Modi : पुलिस बल में महिलाओं की संख्या हुई दोगुनी

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नयी दिल्ली 24 अक्टूबर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पहले यह धारणा बन गई थी कि सेना और पुलिस जैसी सेवा केवल पुरुषों के लिए ही होती है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनमें महिला पुलिसकर्मियों की संख्या दोगुनी हो गई है।

श्री मोदी ने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में आज कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही 21 अक्टूबर को हमने पुलिस स्मृति दिवस मनाया है। पुलिस के जिन साथियों ने देश सेवा में अपने प्राण न्योछावर किए हैं, इस दिन हम उन्हें विशेष तौर पर याद करते हैं। मैं आज अपने इन पुलिसकर्मियों के साथ ही उनके परिवारों को भी याद करना चाहूंगा। परिवार के सहयोग और त्याग के बिना पुलिस जैसी कठिन सेवा बहुत मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि पहले ये धारणा बन गई थी कि सेना और पुलिस जैसी सेवा केवल पुरुषों के लिए ही होती है लेकिन आज ऐसा नहीं है। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या दोगुनी हो गई है। 2014 में जहां इनकी संख्या 1 लाख 5 हजार के करीब थी, वहीं 2020 तक इसमें दोगुने से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है और ये संख्या अब 2 लाख 15 हजार तक पहुंच गई है। यहां तक कि केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल में भी पिछले सात सालों में महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। आज देश की बेटियाँ कठिन से कठिन ड्यूटी भी पूरी ताकत और हौसले से कर रही हैं। उदाहरण के लिए, कई बेटियां अभी सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रशिक्षण में से एक विशिष्ट जंगल वारफ़ेयर कमांडोज की प्रशिक्षण ले रही हैं। यह हमारी कोबरा बटालियन का हिस्सा बनेंगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम हवाई अड्डे जाते हैं, मेट्रो स्टेशन जाते हैं या सरकारी दफ्तरों को देखते हैं, सीआईएसएफ की जांबाज महिलाएं हर संवेदनशील जगह की सुरक्षा करते दिखाई देती हैं। इसका सबसे सकरात्मक असर हमारे पुलिस बल के साथ-साथ समाज के मनोबल पर भी पड़ रहा है। महिला सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी से लोगों में, विशेषकर महिलाओं में सहज ही एक विश्वास पैदा होता है। वे उनसे स्वाभाविक रूप से खुद को जुड़ा महसूस करती हैं। महिलाओं की संवेदनशीलता की वजह से भी लोग उन पर ज्यादा भरोसा करते हैं। हमारी ये महिला पुलिसकर्मी देश की लाखों और बेटियों के लिए भी रोल मोडल बन रही हैं।

उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों से आग्रह करते हुए कहा कि वे स्कूलों के खुलने के बाद अपने क्षेत्रों के स्कूलों में जाएँ और वहां बच्चियों से बात करें। मुझे विश्वास है कि इस बातचीत से हमारी नई पीढ़ी को एक नई दिशा मिलेगी। यही नहीं, इससे पुलिस पर जनता का विश्वास भी बढ़ेगा। मैं आशा करता हूं कि आगे और भी ज्यादा संख्या में महिलाएं पुलिस सेवा में शामिल होंगी, हमारे देश की न्यू एज पुलिसिंग का नेतृत्व करेंगी।

आजाद जितेन्द्र , वार्ता

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