अध्यात्म और योग-ध्यान ही नहीं, कोरोना संकट में समाज सेवा की मिसाल बना योगदा सत्संग

श्याम किशोर चौबे

परमहंस श्री श्री स्वामी योगानंद द्वारा स्थापित योगदा सत्संग सोसाइटी सौ साल से अधिक काल से समाज सेवा में लगी हुई है। इसकी पहचान बेशक अध्यात्म और योग-ध्यान, खासकर क्रियायोग के क्षेत्र में है लेकिन गौर से देखा जाय तो इसका मूल मंत्र मानव  सेवा है। योगदा सत्संग के रांची शाखा मठ के एक संन्यासी ने बहुत ही मार्के की बात कही कि वास्तव में व्यायाम और योग-ध्यान भी तो एक तरह से समाज सेवा ही है।

इन क्रियाओं को अपनाकर मनुष्य न केवल सेहतमंद बनता है, अपितु उसका मन पवित्र होता चला जाता है और वह आत्म साक्षात्कार की उन ऊंचाइयों तक पहुंच पाता है, जहां उसका अहं खत्म हो जाता है। वह सबका और सब उसके हो जाते हैं।

ऐसा होने के बाद जीवमात्र के प्रति उसका जो अपनापन, प्रेम और दया भाव जगता है, वहीं से समाज सेवा की धारा शुरू हो जाती है। यह ऐसी तकनीक है, जो आत्म में परमात्मा का समावेश करा देती है। स्वामी योगानंद ने यही विचारधारा मानव समाज के समक्ष रखी थी, जिसको तब भी दुनिया ने हाथोंहाथ लिया था, आज भी ले रही है।

उन्होंने संन्यासियों की ऐसी परंपरा विकसित की, जो सौ साल बाद भी उसी राह पर चल रही है। स्वामी जी ने इस पथ, मठ, सोसाइटी की 103 साल पहले रांची में की थी, जो कालक्रम में पूरी दुनिया में विकसित होती चली गई। यह अलग बात है कि परमहंस योगानंद ने अपने गुरु के आदेश पर जीवन के 30 साल से अधिक वक्त अमेरिका सहित विभिन्न यूरोपीय देशों में गुजारे। वह वक्त की मांग थी। तब भारतीय अध्यात्म और योग-ध्यान से पूर्व के देश नावाकिफ थे।

अपने जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण वे वर्ष स्वामी जी ने पूर्व को देकर भारतीय संस्कृति का जो अलख जगाया, वह आजतक दिनोंदिन फूलता-फलता जा रहा है। स्वामी जी की विचारधारा पर अमल करते हुए योगदा सत्संग बिना कोई भेदभाव किए न केवल अष्टांग योग पर आधारित क्रियायोग से लोगों को परिचित कराता है, अपितु शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हरसंभव योगदान देता है। इतना ही नहीं, आपदा की स्थिति में परेशान मानवता की भी सेवा से यह खुद को जोड़ लेता है।

योगदा आश्रम कोरोना वाॅयरस जनित कोविड-19 बीमारी को मानव समाज के लिए विनाशकारी मानता है। चीन के वुहान शहर से पांच महीने पहले शुरू हुई इस अत्यंत संक्रामक महामारी का शिकार इसी अवधि में लगभग पूरी दुनिया हो चुकी है। इससे अबतक मरने वालों की संख्या लाखों में है, जबकि संक्रमित मनुष्यों की तादाद और अधिक है। इसके अत्यंत संवेदनशील संक्रमण के कारण सभी देशों में उद्योग-व्यापार सहित निर्माण, विकास आदि प्रायः सभी गतिविधियां बंद हैं।

सड़क से लेकर हवाई मार्ग तक के परिवहन पर पाबंदी लगी हुई है। पूर्व की सदियों/दशकों में बैक्टिरियल इन्फेक्शन के कारण फ्लू, काॅलरा, चेचक जैसी बीमारियों के प्रकोप से वाॅयरस जनित यह कोविड-19 कहीं अधिक संक्रामक और मारक साबित हो रहा है। वह भी तब, जबकि आज की दुनिया जागरूकता, ज्ञान-विज्ञान, मेडिकल साइंस आदि क्षेत्रों में चरम पर है। इस परिस्थिति को देखते हुए योगदा आश्रम न केवल झारखंड की राजधानी रांची, अपितु इसके निकटवर्ती जनजाति बहुल ग्रामीण क्षेत्रों में अतुलनीय सेवा कार्य चला रहा है।

कोरोना संकट काल में लंबे लाॅकडाउन के कारण आवागमन और बाजार बंद रहने के कारण नागरिकोें, खासकर ग्रामीणों के समक्ष खाद्यान्न सहित स्वच्छता सामग्री का अभाव स्वाभाविक है। उद्योग-व्यापार और परिवहन बंद रहने से ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ जाने से भी यह अभाव अधिक खल रहा है।

