National : एमएसपी पर गठित समिति की पहली बैठक में फसल मानचित्र बनाने पर चर्चा

नयी दिल्ली, 22 अगस्त : कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था को कारगर बनाने, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के विषय में केन्द्र सरकार द्वारा गठित वृहद समिति को सोमवार को यहां हुई पहली बैठक में इन तीन महत्वपूर्ण विषयों पर कृषि मंत्रालय की ओर से तीन विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिये गये।

पूर्व केन्द्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में इस बैठक में पूर्वाह्न साढ़े 10 बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक

चली। सूत्रों ने बताया कि आज की बैठक में 21 सदस्य शामिल हुए थे, जिसमें कृषि, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सचिव, कपड़ा मंत्रालय के सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव भी शामिल थे।

समिति की अगली बैठक सितंबर में हैदराबाद में होगी लेकिन अभी तिथि घोषित नहीं की गयी है।

सूत्रों ने बताया कि बैठक एमएसपी, प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण- इन तीन विषयों पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से विशेष प्रस्तुतीकरण दिये गये। फसल विविधीकरण के मामले में विशेषकर तिलहन और दलहन का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।

उन्होंने कहा कि बैठक में भारत में विभिन्न क्षेत्रों में फसल मानचित्रण की जरूरत पर बल दिया गया।

बैठक में एमएसपी जैसे संवेदनशील विषय पर चर्चा के समय कृषि मूल्य एवं लागत आयोग की कार्य व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और एमएसपी को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष रूप से चर्चा की गयी। इस बैठक में आयोग के वरिष्ठ सदस्य नवीन पी सिंह भी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि किसान संगठनों ने एमएसपी को कानूनी दर्जा प्रदान करने की मांग को लेकर पिछले वर्ष लंबा आंदोलन चलाया था जिसके कारण सरकार को कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए लाये गये तीन कानूनों को वापस लेना पड़ा था।

इस समिति में शामिल कृषि संगठनों के प्रतिनिधि डॉ कृष्णवीर चौधरी ने यूनीवार्ता से कहा, “ संयुक्त किसान मोर्चे के घटक दलों को सरकार द्वारा बनायी गयी समिति में आना चाहिए और किसानों के हित में बात करनी चाहिए ताकि हम कृषि क्षेत्र की विपणन व्यवस्था में सुधार, कृषि में लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के बारे में ठोस सुझाव प्रस्तुत कर सकें और उस पर आगे काम हो। ”

डॉ चौधरी ने कहा कि एमएसपी की वर्तमान व्यवस्था का लाभ मात्र छह प्रतिशत किसानों को हो रहा है, 94 प्रतिशत किसान इसके लाभ से वंचित हैं। देश के 86 प्रतिशत किसानों की कृषि जोत दो एकड़ से कम है, ऐसे किसानों की स्थिति को कृषि उत्पादक संगठनों (एफपीओ) या सहकारिता के माध्यम मजबूत करने पर भी विचार किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के बारे में एक अलग समूह बनाया गया है, क्यों कि वहां की परिस्थितियां भिन्न हैं।

प्राकृतिक खेती के विषय में चर्चा का विषय कृषि लागत कम करना, उत्पादकता बढ़ाना और माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर था। कुछ सदस्यों ने जगह-जगह भूजल स्तर गिरने का मुद्दा भी उठाया। यह बैठक ऐसे दिन हुई जब कुछ किसान संगठनों ने एमएसपी को कानूनी दर्जा देने, बेरोजगारी आदि समस्याओं को लेकर आज जंतर-मंतर पर महापंचायत बुलायी थी। 26 सदस्यीय समिति में किसान संगठनों के प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिकों एवं केन्द्र के कुछ मंत्रालयों और राज्य सरकाराें के अधिकारी शामिल हैं।

मनोहर.श्रवण

वार्ता

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