PIL Against Jharkhand Mines Dept : झारखंड के खान सचिव को जेएसएमडीसी का एमडी बनाने के विरूद्ध पीआइएल

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रांची: भूमि अधिग्रहण, विस्थापन एवं पुनर्वास किसान समिति के अध्यक्ष गौरव सिंह ने हाईकोर्ट में पीआइएल (डब्लू पी : आइएल : 795/2022) दाखिल कर राज्य सरकार की एजेंसी जेएसएमडीसी का स्थायी एमडी नियुक्त करने की मांग की है। वर्तमान में उद्योग सचिव आइएएस पदाधिकारी पूजा सिंघल खान विभाग के सचिव और जेएसएमडीसी के एमडी के अतिरिक्त प्रभार में हैं।

पीआइएल में कहा गया है कि जेएसएमडीसी के एमडी का पद खान सचिव को प्रभार में दिये जाने का मामला झारखंड हाईकोर्ट के 11 अक्टूबर 2007 के फैसले के सर्वथा प्रतिकूल है। राज्य की शीर्ष अदालत ने जेएसएमडीसी से जुड़ी हिंद मजदूर सभा द्वारा वर्ष 2007 में दाखिल पीआइएल (डब्लू पी : पीआइएल : 5265/2007) के फैसले में स्पष्ट कहा था कि खान सचिव को ही जेएसएमडीसी के एमडी का प्रभार दिया जाना कतई न तो तर्कसंगत है, न न्यायसंगत। खान सचिव का पद पाॅलिसी बनाने से लेकर उसको लागू कराने के प्रशासक का होता है, जबकि जेएसएमडीसी का एमडी उस पर अमल करने को बाध्य होता है। खान सचिव नियंत्री पदाधिकारी होता है, जबकि जेएसएमडीसी का एमडी लेसी की भूमिका अदा करता है। ऐसे में एक ही व्यक्ति दोनों पदों के साथ न्याय नहीं कर सकता। एक ही व्यक्ति के दोनों पदों पर रहने से कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट की स्थिति पैदा हो जाती है।

पीआइएल में कहा गया है कि खान विभाग द्वारा 26 अक्टूबर 2018 को जारी कार्यालय आदेश संख्या 620 की मार्फत राज्य भर के जिला खनन पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में जेएसएमडीसी की परियोजनाओं में विशेष कार्य पदाधिकारी सह पर्यवेक्षक का दायित्व सौंपा गया है। ऐसे में यदि जेएसएमडीसी बतौर लेसी कोई गलत कदम उठाता है तो कोई भी डीएमओ यानी जिला खनन पदाधिकारी उसके एमडी के विरूद्ध किसी भी तरह का केस दर्ज करने का दुस्साहस नहीं कर सकता।

एक जूनियर पदाधिकारी कैसे अपने विभागीय सचिव, जो लेसी कंपनी का एमडी भी है, के विरूद्ध कोई वैधानिक कार्रवाई करने का साहस जुटा पाएगा। ऐसी स्थिति में खान सचिव को ही जेएसएमडीसी का एमडी के प्रभार में रखने का सीधा मतलब है घोटालों और अनियमितताओं को आमंत्रण देना। दूसरी बात यह कि सरकार द्वारा इस प्रकार की बनाई गई व्यवस्था, जो सालों-साल से चल रही है, हाईकोर्ट के दिशा निर्देश का सरासर उल्लंघन है।

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