National : नई शिक्षा नीति भारत की आत्मा, अपनी भाषा में पढ़ाई का प्रावधान : शाह

भोपाल, 22 अगस्त : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की आत्मा और भारतीयता की उद्घोषणा है एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नीति में अपनी भाषा में पढ़ाई का प्रावधान किया है।
श्री शाह आज यहां कुशाभाऊ ठाकरे जन्म शताब्दी वर्ष समारोह के अवसर पर ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ विषय पर अपना संबोधन दे रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा भी मौजूद थे।
श्री शाह ने कहा कि देश में पहले जो शिक्षा नीति प्रचलित थी, वो बच्चों को एक सफल प्रोफेशनल बना सकती थी, लेकिन जो शिक्षा नीति बच्चे को एक महान व्यक्ति न बनाए, वह सही नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 2020 में जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है, वह देश के बच्चों को महान व्यक्ति बनाएगी। नई शिक्षा नीति भारत की आत्मा और भारतीयता की उद्घोषणा है।
श्री शाह ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में हम अपनी शिक्षा के मूल्यों से भटक गए थे। शिक्षा सिर्फ रोजगार देने या क्लर्क पैदा करने का जरिया बन गई थी। कोई भी शिक्षा नीति तभी सार्थक है, जब वह मनुष्य की आंतरिक शक्तियों को अभिव्यक्ति देकर उसे उत्कृष्ट बनाने का काम करे। श्री शाह ने कहा कि उन्होंने नई शिक्षा नीति के संबंध में कई विशेषज्ञों से चर्चा की है। कोई इसमें रोजगार की प्रबल संभावनाएं देखता है, तो कोई टेक्नोलॉजी और अनुसंधान के लिए पर्याप्त स्पेस देखता है और किसी को इसमें दुनिया के अच्छे पाठ्यक्रम दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें यह भारत की आत्मा और भारतीयता की उद्घोषणा दिखाई देती है, जिसमें सभी महान शिक्षाविदों के विचार समाहित हैं। श्री शाह ने कहा कि पहले जब शिक्षा नीतियां लागू होती थीं, तो बहुत वाद-विवाद और विरोध होता था, लेकिन श्री मोदी ने जब 2020 में नई शिक्षा नीति लागू की, तो कहीं से कोई विरोध नहीं हुआ। इसकी वजह यह है कि इसे लागू करने से पहले बहुत लंबा और गहन विचार-विमर्श किया गया।
गृह मंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने देश पर अपना शासन चलाने के लिए भारतीयों के मन में कई तरह से हीनभावना पैदा की। अंग्रेजी को योग्यता का मापदंड बनाया, जबकि भाषा व्यक्ति की क्षमता की परिचायक नहीं होती, बल्कि वह सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम होती है। अंग्रेजों की इस नीति के कारण देश के सिर्फ पांच प्रतिशत लोग जिन्हें अच्छी अंग्रेजी आती थी, वही विकास की प्रक्रिया में भागीदार होते थे, लेकिन अब इस हीनभावना को त्यागने का समय आ गया है। प्रधानमंत्री ने नई शिक्षा नीति में अपनी भाषा में पढ़ाई का प्रावधान किया है। दुनिया के विकसित देशों में अपनी भाषा में अनुसंधान होते रहे हैं और नई शिक्षा नीति में हमारे देश में भी यही व्यवस्था की गई है। अब अंग्रेजी की अनिवार्यता नहीं होगी और देश के 95 प्रतिशत लोग देश के विकास में भागीदार बनेंगे।
श्री शाह ने कहा कि एक समय था जब सारी दुनिया से लोग भारत में पढ़ने के लिए आते थे। अगर नई शिक्षा नीति पर सही तरीके से अमल हुआ, तो एक बार फिर भारत सारी दुनिया के लिए शिक्षा का केंद्र बनेगा।
स्व. कुशाभाऊ ठाकरे को श्रद्धांजलि देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने कहा कि अधिकतर ऐसे नेताओं को महान समझा जाता है, जो किसी रास्ते को जानता है और अपने अनुयायियों को वह रास्ता दिखाता है। लेकिन कुशाभाऊ ठाकरे ऐसे नेता थे जो न सिर्फ रास्ते को जानते और दिखाते थे, बल्कि उस रास्ते पर खुद चलते थे और अपने कार्यकर्ताओं को भी चलाते थे। वे एक चलती-फिरती यूनिवर्सिटी थे।
गरिमा
वार्ता

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