इसी को देखते हुए योगदा आश्रम की ओर से अबतक कई चरणों में 15 हजार किलो खाद्यान्न, चार हजार किलो प्याज, सात हजार किलो आलू, 1,750 लीटर सरसों तेल, 1,200 किलो नमक, 150 किलो हल्दी पाउडर, 33 हजार नग साबुन और 9,400 मास्क राजधानी रांची सहित विभिन्न ग्रामांचलों में वितरित किये जा चुके हैं। खास बात यह कि हर राहत शिविर में लाभुकों को कोविड के लिहाज से बरती जाने वाली सावधानियों की आश्रम के चिकित्सक द्वारा जानकारी दी जाती है।

  • नौ गांवों के लोगों के बीच चलाया सहायता शिविर

लाॅकडाउन के कारण दैनिक उपयोग की सामग्री से वंचित डेढ़ हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों की जरूरतें पूरी करने की नीयत से योगदा सत्संग आश्रम ने आठ अप्रैल को प्रथम सहायता शिविरों का आयोजन किया। इस दौरान रांची के निकट नामकोम प्रखंड स्थित लीची बगान, हरिजन लोनी और नीचे टोला में 350 परिवारों के बीच सहायता सामग्री के पैकेट बनाकर वितरित किये गये।

इन ग्रामीणों के बीच कुल जमा 700 किलो आलू, 700 किलो प्याज, 175 लीटर सरसों तेल, 700 नहाने और कपड़े धोने के साबुन तथा 500 मास्क का वितरण किया गया। सहायता शिविर में डाॅ पवन वर्णवाल ने ग्रामीणों को कम से कम एक मीटर शारीरिक दूरी बनाकर रहने और हर घंटे साबुन से हाथ धोने, मास्क पहनकर चलने और अन्य सुरक्षात्मक उपाय बताया। इसी प्रकार एक बड़ा सहायता शिविर जोन्हा के निकट लगाया गया।

इस शिविर में गुरीडीह पंचायत के छह गांवों के 1,200 ग्रामीण परिवारों को अपेक्षित सामग्री दी गई। उनके बीच नहाने के छह हजार और कपड़े धोने के भी छह हजार साबुन टिकिया तथा ढाई हजार मास्क का वितरण किया गया। इस शिविर में योगदा सत्संग सोसाइटी के महासचिव स्वामी ईश्वरानंद स्वयं उपस्थित थे। स्वामी ईश्वरानंद छाती विशेषज्ञ एमडी डिग्री प्राप्त चिकित्सक रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि कोरोना वाॅयरस से उत्पन्न जानलेवा कोविड-19 महामारी पूरी दुनिया में फैल गई है।

यह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर दूसरे व्यक्ति को प्रभावित कर देती है। इसका पता कुछ दिनों बाद ही चल पाता है। इसका अभी कोई समुचित निदान नहीं ढूंढा जा सका है। बचाव ही एकमात्र उपाय है। इसलिए मास्क पहनना अत्यंत आवश्यक है तथा संक्रमण से बचने के लिए समुचित तरीके से हर घंटे हाथ साबुन से धोने के अलावा हर व्यक्ति के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी बनाकर रहना ही सरलतम उपाय है।

इसी प्रकार रांची में ऐसा ही सहायता शिविर लगाया गया था। स्वामी ईश्वरानंद ने कहा कि योगदा सत्संग के संस्थापक श्री श्री परमहंस योगानंद जी ने मानवता की रक्षा का जो संदेश दिया था, उस पर आश्रम लगातार अमल कर रहा है। ये शिविर भी उसी राह पर चलते रहने के संकल्प की एक कड़ी हैं। आश्रम सरकार के संकल्प ‘कोई भूखा न रहे’ के साथ है और अपनी ओर से जरूरतमंदों की हरसंभव सहायता को तत्पर है। स्वास्थ्य, भोजन आदि की जरूरतों में सहायता पहुंचाने को वह वचनबद्ध है।

कहने की बात नहीं कि श्रीमद्गीता में वर्णित राजयोग के तहत क्रिया योग से विश्व को परिचित कराने वाले श्री श्री परमहंस योगानंद के वचनों पर अमल करते हुए योगदा सत्संग आश्रम कोरोना वाॅयरस के दुष्प्रभावों से त्रस्त मानवता की सेवा में लाॅकडाउन के आरंभिक दिनों से लगा हुआ है। स्वामी
योगानंद ने कहा था कि आप यदि दूसरों की सेवा में अपना अहं भूल जाते हैं तो सच मानिए आपके अंदर अपने आप खुशियों का भंडार समा जाएगा। इसी नीति वचन के तहत आश्रम जरूरतमंदों के बीच आवश्यक सहायता सामग्री का वितरण कर रहा है।

लाॅकडाउन-2 के दौरान सुदूरवर्ती दिवासी क्षेत्र जोन्हा में योगदा मठ ने मोबाइल वैन भेजकर लोगों को इस बात से आगाह और जागरूक किया कि कोविड-19 नामक अत्यंत घातक और संक्रामक महामारी से कैसे बचा जा सकता है। आश्रम सूत्रों के अनुसार 22 अप्रैल को राजधानी क्षेत्र के वार्ड संख्या 52 के तहत हटिया इलाके में 300 किलो चावल, 150 किलो दाल, 200 किलो आलू, 200 किलो प्याज, 50 लीटर सरसों तेल, 200 नग साबुन और 200 ही मास्क का वितरण किया। इस आयोजन का नेतृत्व ब्रह्मचारी निरंजनानंद ने किया।

