National : सहकारिता का विश्वसनीय डाटाबेस बनाया जाएगाः शाह

अहमदाबाद, 28 मई : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि सरकार नयी सहकारिता नीति बनाने के लिए सभी सम्मत पक्षों से विचार-विमर्श शुरू किया है और सहकारिता क्षेत्र का डाटाबेस बनाने का प्रयास चल रहा है।

श्री शाह ने कहा कि केंद्र में सहकारिता क्षेत्र के लिए नए मंत्रालय के गठन को एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि यह आऩे वाले 100 वर्ष तक भारत में सहकारिता आंदोलन को नवजीवन देने वाला और इसमें नया जान फूंकने वाला कदम है।

उन्होंने गांधीनगर में ‘सहकार से समृद्धि’ विषय पर सहकारिता क्षेत्र के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संबोधित किया और इसमें गुजरात में शहरी सहकारिता क्षेत्र की दिग्गज हस्तियां और प्रमुख सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री मनसुख मांडविया ने भी भाग लिया।

श्री शाह ने कहा, “सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों की केंद्र सरकार से लंबे समय से मांग थी कि सहकारिता क्षेत्र के लिए

अलग मंत्रालय बनाया जाये, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। मोदी जी ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए भारत में सहकारिता मंत्रालय की शुरुआत की। ”

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा, “यह कदम (सहकारिता मंत्रालय का गठन) आने वाले 100 साल तक सहकारिता आंदोलन को नया जीवन देने वाला और इस आंदोलन में प्राण फूंकने वाला है। ”

श्री शाह ने कहा कि सरकार नयी सहकारिता नीति पर लोगों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के साथ मिलकर प्राथमिक सहकारी ऋण समितियों से लेकर शीर्ष सहकारी संस्थाओं का डाटाबेस तैयार करने का फैसला किया है और उन्हें एक ही तरह के सॉफ्टवेयर के जरिए नाबार्ड के साथ जोड़ा जाएगा। इससे उनके दैनिक लेन-देन का आंकड़ा नाबार्ड को उपलब्ध होगा। सहकारी ऋण समितियों के काम में पारदर्शिता आएगी और किसी भी पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समिति) को बंद करने की नौबत नहीं आएगी।

उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में विश्वसनीय डाटाबेस का अभी आभाव है। उन्होंने कहा कि पैक्स से लेकर एपेक्स (प्राथमिक से लेकर शीर्ष स्तरीय सहकारी ऋण समितियों) का डेटाबेस बनने से पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

श्री शाह ने कहा पैक्स को बहुउद्देशीय इकाई बनाना भी सरकार का एक लक्ष्य है।

सहकारिता मंत्री ने बताया कि उनका मंत्रालय देशभर में जैविक कृषि उत्पादनों की जांच के लिए सहकारिता के मॉडल पर प्रयोगशालाओं का नेटवर्क विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहली प्रयोगशाला गुजरात के अमूल के परिसर में स्थापित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने शुरू किए हैं। सहकारी क्षेत्र के चीनी मिलों को सदस्यों के बीच लाभ के हस्तांतरण पर आय कर में रियायत से किसानों को आठ हजार करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। सहकारी इकाइयों पर अधिभार की दर 12 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत कर दी गया है तथा सहकारी कंपनियों पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) की दर 18.5 प्रतिशत से घटाकर कार्पोरेट पर लागू 15 प्रतिशत के मैट के बराबर कर दी गयी है।

श्री शाह ने कहा कि अब सहकारी बैंकों को भी क्रेडिट गारंटी फंड वाली योजनाओं के लिए काम करने की छूट दी गयी है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के नए मंत्रालय के आने से आऩे वाले समय में इस क्षेत्र मेें बड़े बदलाव आऩे वाले है। इससे सहकारी क्षेत्र में नियुक्ति, खऱीद और ऑडिट मेें पारदर्शिता आएगी और सरकारी इकाइयों के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा।

उन्होंने कहा, “ गुजरात सहकारिता आंदोलन को आज देशभर में सफल मॉडल माना जाता है। देशभर के सभी राज्यों में से गुजरात ऐसा राज्य है जहां सहकारिता पूरी पारदर्शिता के साथ चलती है। ”

श्री शाह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन आजादी के समय से ही स्वावलंबन और स्वदेशी, इस दो स्तंभों के आधार पर, मोरारजी देसाई और सरदार पटेल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में इसकी शुरुआत की थी।

मनोहर.देव.श्रवण

वार्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published.