Mann Ki Baat : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली हिंसा का किया जिक्र, तिरंगे के अपमान से देश को दुख हुआ है

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात में दिल्ली के लाल किला पर 26 जनवरी को हुई हिंसा का भी जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा है कि तिरंगे के अपमान से देश दुखी हुआ है. वर्ष 2021 में पहली बार ‘मन की बात’ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से देश के स्वतंत्रता सेनानियों की वीरगाथाओं पर किताब लिखने की अपील की है। ताकि, भावी पीढ़ी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियां जिंदा रहें। प्रधानमंत्री मोदी ने लेखन को आजादी के नायकों के प्रति उत्तम श्रद्धांजलि बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मशहूर रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में रविवार को कहा, मैं सभी देशवासियों को और खासकर के अपने युवा साथियों का आह्वान करता हूं कि वो देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में लिखें। अपने इलाके में स्वतंत्रता संग्राम के दौर की वीरता की गाथाओं के बारे में किताबें लिखें। अब, जबकि भारत अपनी आजादी के 75 वर्ष मनाएगा, तो आपका लेखन आजादी के नायकों के प्रति उत्तम श्रद्धांजलि होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के हर हिस्से में, हर शहर, कस्बे और गांव में आजादी की लड़ाई पूरी ताकत के साथ लड़ी गई थी। भारत भूमि के हर कोने में ऐसे महान सपूतों और वीरांगनाओं ने जन्म लिया, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। ऐसे में यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारे लिए किए गए उनके संघर्षों और उनसे जुड़ीं यादों को हम संजोकर रखें और इसके लिए उनके बारे में लिखकर हम अपनी भावी पीढ़ियों के लिए उनकी स्मृतियों को जीवित रख सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस साल की शुरूआत के साथ ही कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई को भी करीब-करीब एक साल पूरा हो गया है। जैसे कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई एक उदाहरण बनी है, वैसे ही, अब, हमारा वैक्सीनेशन प्रोग्राम भी, दुनिया में एक मिसाल बन रहा है।

मोदी ने कहा मैं सभी देशवासियों को और खासकर के अपने युवा साथियों को आह्वान करता हूं कि वो देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में लिखें। अपने इलाके में स्वतंत्रता संग्राम के दौर की वीरता की गाथाओं के बारे में किताबें लिखें।

पर्यावरण की रक्षा से कैसे आमदनी के रास्ते भी खुलते हैं, इसका एक उदाहरण अरुणाचल प्रदेश के तवांग में देखने को मिला। इस पहाड़ी इलाके में सदियों से मोन शुगु नाम का एक पेपर बनाया जाता है। इसके लिए पेड़ों को नहीं काटना पड़ता है।

-Agency

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