इसी प्रकार लाॅकडाउन-2 के प्रथम दिन 15 अप्रैल को नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत हटिया इलाके में चंदरघासी, कुट्ट टोला और अन्य आदिवासी रिहायसी टोलों में 450 किलो चावल, 225 किलो दाल सहित अन्य खाद्य सामग्री तथा स्वच्छता साधनों का वितरण किया गया। उसके एक दिन पूर्व खूंटी रोड के निकट हरदाग और लोअर हटिया की आदिवासी बस्ती में खाद्यान्न, केले और मास्क का वितरण किया गया।

  • डेढ़ हजार परिवारों को मिली जरूरी सामग्री

20 से 22 अप्रैल के बीच तीन दिनों में योगदा आश्रम ने डेढ़ टन चावल, आठ-आठ सौ किलो दाल और आलू, 400 किलो प्याज, दो सौ लीटर सरसों तेल, दो सौ किलो नमक, 20 किलो हल्दी पाउडर, 7,200 नहाने के साबुन, 5,700 कपड़े धोने के साबुन और 3,800 फेस मास्क के अलग-अलग पैकेट बनाकर 1,500 जरूरतमंद परिवारों को उपलब्ध कराया। यह सहायता सामग्री धुर्वा क्षेत्र के जगन्नाथपुर व जोन्हा के गांवों में ब्रह्मचारी धैर्यानंद के नेतृत्व में आश्रम के सेवकों द्वारा वितरित की गई।

  • हहाप पंचायत के जरूरतमंद ग्रामीणों के बीच पहुंचा संन्यासी दल

कोविड लाॅकडाउन के तीसरे हफ्ते में योगदा सत्संग शाखा मठ ने अपने सहायता भरे हाथ राजधानी रांची के निकटवर्ती गांवों तक बढ़ाया। आश्रम सूत्रों ने बताया कि 24 और 25 अपै्रल रांची नगर निगम क्षेत्र से सटी हहाप पंचायत के सात गांवों लीबूडीह, हेसापीड़ी, सरवल, सपारोम, बुरुडीह और लदनापीड़ी में राहत अभियान चलाया गया।

इस दौरान जिला परिषद सदस्य और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा चिह्नित राशनकार्ड विहीन और बेरोजगार पांच सौ ग्रामीणों को जीवनोपयोगी सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस सामग्री में 1,500 किलो चावल, 600 किलो दाल, 800 किलो आलू, 600 किलो प्याज, 250 लीटर सरसों तेल, 25 किलो हल्दी, एक हजार मास्क और दो हजार नहाने तथा कपड़े धोने के साबुन शामिल थे।

लॉकडाउन-2 के अंतिम दिनों में राजधानी क्षेत्र के तहत और आसपास के लेकरोड, शिवाजी नगर, हटिया, रेलवे कॉलोनी, लेनदापीड़ी, नामकोम में 500 परिवारों को 1,500 किलो चावल और 600 किलो दाल के अलावा 225 लीटर सरसों तेल, 900 किलो आलू, 400 किलो प्याज, 1,750 साबुन, नमक व हल्दी पाउडर के 450 पैकेट तथा 450 मास्क उपलब्ध कराए जाने की जानकारी आश्रम सूत्रों ने 2 मई को दी।

  • संन्यासी खुद बनाते हैं सहायता पैकेट

सभी सहायता सामग्री के पैकेट योगदा के संन्यासी स्वच्छता मानकों पर अमल करते हुए आश्रम परिसर में खुद तैयार करते हैं। इसके बाद ये पैकेट सेनेटाइज किए हुए वाहन में रखे जाते हैं। वितरण स्थल पर  चाॅक से एक-एक मीटर की दूरी का घेरा बनाकर लाभान्वितों को ये पैकेट दिये जाते हैं।

आश्रम के संन्यासी इतने दूरदर्शी हैं कि 22 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में लाॅकडाउन लागू किये जाने के पहले ही उन्होंने आश्रम परिसर को स्वयं सील कर दिया था। रांची शाखा मठ में हर दिन देश-विदेश के श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। जैसा कि एक संन्यासी ने बताया, लगातार आवागमन से श्रद्धालुओं में संक्रमण की आशंका भांप कर भारी मन से यह कदम उठाया गया था। योगदा भक्तों के लिए रांची मठ सर्वाधिक पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है।

इतना ही नहीं, परमहंस योगानंद द्वारा लाॅसएंजीलिस में स्थापित सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप से जुड़े पूर्वी दुनिया के श्रद्धालु भी एक बार रांची मठ में आना चाहते हैं। इसलिए विदेशी भक्त भी यहां आते ही रहते हैं। इन स्थितियों को देखते हुए योगदा सत्संग के संन्यासियों द्वारा यह सुचिंतित कदम उठाया गया।

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