Paramahansa Yogananda’s birthday : परमहंस योगानंद का जन्मदिन क्यों विशेष है?

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5 जनवरी को जिस महान योगी परमहंस योगानंद का जन्मदिन है, उनके बारे में अनेक लोगों को केवल यही ज्ञात है कि वे विश्व प्रसिद्ध पुस्तक “योगी कथामृत” के लेखक हैं। जबकि वे पश्चिम में “फादर ऑफ योगा” कहे जाते हैं। परमहंस योगानंद ने अमेरिका के लॉस एंजिलिस के माउंट वाशिंगटन के अपने मुख्यालय से समूचे विश्व को मुक्तिदायी क्रियायोग के महत्व को बताया।

जीने की कला पर केंद्रित उन्होंने कई व्याख्यान भी दिए, जो बाद में “मानव की निरंतर खोज” नमक पुस्तक में लिपिबद्ध हुए तथा कुछ लघु पुस्तकों के रूप में भी प्रकाशित हुएजो “बुरी आदतों को बदलने,”“तनाव-मुक्ति के उपाय” और “सफलता का नियम” से लेकर विभिन्न महत्वपूर्ण और रोचक विषयों पर केंद्रित हैं। सन 1893 में भारत के गोरखपुर शहर में जन्मे परमहंस योगानंद ने क्रियायोग के प्रसार के लिए सन 1917 में भारत में और 1920 में अमेरिका में अपने आश्रम स्थापित किए।

भारत में उनकी संस्था का नाम “योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया” (वाईएसएस) जोविदेशों में “सेल्फ-रियलाइज़ेशन फेलोशिप” के नाम के जानी जाती है। उनकी शिक्षाओं से असंख्य लोगों के जीवन में चमत्कारिक बदलाव आए हैं और आ रहे हैं। अनेक लोग यह भी नहीं जानते कि “योगी कथामृत” परमहंस जी की मूल अंग्रेजी में लिखित “आटोबायोग्राफी ऑफ अ योगी” का हिंदी अनुवाद है। यह विलक्षण पुस्तक विश्व की 50 से अधिक भाषाओं में अनूदित हो चुकी है — उर्दू और संस्कृत में भी।

सन 1946 से लेकर अब तक इसके असंख्य संस्करण छप चुके हैं और छपते ही इसकी प्रतियाँ तुरंत बिक जाती हैं। इसके अलावा परमहंस योगानंद ने भगवद गीता और बाइबिल पर अद्भुत भाष्य लिखे हैंजो दो-दो खंडों में उपलब्ध हैं। उनकी मुग्धकारी किताबों में “मैंस इटर्नल क्वेस्ट” (हिंदी अनुवाद,“मानव की निरंतर खोज”), “डिवाइन रोमांस”, “जर्नी टू सेल्फ-रियलाइजेशन” और “वाइन ऑफद मिस्टिक” (उमर खैय्याम की रुबाइयों की अध्यात्मिक व्याख्या) हैं। योगदा सत्संग सोसाइटी सेवा कार्य तथा विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों का आयोजनभी करती है।

वाईएसएस विविध लोगों और धर्मों के बीच अधिक सौमनस्य और सद्भावना को बढ़ावा देने के लिए भी कार्यरत है। इसका उद्देश्य सभी लोगों कोअपने जीवन में मानव आत्मा के अनंत आनंद, सुंदरता, और दिव्यता काअनुभव करके इन गुणों को और अधिक व्यक्त करने मेंउनकी सहायता करना है।

परमहंस योगानंद के भारत में रांची, दक्षिणेश्वर, नोयडा और द्वारहाट आश्रमों के अलावा इगतपुरी, शिमला, चेन्नई, पुणे, दिहिका, पुरी, श्रीरामपुर, तेलारी, तथा कोयंबटूर में भक्तों के लिए नौ रिट्रीट और समूचे भारत व नेपाल में 200 से अधिक ध्यान केंद्र और मंडलियां भी हैं। परमहंसयोगानंदकीशिक्षाएं, वाईएसएसद्वारा योगदासत्संग पाठमाला के माध्यम से उपलब्ध कराई गई हैं, जैसा उनके जीवन काल में भी होता था। इस विस्तृत पाठ-शृंखला में क्रियायोग विज्ञान की सभी ध्यान प्रविधियों तथा योगानंद जी द्वारा सिखाए गए संतुलित आध्यात्मिक जीवन के कई अन्य पहलुओं पर भी जानकारी उपलब्धहै।

परमहंसजी की इच्छाओं का पालन करते हुए, वाईएसएस का संचालन योगदा संन्यासियों केद्वारा किया जाता है जिसकी स्थापना उन्होंने भारत की प्राचीन स्वामी परंपरा के अनुसार की थी। योगदा संन्यासी, संन्यास परंपरा द्वारा निर्दिष्ट त्याग की औपचारिक प्रतिज्ञाएं लेते हैं; और वे योगदा भक्तों और हितैषियों का आध्यात्मिक मार्गदर्शन करते हैं।

इन महान विभूति के 129वेंजन्मदिवस के उपलक्ष्य में इस वर्ष 5 जनवरी 2022 को वाईएसएस संन्यासियों द्वारा सुबह 6:30 बजे से 8:30 बजे तक एवं शाम 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक विशेष ध्यान का ऑनलाइन आध्यात्मिक कार्यक्रम संचालित किया जायेगा, जिसमें सभी भाग ले सकते हैं।

अधिकजानकारी: www.yssofindia.org

छविश्रेय: सेल्फ-रियलाइजेशनफेलोशिप / योगदासत्संगसोसाइटीऑफइंडिया

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