National : देश भर में संजीदगी से मनाया गया हिन्दी दिवस

नयी दिल्ली 14 सितंबर : भारतीय संस्कृति की विविधता को एक सूत्र में पिरोने में सेतु का काम कर रही राजभाषा हिन्दी के महत्व और प्रासंगिकता को लेकर बुधवार को हिन्दी दिवस के मौके पर देश भर में गोष्ठियों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया वहीं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिन्दी को भारतीय संस्कृति का पर्याय बताते हुये इसके अत्यधिक इस्तेमाल पर जोर दिया।

इस अवसर पर स्कूलों में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया वहीं राजभाषा के उत्थान से जुड़े विभिन्न संस्थानों में संगोष्ठियों के माध्यम से भारतीय समाज में हिन्दी की प्रासंगिकता के महत्व पर प्रकाश डाला गया। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, राजस्थान, पंजाब और उत्तराखंड समेत देश के अधिसंख्य राज्यों के प्रमुखों ने हिन्दी दिवस पर अपनी शुभकामनायें प्रेषित की हैं।

उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने ट्वीट किया “ हिंदी दिवस पर हिदी को जीवन के हर क्षेत्र में अपनाने और प्रोत्साहित करने का संकल्प लें।” उन्होने देश के पहले राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद की उक्ति “अब यह पूरे देश का दायित्व है और खासकर उन लोगों का जिनकी भाषा हिंदी है, कि वे इसे इस प्रकार विकसित करें जिसमें भारत की मिलीजुली संस्कृति पूरी उदारता के साथ निखर सके।” का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिन्दी दिवस पर लोगों को बधाई देते हुए कहा कि भारत की राजभाषा ने देश को विश्व भर में एक विशिष्ट स्थान दिलाया है। ट्विटर पर अपने एक संदेश में श्री मोदी ने कहा “ हिन्दी की सरलता, सहजता और संवेदनशीलता हमेशा आकर्षित करती है। हिन्दी दिवस पर मैं उन सभी लोगों का हृदय से अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने इसे समृद्ध और सशक्त बनाने में अपना अथक योगदान दिया है। ”

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राजभाषा हिन्दी राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोती है। हिंदी सभी भारतीय भाषाओं की सखी है। मोदी सरकार हिंदी सहित सभी स्थानीय भाषाओं के समानांतर विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “ मैं हिंदी के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान देने वाले महानुभावों को नमन करता हूँ। सभी को ‘हिंदी दिवस’ की शुभकामनाएं। ”

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निवास कार्यालय स्थित सभागार में भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त, महादेवी वर्मा, फणीश्वर नाथ रेणु, रामकुमार वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, भवानी प्रसाद मिश्र, बालकृष्ण शर्मा नवीन, माखनलाल चतुर्वेदी, गजानन माधव मुक्तिबोध, आचार्य नंददुलारे वाजपेई और माधव राव सप्रे के चित्र पर माल्यार्पण किया।

उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता को स्थापित करने की सूत्रधार ‘हिंदी भाषा’ भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। हिंदी हृदय के भावों को अभिव्यक्ति देकर विचारों के पुष्प को महकाने और ह्रदय को जोड़ने वाली अद्वितीय भाषा है।

इस बीच उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित इस्लामिक शिक्षण संस्था ‘दारूल उलूम देवबंद’ ने संस्थान में छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी में भी पढ़ाने का फैसला किया है। संस्था के प्रमुख मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने बताया कि दारुल उलूम की प्रबंध समिति की बैठक निर्णय लिया गया कि संस्थान में छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी विषय भी अनिवार्य रूप से पढ़ना होगा। इसके लिये संस्था हिंदी और अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों की जल्द नियुक्ति करेगी। गौरतलब है कि देवबंद में पिछले लगभग 150 साल से भी ज्यादा समय से इस्लामिक शिक्षा को लेकर कुरान, हदीस और अरबी भाषा की शिक्षा दी जाती रही है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिंदी दिवस पर राज्य और देश के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी से गर्व और सम्मान के साथ हिंदी सीखने तथा कामकाज में भी इस भाषा को माध्यम के रूप में अपनाने की अपील की। उन्हाेने ट्वीट किया “ हिंदी जनमानस की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। बिहार में राजभाषा के रूप में हिंदी सरकारी कामकाज की भाषा है। लोगबाग अपने कामकाज में हिंदी को माध्यम के रूप में अपनाएं तथा गर्व एवं सम्मान के साथ हिंदी को सीखें, समझें तथा प्रयोग में लाएं ।”

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हिन्दी भाषा का राष्ट्रीय अखण्डता में अहम योगदान बताते हुए कहा है कि इसने देशवासियों में भाईचारे की भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा देश के विभिन्न राज्यों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करती है। हिन्दी हमारे विचारों की अभिव्यक्ति का सशक्त एवं प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि हिन्दी हमारी राष्ट्रीय अखण्डता की अहम कड़ी है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डॉ. गुंजन गर्ग एवं डॉ. गोपाल काबरा को चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट लेखन के लिए हिंदी सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया तथा ‘भाषा विमर्श’ के स्वर्ण जयंती विशेषांक का विमोचन किया। उन्होने हिन्दी विषय में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले 393 छात्रों को भी सम्मानित किया।

गौरतलब है कि वर्ष 1949 में आज ही के दिन संविधान सभा ने एक मत होकर इसे भारत की राजभाषा के तौर पर स्वीकार किया था। इसी महत्वपूर्ण निर्णय के बाद यह तय किया गया था कि इसे हर क्षेत्र में प्रसारित किया जाएगा। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर हिंदी को वर्ष 1953 से पूरे भारत में लागू किया गया।

प्रदीप, उप्रेती

वार्ता

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