Om birla : वैश्विक संसदीय मंचों पर भारत की नियमित भागीदारी लोकतान्त्रिक मूल्यों के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है : बिरला

रोम/नई दिल्ली । लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को रोम (इटली) में आयोजित जी-20 संसदीय अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन के दौरान अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) के अध्यक्ष दुआर्ते पचेको के साथ बैठक की और विविध वैश्विक मुद्दों पर विचार विमर्श किया।

इस अवसर पर बिरला ने कहा कि वैश्विक संसदीय मंचों पर भारत की नियमित भागीदारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं एवं लोकतान्त्रिक मूल्यों के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने पचेको को बताया कि भारत का प्रयास है कि विश्व की संसदों के बीच शिष्टमंडलों का आदान-प्रदान होता रहे तथा विश्व के लोकतान्त्रिक देशों के जनप्रतिनिधि अपने विचारों को परस्पर साझा करते रहें। उन्होंने पचेको को बताया कि इस प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए भारत की संसद ने विभिन्न देशों के साथ फ्रेंडशिप ग्रुप (मित्रता समूह) बनाये हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आईपीयू के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने तथा लोककल्याण के लिए सशक्त लोकतान्त्रिक संस्थाओं के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि भारत एवं आईपीयू समान रूप से बहुपक्षवाद तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लोकतंत्रीकरण के लिए प्रयासरत हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ने कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि इस महामारी के गंभीर प्रभावों को नियंत्रित करना तथा इसके साथ आर्थिक विकास सुनिश्चित करना विकासशील देशों के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती का सामना सामूहिक तथा साझा प्रयासों से ही हो सकता है। उन्होंने बताया कि भारत ने इस महामारी पर बहुत हद तक नियंत्रण प्राप्त कर लिया है। अभी तक भारत में नागरिकों को कोरोना टीके के 930 मिलियन से अधिक डोज लगाए जा चुके हैं। 17 सितम्बर, 2021 को भारत में 25 मिलियन से अधिक लोगों को टीके लगाए गए, जो एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि भारत में वैक्सीन उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भारत अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ वैक्सीन आपूर्ति के वैश्विक प्रयासों में अपना योगदान दे सके।

बिरला ने यह भी कहा कि भारत इस वर्ष अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ को आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में मना रहा है। साथ ही पूरे देश में इस महत्वपूर्ण अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इन 75 वर्षों की लोकतांत्रिक यात्रा में भारत में लोकतंत्र निरंतर सशक्त और मजबूत हुआ है।

(हि.स.)

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