National : लोकतंत्र तभी पनप सकता है जब संवैधानिक संस्थान अपनी मर्यादाओं की सीमा में रहें: धनखड़

जयपुर 08 सितंबर : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि संस्थाओं में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता एवं जवाबदेही का सख्ती से पालन किया जाना जरुरी बताते हुए कहा है कि लोकतंत्र तभी पनप सकता है जब संवैधानिक संस्थानों के बीच पूरा तादात्म्य हो और वे अपनी मर्यादा की सीमा में रहे।

श्री धनखड़ आज शाम राजस्थान बार काउंसिल द्वारा आयोजित उनके सम्मान में आयोजित समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि एक मजबूत, न्यायपूर्ण तथा स्वतंत्र न्यायपालिका, हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्द्धन को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी शर्त है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उन्होंने कहा संस्थाओं में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता तथा जवाबदेही का सख्ती से पालन किया जाना जरूरी है। श्री धनखड़ ने कहा कि लोकतंत्र तभी पनप सकता है जब संवैधानिक संस्थानों के बीच पूरा तादात्म्य हो तथा वे अपनी-अपनी मर्यादा की सीमा में रहें।

बार काउंसिल के सदस्य रह चुके श्री धनखड़ बार के लोगों से मिलकर बहुत खुश हुए और उन्होंने वकीलों का अभिवादन स्वीकार किया और कार्यक्रम के समापन के बाद भी मंच के सामने खड़े वकीलों से मिले और अपनी याद ताजा की। इससे पहले वकीलों ने साफा पहनाकर, गुलदस्ते देकर उनका सम्मान सम्मान किया।

सम्मान समारोह में राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव, राजस्थान बार काउंसिल के अध्यक्ष सुनील बेनीवाल, उपाध्यक्ष योगेन्द्र सिंह शेखावत, संयोजक जे एस चौधरी, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह अध्यक्ष एस सी श्रीमाली, राजस्थान के एडवोकेट जनरल एम एस सिंघवी, भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आर डी रस्तोगी भी मौजूद थे।

जोरा

वार्ता

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