Nirankari Mission Sant Samagam : कोरोना के मद्देनजर पहली बार ‘वर्चुअल’ होगा निरंकारी संत समागम

  • तीन दिवसीय 73वां वार्षिक वर्चुअल निरंकारी संत समागम 5 दिसम्बर से
  • देश-विदेश से ऑनलाइन जुड़ सकेंगे श्रद्धालु, इस वर्ष मुख्य विषय ‘स्थिरता’

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज़

नई दिल्ली । वैश्विक महामारी कोविड-19 के मद्देनजर पहली बार निरंकारी संत समागम 5 दिसम्बर से वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया जाएगा। देश और विदेश के तमाम श्रद्धालु घर बैठे ऑनलाइन सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज का आशीर्वचन प्राप्त कर सकेंगे। इस वर्ष समागम का मुख्य विषय ‘स्थिरता’ है।

निरंकारी मिशन की प्रवक्ता राज कुमारी ने सोमवार को बताया कि सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज के आशीर्वाद से इस वर्ष का 73वां वार्षिक निरंकारी संत समागम वर्चुअल रूप में 5, 6, 7 दिसम्बर को आयोजित किया जाएगा। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर भारत सरकार द्वारा जारी किए गये दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह संत समागम वर्चुअल रूप में आयोजित किया जाएगा। इसे विश्वभर के लाखों श्रद्धालु, घर बैठे ऑनलाइन माध्यम द्वारा देख सकेंगे।

उन्होंने कहा कि निरंकारी मिशन के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि वार्षिक निरंकारी संत समागम वर्चुअल रूप में आयोजित किया जा रहा है। संपूर्ण समागम का वर्चुअल प्रसारण मिशन की वेबसाइट पर प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त यह समागम संस्कार टीवी चैनल पर तीनों दिन शाम 5.30 से रात्रि 9 बजे तक प्रसारित किया जाएगा।

संत निरंकारी मिशन आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से विश्व में सत्य, प्रेम, एकत्व का संदेश दे रहा है। जिस प्रकार प्रभु परमात्मा स्थिर है और संसार में अन्य सभी कुछ गतिशील, अस्थिरव परिवर्तनशील है जो स्थिर है उसके साथ जुड़कर स्थिरता प्राप्त की जा सकती है। आजकल के आधुनिक परिवेश में, जहां संसार गतिमान होने के साथ साथ, कहीं ना कहीं अस्थिर भी होता जा रहा है, मानव मन को आध्यात्मिक रूप से स्थिर होने की परम आवश्यकता है।

सद्गुरु सुदीक्षा ने जीवन में स्थिरता को समझाते हुए बताया कि जिस वृक्ष की जड़ें मजबूत होती हैं वह हमेशा स्थिर रहता है। तेज हवाएं और आंधियां चाहे कितनी भी हो पर अगर वृक्ष अपने मूल रूप जड़ों से जुड़ाव रखता है तो उसकी स्थिरता बनी रहती है। इसी प्रकार जिस मुनष्य ने ब्रह्मज्ञान प्राप्त करके अपना नाता इस मूल रूप निरंकार से सदैव जोडे़ रखा है उसके जीवन में जैसी भी परिस्थितयां हों तो वह निरंकार प्रभु का सहारा लेकर स्थिरता को प्राप्त कर लेता है।

(हि.स.)

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