National News : महिला का मायका पक्ष भी परिवार का हिस्सा, उत्तराधिकार पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ति से जुड़े मामले में बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि महिला का मायका पक्ष भी परिवार का हिस्सा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हिंदू विवाहिता के मायके पक्ष के उत्तराधिकारियों को अजनबी नहीं कहा जा सकता है। वे लोग महिला के परिवार का ही हिस्सा माने जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी विधवा की तरफ से अपने भाइयों के बेटों के नाम संपत्ति करना गलत नहीं है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 (1)(डी) में महिला के पिता के उत्तराधिकारियों को महिला की संपत्ति के उत्तराधिकारियों में शामिल किया गया है।

पीठ ने महिला के देवर के बच्चों की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें महिला द्वारा अपने भाई के बच्चों को संपत्ति दिये जाने को चुनौती दी गई थी। याचिका में कोर्ट से पारिवारिक समझौते में परिवार के बाहर के लोगों को संपत्ति दिए जाने के निर्णय को रद्द करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पहले निचली अदालत ने और फिर हाईकोर्ट ने भी इसी प्रावधान के तहत याचिका को खारिज किया था। दोनों अदालतों का फैसला ठीक था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में दखल का कोई कारण नहीं बनता।

मामला गुड़गांव के बाजिदपुर तहसील के गढ़ी गांव का है। केस के मुताबिक गढ़ी गांव में बदलू की कृषि भूमि थी। बदलू के दो बेटे बाली राम और शेर सिंह थे। शेर सिंह की 1953 में मृत्यु हो गई उसके कोई संतान नहीं थी। शेर सिंह की मौत के बाद उसकी पत्नी जगनो को उसके हिस्से की आधी जमीन मिली। जगनो देवी ने इस जमीन को अपने भाई के बेटों के नाम कर दिया। जगनो के भाई के बेटों ने अपनी बुआ से पारिवारिक समझौते में मिली जमीन पर दावे का कोर्ट में सूट फाइल किया। इस पर अदालत ने 19 अगस्त 1991 को उनके पक्ष में निर्णय दे दिया।

जगनो के देवर के बेटों ने पारिवारिक समझौते में उनके परिवार की जमीन देने का विरोध किया। देवर के बच्चों ने कोर्ट से 19 अगस्त 1991 का आदेश रद करने की मांग करते हुए दलील दी कि पारिवारिक समझौते में बाहरी लोगों को परिवार की जमीन नहीं दी जा सकती। अगर जगनों ने भाई के बेटों को जमीन दी है तो उसे रजिस्टर्ड कराया जाना चाहिए था क्योंकि जगनों के भाई के बेटे जगनों के परिवार के सदस्य नहीं माने जाएंगे। निचली अदालत के बाद हाईकोर्ट में भी यह मामला खारिज हो गया। इसके बाद जगनो के देवर के बेटों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

-Agency

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *