बिहार में मखाना फैक्ट्री से छुड़ाए गए नौ बाल मजदूर

  • ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ और बिहार पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन

कटिहार/नई दिल्ली, 13 सितंबर । बिहार के कटिहार जिले की एक मखाना बनाने वाली फैक्ट्री से नौ बाल मजदूरों को छापेमारी कर मुक्त करवाया गया। छापेमारी की यह कार्रवाई नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के संगठन ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ श्रम अधिकारियों, बिहार पुलिस और अतिरिक्त जिला सुरक्षा अधिकारी के संयुक्त ऑपरेशन और कटिहार के जिला जज के नेतृत्व में किया गया।

मखाना को स्वास्थ्यवर्धन के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है। पूरी दुनिया के मखाना उत्पादन का 90 प्रतिशत बिहार में ही होता है। यही कारण है कि यह यहां एक बड़े उद्योग के रूप में स्थापित है।

मखाने की फैक्ट्री बिना मंजूरी के चलाई जा रही थी और इसमें बाल मजदूरों को काम पर लगाया गया था। यह पहली बार है जब बाल मजदूरों के रेस्क्यू के लिए किसी मखाना फैक्ट्री में छापा मारा गया।

नौ बच्चों में से छह लड़कियां और तीन लड़के हैं। सभी की उम्र 10 से 14 साल के बीच है। इन को ट्रैफिकिंग के जरिए राज्य के मधुबनी एवं दरभंगा जिले से लाया गया था। मखाने की कीमत प्रति किलो 500 से 1,300 रुपए तक होती है। इन बच्चों से बहुत ही मामूली मजदूरी के बदले दोपहर तीन बजे से रात 11 बजे तक काम करवाया जाता था।

इन बच्चों में से एक 13 साल की रानी (बदला हुआ नाम) दरभंगा जिले के एक गांव से ट्रैफिकिंग कर लाई गई थी। उसके पिता को बरगलाया गया था कि उसे अच्छी मजदूरी मिलेगी और एडवांस पैसे देने का भी वादा किया था। नौ लोग के परिवार से आने वाली रानी, आर्थिक तंगी के चलते काम करने को मजबूर थी और इसीलिए उसके पिता ने उसे यहां आने के लिए भेजा था।

(हि.स.)

Leave a Reply

Your email address will not be published.