण अनिल कुमार, भरत, सुनील, अमर, जाटो, शत्रुघन, मनीष एवं सीताराम सहित गोताखोर लोगों को गहरे पानी में जाने से रोकने में लगे रहे। लेकिन पॉकेटमारो ने भीड़ का जमकर फायदा उठाया। सिमरिया में गंगा स्नान करने के बाद बड़ी संख्या में लोग सिद्धाश्रम सहित तमाम मंदिरों में पूजा अर्चना कर रहे हैं। दूसरी ओर बछवारा के झम टिया घाट में भी समस्तीपुर, वैशाली एवं दरभंगा जिला से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जबकि साहेबपुर कमाल के राजघाट में खगड़िया एवं आसपास के जिला के लोगों की भीड़ उमड़ी हुई है।

इधर महालया को लेकर जिले के तमाम दुर्गा मंदिरों में भगवती की विशेष पूजा अर्चना की गई। मूर्तिकार प्रतिमा को रंगने में जुट गए हैं, जबकि बाजार के पूजा सामग्रियों की दुकान पर लोगों का तांता लगा हुआ है। लोग कलश स्थापन एवं विभिन्न पूजा सामग्रियों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में पूजा सामग्रियों के दाम में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। लेकिन लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं है तथा महंगाई के बावजूद कम ही सही लेकिन तमाम समानें बिक रही है।

उल्लेखनीय है कि महालया नवरात्रि और दुर्गा पूजा के शुरुआत का प्रतीक है। महालया के दिन ही सबसे पहले पितरों को विदाई दी जाती है। इसके बाद मां दुर्गा कैलाश पर्वत से सीधे धरती पर आती हैं और यहां पूरे नवरात्रि में रहकर भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अत्याचारी राक्षस महिषासुर के संहार के लिए महालया के दिन ही मां दुर्गा का सृजन किया था।

महिषासुर से रक्षा के लिए सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के साथ आदि शक्ति की आराधना किया तथा सभी देवताओं के शरीर से निकली दिव्य रोशनी ने देवी दुर्गा का रूप धारण कर लिया। शस्त्रों से सुसज्जित मां दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिनों तक भीषण युद्ध करने के बाद विजयादशमी के दिन वध कर दिया और तभी से महालया को मां दुर्गा के धरती पर आगमन के दिन के रूप में माना जाता है।

(हि.स.)

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