National : मोदी ने पंचमहाल ज़िले में 885.42 करोड़ रु के विकास कार्यों का किया लोकार्पण, शिलान्यास

गोधरा, 01 नवंबर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि स्पष्ट नीति तथा स्वच्छ नीयत के साथ कार्य करके अंबाजी से उमरगाम तक के आदिवासी क्षेत्र के आदिवासी बंधुओं का सर्वांगीण विकास कर उन्हें मुख्य धारा में लाया गया है।

श्री मोदी ने गुजरात में आदिवासी क्षेत्र जांबुघोडा तहसील के ककरोलिया से पंचमहाल ज़िले में 885.42 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास करते हुए कहा कि शिक्षा, रोज़गार, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करा कर आदिवासियों का जीवन बेहतर बनाया गया है। पहले की तुलना में पिछले दो दशकों में नीति निर्धारण से जुड़े मामलों में अब आदिवासियों की भागीदारी बढ़ी है।

उन्होंने 52 करोड़ रुपए की लागत से श्री गोविंद गुरु यूनिवर्सिटी, गोधरा के नवनिर्मित प्रशासनिक परिसर, जांबूघोडा तहसील के वडेफ गाँव में नवविकसित संत जोरिया परमेश्वर प्राथमिक विद्यालय तथा उसके परिसर में जोरिया परमेश्वर की प्रतिमा सहित दांडियापुरा गाँव में रूपसिंह नायक प्राथमिक विद्यालय एवं विद्यालय में ही निर्मित रूपसिंह नायक की प्रतिमा का भी लोकार्पण किया।

प्रधानमंत्री ने गोधरा में 522 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले जीएमइआरएस-मेडिकल कॉलेज, 164 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से निर्मित होने वाली कौशल्य–द स्किल यूनिवर्सिटी, 23.87 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले नवीन केन्द्रीय विद्यालय परिसर सहित 710.63 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। उन्होंने गोविंद गुरु यूनिवर्सिटी के 122.18 करोड़ रुपए की लागत वाले ढाँचागत सुविधा कार्यों का भूमिपूजन भी किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री मोदी ने कहा कि आदिवासी आदिकाल से गुजरात में बसते हैं, लेकिन पहले उनके विकास की अवहेलना की गई थी। आदिवासी बंधुओं के लिए मूलभूत तथा बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। आदिवासी युवाओं को शिक्षा लेनी हो तो बाहर जाना पड़ता था। पीने के पानी के लिए बोरवेल जैसे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। गाँव में एक बोरवेल बनाए जाने पर भी उसका ढोल-नगाड़े बजा कर स्वागत किया जाता था। किसी सामान्य बीमारी की स्थिति में शहरों के दवाखानों की ओर देखना पड़ता था। लंबी लाइनों में इंतज़ार करना तथा बाहर ही रात्रि निवास करना पड़ता था। आदिवासी क्षेत्रों में ऐसी दारुण स्थिति थी।

उन्होंने कहा,“ हमने अंबाजी से उमरगाम तक के विकास पर ध्यान केन्द्रित कर बुनियादी सुविधाएँ देना शुरू की और इससे आए परिवर्तन आज देखे जा सकते हैं। डॉक्टर-इंजीनियर बनने के इच्छुक छात्रों के लिए स्थानीय स्तर पर साइंस स्ट्रीम के स्कूल शुरू किए गए हैं। 10 हज़ार नए स्कूल शुरू किए गए हैं। इतना ही नहीं तहसील स्तर पर 11 साइंस कॉलेज, 11 कॉमर्स, 23 आर्ट्स कॉलेज, अनेक छात्रालय शुरू करने के साथ गोधरा में श्री गोविंद गुरु यूनिवर्सिटी तथा नर्मदा ज़िले में बिरसा मुंडा यूनिवर्सिटी शुरू कर आदिवासी महापुरुषों के नाम उनके साथ जोड़ गए हैं। आदिवासी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज भी शुरू होने से आदिवासी युवाओं को घर के निकट ही चिकित्सा शिक्षा और वह भी मातृभाषा में मिलेगी। ”

श्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी महापुरुषों के योगदान की यशगाथा का वर्णन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नायका आंदोलनों ने 1857 की क्रांति में नयी ऊर्जा और चेतना जागृत की थी। क्रांति नायक तात्या टोपे के साथ इस क्षेत्र के वीर पुरुषों संत जोरिया परमेश्वर तथा रूपसिंह नायक ने जुड़कर अद्भुत साहस, मातृभूमि के लिए प्रेम दर्शाते हुए अंग्रेज़ सल्तनत की चूलें हिला दी थीं। ऐसे वीर पुरुषों के माध्यम से भावी पीढ़ी को इतिहास बोध मिलत रहे इसके लिए उनके नाम स्कूलों के साथ जोड़ कर उन्हें अमरत्व दिया गया है।

अनिल.श्रवण

वार्ता

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