एक प्याज में अनेक गुण

भोज्य पदार्थों में शामिल औषधीय गुणों से भरपूर बहुपयोगी कंद प्याज रसोई घर का राजा है। यह भारत ही नहीं वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। देश में इसकी भारी खेती होती है। पंजाब और उत्तरप्रदेश सहित अन्य मैदानी क्षेत्रों में इसकी पैदावार से किसान व्यवसायिक लाभ भी कमाते हैं।

आहार-विज्ञानियों के अनुसार भारत में सैंकड़ों-हजारों वर्षों से प्याज का भोजन और चिकित्सा में उपयोग हो रहा है। प्राचीनतम भारतीय संस्कृत ग्रंथों में प्याज और इसके गुणों का प्रमुखता से उल्लेख है। आधुनिक युग में भी इसका उपयोग कम नहीं हुआ है और किसी भी बाजार में प्याज का भंडार कमोवेस भरा ही रहता है।

यहां यह भी गौर करने की बात है कि प्याज की दो किस्में होती हैंः- एक लाल प्याज और दूसरा सफेद प्याज। आयुर्वेद में सफेद किस्म के प्याज के औषधीय गुणों का अधिक बखान किया गया है। किन्तु ऐसा नहीं कि लाल किस्म के प्याज के गुणों को कमतर अंाका गया है।

बाजार के होटल हों या घर की रसोई अधिकांश जगह लाल प्याज ही भोजन में प्रयुक्त होता है। प्याज चाहे शाकाहारी व्यंजन हो या मांसाहारी व्यंजन हो, दोनों में अपनी उपस्थिति से स्वाद बढ़ा देता है। वैसे आयुर्वेदाचार्यों ने रात में कच्चे प्याज को खाने की मनाही की है। लेकिन आमतौर पर दिन-रात कभी भी प्याज का सेवन बंद नहीं रहता। जो सलाह का सच जानते हैं वही मानते हैं वर्ना खाने में प्याज का उपयोग कभी बंद नहीं होता है।

कौन नहीं खाता है प्याजः- साधु-संत, पुजारी और पंडित-ब्रह्मण प्याज नहीं खाते हैं। इसका कारण और कुछ नहीं बल्कि प्याज में तामसिक गुण का होना माना जाता है। प्रथम तो कच्चा प्याज तीव्र गंध से युक्त होता है।

इससे वैसे ‘पवित्र लोग असुविधा महसूस करते हैं। दूसरी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि प्याज में यौन-शक्ति में वृद्धि करनेवाला रसायन मौजूद होता है। इसके अन्य औषधीय योगों के साथ उचित मात्रा में सेवन करने से यौन-क्षमता में वृद्धि के लक्षण के कारण भी उपयोग श्रेणी के लोग प्याज का सेवन करने से दूर रहते हैं।

प्याज का औषधीय उपयेाग: सुप्रसिद्ध आहार-विज्ञानियों, आयुर्वेदाचार्यों एवं प्राकृतिक चिकित्सकों के अनुसार प्याज केवल सब्जी के रूप में या सब्जी में डालकर खाने या फिर सलाद के रूप में खाने के लिए ही नहीं है बल्कि प्याज किसी औषधी से तनिक भी कम नहीं है।

यह कई गंभीर बीमारियों के लिए रामबाण नुस्खा है। हालांकि जानकारी के आधार पर ही औषधी के रूप में प्रयोग करना होगा। यह लू से बचाता है, हृदय रोग नियंत्रित करता है, मधुमेह के निवारण में कारगर है, बाल झड़ने से रोकता है, सर्दी-जुकाम से निरोग करता है, गठिया में आराम देता है, पेशाब और पेट सम्बन्धी रोगों के निवारण में भी प्याज का कोई सानी नहीं है।

