National : ‘हिन्द प्रशांत क्षेत्र में शक्ति असंतुलन पैदा नहीं होने देंगे भारत-फ्रांस’

नयी दिल्ली 14 सितंबर : भारत एवं फ्रांस ने बुधवार को यहां हिन्द प्रशांत क्षेत्र में चीन के कारण उत्पन्न चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की और तय किया कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार से शक्ति असंतुलन नहीं होने देंगे।

विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारत यात्रा पर आयीं फ्रांस की विदेश मंत्री कैथरीन कोलोना के बीच दोनों देशों की द्विपक्षीय मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद अपने प्रेस वक्तव्यों में यह मंतव्य जाहिर किया।

डॉ. जयशंकर ने अपने वक्तव्य में कहा कि हम हिन्द प्रशांत क्षेत्र में त्रिपक्षीय विकास सहयोग स्थापित करने के लिए प्रयास करने पर सहमत हुए है जिससे अंतरराष्ट्रीय सौर गठजोड़ (आईएसए) के फ्रेमवर्क के दायरे में विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जा सके। उन्होंने कहा कि आईएसए के तहत भारत एवं फ्रांस ने भूटान, पापुआ न्यू गिनी और सेनेगल के लिए परियोजनाएं तैयार की गयीं हैं। हिन्द प्रशांत त्रिपक्षीय प्रणाली ऐसे भारतीय नवान्वेषणों एवं स्टार्ट अप्स के लिए प्रासंगिकता सिद्ध करने का मंच है जिनकी अन्य समाजों में भी जरूरत है।

उन्होंने कहा कि फ्रांस यूरोपीय संघ (ईयू) का एक प्रमुख सदस्य है और हम इसलिए कारोबार, निवेश एवं भौगोलिक संकेतकों को लेकर भारत ईयू के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के बारे में चर्चा करते हैं। हम इस संबंध में पहले दौर की बातचीत शुरू होने का स्वागत करते हैं। हम आव्रजन एवं मोबिलिटी साझीदारी के संदर्भ में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवा पेशेवरों के आदान प्रदान की एक योजना शुरू कर रहे हैं।

डाॅ. जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई और हमने माना कि संवाद एवं कूटनीति बहाल होनी चाहिए। संघर्ष के बीच में भी दोनों पक्षों के साथ संवाद करने वाले प्रमुख देशों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रों भी हैं। इस बारे में दोनों नेताओं के विचार एक समान हैं।

सुश्री कैथरीन कोलाेना ने कहा कि फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालने जा रहा है। फ्रांस सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए प्रयास करता रहा है और करता रहेगा। आज की बैठक में हमने हिन्द प्रशांत क्षेत्र की परिस्थितियों के बारे में बहुत कुछ विचार विमर्श किया और माना कि चीन के कारण बहुत सारी चुनौतियां उभर रहीं हैं। हमारा विश्लेषण तकरीबन एक सा है और हमारी चिंताएं भी एक समान है क्योंकि हमें पता है कि चीन किस प्रकार की भूमिका निभा रहा है।

फ्रांस की विदेश मंत्री ने कहा कि वह यह स्पष्ट करना चाहतीं हैं कि न तो हिन्द प्रशांत क्षेत्र में और न ही विश्व में अन्य कहीं भी, शक्ति का कोई असंतुलन नहीं है। हम जो भी अच्छा कर सकते हैं, करते रहेंगे। हम एक दूसरे को सहयोग एवं समर्थन देते रहेंगे ताकि हममें से हरेका अपनी खुद की सामरिक स्वायत्तता विकसित कर सके।

सचिन, उप्रेती

वार्ता

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