राज्यसभा से आईआईआईटी विधियां संशोधन विधेयक पर संसद की मुहर

नयी दिल्ली 22 सितंबर : राज्यसभा ने आज विपक्षी सदस्यों की गैर मौजूदगी में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) विधियां संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके तहत सार्वजनिक निजी साझेदारी के तहत चल रहे पांच आईआईआईटी संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देने का प्रावधान है।

मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने इस विधेयक को कल सदन में पेश किया था लेकिन कृषि क्षेत्र से जुड़े दो विधेयकों का विरोध कर रहे विपक्ष के आठ सदस्यों के निलंबन के बावजूद सदन में मौजूद रहे जिसके कारण कार्यवाही स्थगित कर दी गयी थी। सदन में आज इस विधेयक पर चर्चा हुयी।

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों के अनुसार, उक्त अधिनियम सार्वजनिक निजी साझेदारी के तहत बीस भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित करने के लिये अधिनियमित किया गया है। इसके तहत पहले राष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं के रूप में 15 ऐसे संस्थान निगमित किये गए थे।

सरकार ने पांच और संस्थानों को इनमें सम्मिलित करने का निश्चय किया है। ये सोसाइटी के रूप में भागलपुर (बिहार), सूरत (गुजरात), रायचुर (कर्नाटक), भोपाल (मध्य प्रदेश) और अगरतला (त्रिपुरा) में स्थापित किये जा चुके हैं। उक्त अधिनियम के तहत ये राष्ट्रीय महत्ता के संस्थान हैं।

चर्चा का जबाव देते हुये श्री निशंक ने इसमें पूर्वाेत्तर को शीर्ष प्राथमिकता दी गयी है। उन्होंने कहा कि अब आईआईआईटी में दक्षेस देशों के एक हजार से अधिक छात्र शोध करने के लिए आ रहे हैं। श्री निशंक ने कहा कि पूरी दुनिया में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी पेशेवरों की धूम है।

इससे पहले विपक्ष की गैरमौजूदगी में हुयी चर्चा में वाईएसआर कांग्रेस के विजय साई रेड्डी, जनता दल यूनाइटेड के रामचंद्र प्रसाद सिंह और टीडीपी के कनकमेदला रवीन्द्र कुमार आदि सदस्यों ने भाग लिया।

शेखर अरुण, वार्ता

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