एक विशेषज्ञ के अनुसार प्याज में सल्फर की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो खून में उपस्थित कोलेस्ट्राॅल को कम करता है। साथ ही इसमें उपस्थित एंटीआक्सीडेन्ट तनाव को कम करता है। प्याज में पाया जानेवाला फैल्वोनाइड रक्त से ग्लूकोज को कम करता है। प्याज के सेवन से टाइप-1 और टाइप-2 दोनों तरह के मधुमेह से आराम मिलता है। प्याज में विटामिन ‘सी’ भी मिलता है।

आहार विज्ञानी स्वामी अक्षय आत्मानन्द ने अपनी एक आहार-चिकित्सा-विज्ञान से सम्बद्ध पुस्तक में प्याज के जिन औषधीय गुणों का वर्णन और सेवन करने का उपाय बताया है, उसके अनुसार प्याज, इसके डंठल तथा बीज सभी उपयोगी हैं।

इसके बीजों को करायल कहा जाता है। डंढलों में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है, जिससे यह नेत्र रोगों एवं रतौंधी में लाभ पहुंचाता है। करायल (प्याज का बीज) का लड्डू बनाकर खाने से वीर्य-वृद्धि होती है तथा शुक्राणु शक्तिशाली होते हैं। यौनांग की दुर्बलता तथा नपुंसकता भी दूर होती है। दांतों की कीड़े नष्ट होते हैं तथा मूत्र रोगों से भी छुटकारा मिलता है।

हृदय रोग: सौ ग्राम प्याज के रस का प्रतिदिन प्रातःकाल खाली पेट सेवन करने से कोलेस्ट्राॅल की मात्रा ‘नार्मल’ हो जाती है।

खून की कमी: प्याज में उपस्थित लौह तत्व सीधा हजम होकर रक्त-वृद्धि में सहायक होता है। प्याज के 50 ग्राम रस में नींबू और शहद मिलाकर पीने से थैलीसीनिया, पीलिया आदि में पर्याप्त लाभ मिलता है।

दांत के रोग: रूस के चिकित्सकों के अनुसार कच्ची प्याज के रस में रोगाणुओं एवं हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने का गुण है। सड़ते दांतों, सांस की दुर्गन्ध को रोकने में प्याज का सेवन उतम औषधी है।

श्वास दमाः प्रातः खाली पेट 30 ग्राम प्याज का रस 30 ग्राम शहद मिलाकर पीने से एक माह में हीं श्वास-दमा के कष्ट में आरोग्यता प्राप्त होती है। सर्दी-जुकाम, खांसी, इन्फ्लुएंजा आदि में भी यही नुस्खा उपयोगी है।

कामशक्तिः सफेद प्याज छीलकर बारीक काट लें तथा शुद्ध मक्खन में लाल होने तक तलें। शहद मिलाकर प्रतिदिन खाली पेटन सेवन करने से कमजोर लोगों को पूरा लाभ अनुभव होता है। कामोद्दीपन के मामले में लहसुन के बाद प्याज का दूसरा स्थान है।

इसी तरह हैजा, डायरिया एवं पेट सम्बन्धी बीमारियों में भी प्याज का रस और शहद का प्रयोग आरोग्य-प्रद साबित हुआ है। खूनी बवासीर में भी शहद और प्याज के रस का सेवन किया जाता है।

कहा तो यह भी जाता है कि प्याज किसी बूटी से कम नहीं है। इसके खाने से आदमी की उम्र बढ़ती है। इसका दो चम्मच रस शरीर के किसी अतरंग में बने स्टोन को निकाल बाहर करता है।

प्याज के रस को सरसो तेल में मिलाकर मालिश करने से गठिया के दर्द में आराम मिलता है।

इस तरह प्याज स्वयं एक वैद्य है जो स्त्री-पुरूष दोनों के मर्ज में फायदेमंद है। सावधानी से मात्रा में प्याज का सेवन करने के लिए एक आम व्यक्ति के लिए किसी भ्ज्ञी कारण से मनाही नहीं है। इसलिए प्याज खाईये-रोग भगाइये।

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़ डेस्क

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