National : स्वदेशी युद्धपोत हमारी समुद्री क्षमता, आत्मनिर्भरता की मिसाल: राजनाथ

मुंबई, 17 मई : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को यहां कहा कि स्वदेशी युद्धपोत हमारी समुद्री क्षमता और आत्मनिर्भरता की एक मिसाल है।

श्री सिंह ने आज यहां मझगांव डॉकयार्ड में बनाये गये दो स्वदेशी युद्धपोतों आईएनएस सूरत और आईएनएस उदयगिरि के जलावतरण के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा ‘कोविड और यूक्रेन’ में चल रहे उथल पुथल के बीच इन विध्वंसकों का निर्माण और शुभारंभ हमारी समुद्री क्षमता और आत्मनिर्भरता की एक मिसाल है।

मझगांव डाक शिप बिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने कहा कि यह पहली बार है कि देश में निर्मित दो युद्धपोतों को एक साथ लाॅन्च किया गया है। एमडीएल एक प्रमुख जहाज और पनडुब्बी निर्माण रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।

नौसेना के मझगांव बंदरगाह पर रक्षा मंत्री ने कहा, “भारत की नौसेना का लोहा आज दुनिया मान रही है।” उन्होंने कहा कि ‘सूरत’ (प्रोजेक्ट 15बी) एवं ‘उदयगिरि’ (प्रोजेक्ट 17ए) युद्धपोतों के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक लगी है। दोनों युद्धपोत अत्याधुनिक हथियारों एवं उपकरणों से लैस हैं।

उन्होंने कहा कि इस बात में अब संदेह नहीं है कि भारत अपने लिए युद्धपोतों का निर्माण करने के साथ-साथ दुनिया के लिए इसका निर्माण करेगा। हमारा उद्देश्य केवल ‘मेक इन इंडिया’ ही नहीं बल्कि ‘मेक फॉर वर्ल्ड है।’

श्री सिंह ने कहा कि आज भारतीय नौसेना की ताकत से दुनिया भलीभांति परिचित है। इन दोनों युद्धपोतों का डिजाइन डाइरेक्टरेट ऑफ नेवल डिजाइन ने किया है। रक्षा मंत्री ने कहा है कि इन दोनों युद्धपोतों में लगे करीब 75 प्रतिशत उपकरण एवं प्रणालियों को स्वदेशी कंपनियों (एमएसएमई) ने बनाया है।

आइएनएस ‘सूरत’ प्रोजेक्ट 15बी का हिस्सा है और यह भारत द्वारा बनाए गए सबसे बड़े विध्वंसक पोतों में से एक है। पश्चिमी भारत के दूसरे बड़े कारोबारी शहर के नाम पर इसका नाम रखा गया है। वहीं, विध्वंसक पोत ‘उदयगिरि’ का नाम आंध्र प्रदेश की पहाड़ी श्रृंखला पर है। इसे प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाया गया है। यह इस तरह का तीसरा युद्धपोत है।

युद्धपोत अत्याधुनिक हथियार, सेंसर, प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। यह ‘उदयगिरि’ युद्धपोत का नया संस्करण है। इस युद्धपोत ने फरवरी 1976 से लेकर 2007 तक करीब तीन दशक तक देश की सेवा की।

त्रिपाठी, उप्रेती

वार्ता

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