Modi : उग्रवाद, कट्टरवाद से मुकाबले की समान रणनीति बनाये एससीओ

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दुशान्बे/नयी दिल्ली, 17 सितंबर : भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का आज आह्वान किया कि वह पश्चिमी एशिया में बढ़ते उग्रवाद एवं मजहबी कट्टरवाद से मुकाबले के लिए एक समान रणनीतिक योजना बनाये जो ना केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि नयी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एससीओ के 21वें शिखर सम्मेलन के मुख्य सत्र को वीडियो लिंक के माध्यम से नयी दिल्ली से संबोधित करते हुए यह आह्वान किया। श्री मोदी ने इस अवसर पर संगठन की 20वीं वर्षगांठ पर सभी सदस्यों को बधाई दी तथा संगठन में नये सदस्य के रूप में शामिल हुए ईरान और संवाद साझीदार के रूप में सम्मिलित सऊदी अरब, मिस्र एवं क़तर का स्वागत किया तथा कहा कि उनके आने से एससीओ भी अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगा।

श्री मोदी ने कहा कि एससीओ की 20वीं वर्षगाँठ इस संस्था के भविष्य के बारे में सोचने का एक उपयुक्त अवसर है। उनका मानना है कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियाँ शांति, सुरक्षा और परस्पर विश्वास के संकट से संबंधित हैं और इन समस्याओं का मूल कारण बढ़ता हुआ मजहबी कट्टरवाद है। अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम ने इस चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है। इस मुद्दे पर एससीओ को पहल करके कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि इतिहास पर नज़र डालें, तो पाएंगे कि मध्य एशिया का क्षेत्र उदार और प्रगतिशील संस्कृतियों एवं मूल्यों का गढ़ रहा है। सूफ़ीवाद जैसी परम्पराएँ यहाँ सदियों से पनपी और पूरे क्षेत्र और विश्व में फैलीं। इनकी छवि हम आज भी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत में देख सकते हैं। मध्य एशिया की इस ऐतिहासिक धरोहर के आधार पर एससीओ को पश्चिमी एशिया में उग्रवाद एवं मजहबी कट्टरवाद से मुकाबले के लिए एक समान रणनीति का खाका विकसित करनी चाहिए।

श्री मोदी ने कहा कि भारत सहित एससीओ के लगभग सभी देशों में, इस्लाम से जुड़ी उदार, सहिष्णु और समावेशी संस्थाएं और परम्पराएँ हैं। एससीओ को इनके बीच एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने इस सन्दर्भ में एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद निरोधक प्रणाली द्वारा किये जा रहे कार्य की सराहना की।

उन्होंने एससीओ के सभी सदस्य देशों से भारत के अध्यक्षीय कार्यकाल में में प्रस्तावित गतिविधियों के कैलेंडर को समर्थन एवं सहयोग की अपेक्षा जतायी और कहा, “मजहबी कट्टरवाद के खिलाफ लड़ाई केवल क्षेत्रीय सुरक्षा एवं पारस्परिक विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे युवाओं के भविष्य के लिए भी बहुत अहम है।”

कट्टरवाद के बढ़ने और असुरक्षा के कारण इस क्षेत्र का विशाल आर्थिक क्षमता का दोहन नहीं हो पाया। खनिज संपदा हो या एससीओ देशों के बीच व्यापार, इनका पूर्ण लाभ उठाने के लिए हमें आपसी कनेक्टिविटी पर जोर देना होगा। इतिहास में मध्य एशिया की भूमिका प्रमुख क्षेत्रीय बाजारों के बीच कनेक्टिविटी के लिए एक सेतु की रही है। यही इस क्षेत्र की समृद्धि का भी आधार था।

प्रधानमंत्री ने एससीओ के माध्यम से मध्य एशिया में अपनी कनेक्टेविटी बढ़ाने की प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए कहा, “भारत मध्य एशिया के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मानना है कि चारों ओर भूमि से घिरे मध्य एशियाई देशों को भारत के विशाल बाज़ार से जुड़ कर अपार लाभ हो सकता है। ईरान के चाबहार बंदरगाह में हमारा निवेश और अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे के लिए हमारा प्रयास, इसी वास्तविकता से प्रेरित है।”

श्री माेदी ने साथ ही यह भी कहा कि कनेक्टिविटी की कोई भी पहल एकतरफा नहीं हो सकती। इनमें सभी देशों की प्रादेशिक अखंडता का सम्मान निहित होना चाहिए। आपसी विश्वास सुनिश्चित करने के लिए कनेक्टिविटी परियोजनाओं को परामर्शी, पारदर्शी और भागीदारी युक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा, “इन सिद्धांतों के आधार पर एससीओ को क्षेत्र में कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए उपयुक्त नियम विकसित करने चाहिए। इसी से हम इस क्षेत्र की पारंपरिक कनेक्टिविटी को पुनः स्थापित कर पाएंगे और तभी कनेक्टिविटी परियोजनाएं हमें जोड़ने का काम करेंगी, न कि हमारे बीच दूरी बढ़ाने का। इस प्रयत्न के लिए भारत अपनी तरफ से हर प्रकार का योगदान देने के लिए तैयार है।”

प्रधानमंत्री ने सामाजिक आर्थिक विकास के लिए भारत की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने अपनी विकास यात्रा में प्रौद्योगिकी का सफल सहारा लिया है। चाहे वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए यूपीआई और रूपे कार्ड जैसी तकनीक हों या कोविड से लड़ाई में हमारे आरोग्य सेतु और कोविन जैसे डिजीटल प्लेटफॉर्म इन सभी को हमने स्वेच्छा से अन्य देशों के साथ भी साझा किया है। हमें एससीओ के साथी देशों के साथ भी इन ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी को साझा करने में और इसके लिए क्षमता निर्माण आयोजित करने में खुशी होगी।

उन्होंने कहा कि विकसित विश्व के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए हमारे क्षेत्र को उभरती टेक्नोलॉजी में साझीदार बनना होगा। इसके लिए हमें अपने प्रतिभाशाली युवाओं को विज्ञान और तर्कपूर्ण सोच की ओर प्रोत्साहित करना होगा। हम अपने उद्यमियों और स्टार्ट अप्स को एक दूसरे से जोड़कर इस तरह की सोच, इस तरह की नवान्वेषी सोच को बढ़ावा दे सकते हैं। इसी सोच से पिछले वर्ष भारत ने पहले एससीओ स्टार्ट-अप फोरम और युवा वैज्ञानिक सम्मेलन का आयोजन किया था।

श्री मोदी ने एससीओ को एक कामयाब संगठन बताते हुए कहा कि श्री मोदी ने एससीओ की सफलता का एक मुख्य कारण यह है कि इसका मूल फोकस क्षेत्र की प्राथमिकताओं पर रहा है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि कट्टरवाद, कनेक्टिविटी और जनता के बीच परस्पर संबंधों पर भारत के सुझाव एससीओ की इसी भूमिका को और सबल बनाएंगे।

सचिन, वार्ता

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