National : कोविंद ने मोदी और अंबेडकर पर लिखी पुस्तक का विमोचन किया

नयी दिल्ली 16 सितम्बर: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज यहां संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संबंधित पुस्तक ‘अम्बेडकर एंड मोदी: रिफॉर्मर्स आइडियाज परफॉर्मर्स इम्प्लीमेंटेशन’ का विमोचन किया।

इस अवसर पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर, पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति के जी बालकृष्णन, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के निदेशक हितेश जैन तथा अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थि‍त थे।

श्री कोविंद ने डॉ. अम्बेडकर के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि बाबा साहब की देश की बैंकिंग, सिंचाई, बिजली व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली, श्रम प्रबंधन, राजस्व बंटवारा प्रणाली आदि से संबंधित नीतियों को आकार को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका रही।

डॉ. अंबेडकर की परिकल्‍पना और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के बीच समानताओं का उल्लेख करते हुए श्री कोविंद ने कहा कि नई शिक्षा नीति बाबा साहब के विचारों के अनुरूप है। इस नीति को देश भर से मिले दो लाख से अधिक सुझावों से तैयार किया गया है और इसमें मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने को महत्व दिया गया है । उन्होंने कहा कि कई जटिल कानूनों को बदलने के लिए चार श्रम संहिताएं और मजदूरों के लिए सार्वभौमिक खाता संख्या डॉ. अम्बेडकर की परिकल्‍पना का ही परिणाम है।

श्री ठाकुर ने कहा कि यह पुस्तक महान सुधारक बाबा साहेब अम्बेडकर के उत्‍कृष्‍ट विचारों और दूरदर्शिता का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकलन भी है कि पिछले आठ वर्षों में प्रधानमंत्री द्वारा उन विचारों को कैसे क्रियान्वित किया गया है। यह डॉ. अम्बेडकर के दृष्टिकोण को साकार करने हेतु किए जा रहे कठोर प्रयासों का दस्तावेज है।

उन्होंने डॉ. अम्बेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि वह एक उत्कृष्ट राजनेता थे, जिनके विचारों, हस्तक्षेपों और दर्शन ने राष्ट्र व देश की बुनियाद तैयार की। उन्‍होंने कहा, “अम्बेडकर ने अपना पूरा जीवन समानता, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने को समर्पित किया। वह हाशिए पर मौजूद और सामाजिक रूप से उत्पीड़ित लोगों की आवाज थे। उनके जीवन और प्रभाव का आधुनिक भारत के निर्माण पर व्यापक प्रभाव बरकरार है।”

उन्होंने कहा कि प्रथम कानून मंत्री के रूप में डॉ. अम्बेडकर ने भेदभाव विहीन ऐसे समाज की परिकल्पना की थी, जो हाशिए पर मौजूद लोगों को मुख्यधारा में लेकर आए और जिससे विकास के लाभ सभी को समान रूप से मिलें। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद से सरकारों के प्रयास इन विचारों को साकार करने में अपर्याप्‍त रहे हैं लेकिन वर्ष 2014 के बाद से मौजूदा सरकार ने इन उद्देश्यों को पूरा करने का अथक प्रयास किया है।

सरकार के मूलभूत दर्शन को रेखांकित करते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि सरकार बनाने के बाद, शुरुआत में ही प्रधानमंत्री ने दलितों, समाज के उत्पीड़ित और वंचित वर्गों के लिए समर्पित रहने की घोषणा की थी और उसी समय से सरकार के कार्यों और नीतियों ने अंत्योदय के अनुरूप कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का जीवन मंत्र ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ हमेशा से प्रधानमंत्री मोदी के विकास मॉडल के मूल में रहा है।

संजीव

वार्ता

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