बिहार में राज्यसभा चुनाव 2020: एनडीए को दो सीटों का नुकसान

टिकट बंटवारे में जातीय समीकरण रहेगा हावी

कुमार की रिपोर्ट

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए 5 सीटों पर चुनाव 26 मार्च को देश भर में हो रहे चुनाव के साथ होगा। इन रिक्त हुई 5 सीटों में भाजपा के दो सदस्यों आरके सिन्हा और सीपी ठाकुर का कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है। वहीं जदयू के तीन सदस्यों का हरिवंश, कहकशां परवीन और रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल अलगे महीने पूरा हो रहा है।

विधानसभा के आंकड़ों के हिसाब से रिक्त होने वाली पांच सीटों में से एनडीए के खाते में तीन जायेंगी, जबकि दो पर राजद और उसके समर्थक काबिज होंगे। इससे एनडीए और उसके घटक दलों को 2020 के राज्यसभा चुनाव में बिहार से दो सीटों का घाटा होगा।

भाजपा परेशान है कि उसके दोनों रिटायर होने वाले दिग्गज नेताओं के समाजिक समीकरण भाजपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि जहां डाॅ. सीपी ठाकुर जो भुमिहार बिरादरी से आते हैं और यह बिरादरी बिहार में भाजपा गठबंधन के साथ हमेशा खड़ी रही है।

वहीं दूसरे दिग्गज आरके सिन्हा जो कायस्थ बिरादरी के हैं पिछले 54 वर्षों से जनसंघ से जुड़े रहे हैं और उन्होंने बिहार में कायस्थों को अलग-अलग संगठन के माध्यम से भाजपा के पक्ष में गोलबंद किया है। ऐसी परिस्थिति में दोेनों में से किसी एक की भी उम्मीदवारी खारिज करनी भाजपा के लिए आसान नहीं दिखती।

चर्चा है कि किसी एक को भाजपा राज्यपाल पद से सुशोभित कर उसकी बिरादरी के मतदाताओं की भावनाओं को ठेस नहीं लगने देगी।

जदयू भी भारी कश्मोकश में है। उनके रिटायर होने वाले एक दिग्गज सदस्य हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति हैं और ये राजपूत बिरादरी से आते हैं तथा नीतीश कुमार के काफी निकटम माने जाते हैं तथा पूर्व में ये पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ भी रहे हैं और उनके जिले से भी आते हैं। रांची में प्रभात खबर अखबार के संपादक बनने से पूर्व ये रविवार पत्रिका के महत्वपूर्ण संवाददाता रहे हैं और इन्हें समाजवादी आंदोलन का भी अनुभव है।

इस तरह इनका योगदान बिरादरी के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी जदयू के लिए लाभदायक दिखाई देता है पर इसका आने वाले अक्टूबर माह में विधानसभा चुनाव में कितना लाभदायक होगा यह एक सोचनीय विषय भी हो सकता है जदयू आलाकमान के लिए। पिछले चुनाव में कुछ बड़े औद्योगिक घराने भी हरिवंश के साथ जुड़े हुये थे और उनका भी सहयोग नीतीश कुमार से हरिवंश को राज्यसभा में भेजवाने का रहा है। क्या इस चुनाव में भी उनका योगदान रहेगा?

दूसरे रिटायर उम्मीदवार रामनाथ ये गुदड़ी के लाल कहे जाने वाले दिवंगत नेता कर्पूरी ठाकुर जी के सुपुत्र हैं तथा अत्यंत पिछड़े वर्ग से आते हैं

इनका योगदान पार्टी में अपने दिवंगत पिताजी के समय से ही महत्वपूर्ण रहा है तथा इसी कारण उन्हें राज्यसभा मंे अभी तक दो बार जदयू ने भेजा। अतिपिछड़े वर्ग में जदयू के प्रतिद्वंद्वि राजद की भी पैनी नजर है और यदि इस वर्ग से प्रतिनिधि देने में चूक हुई तो राजद झपट्टा मारेगी। अजीब विडंबना है कि तीसरी उम्मीदवार कहकशां परवीन जो मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अत्यंतपिछड़ा वर्ग की है उसे भी नजरअंदाज करना जदयू को भारी पड़ सकता है।

जदयू की रणनीति काफी फंसी-फंसी नजर आती है और जदयू जो भी कमद उठायेेगा वो अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को मद्देनजर रख कर ही उठायेगा।

चर्चा है कि रामनाथ को बिहार काउंसिल में जगह देकर बाकी दो रिटायर होने वाले सदस्यों पर पार्टी दांव लगा सकती है अन्यथा नये उम्मीदवारों की भी खोज हो रही है जिनके जातीय समीकरण आने वाले विधानसभा चुनाव में जदूय के लिए कारगर हो। ऐसी परिस्थिति में हरिवंश और कहकशां परवीन को दोहराने में कठिनाई हो सकती है।

नीतीश कुमार बहुत ही सुलझे खिलाड़ी हैं और सारे समीकरणों पर विचार कर ही निर्णय लेंगे ताकि उनके समीकरण राजद से नहले पर दहला हो सके।
राजद जिसे दो सीटों का लाभ हो रहा है उसमें से निश्चित तौर पर पार्टी अध्यक्ष लालू यादव एक सीट पर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मनोनित करेंगे। राबड़ी देवी पूर्व मुख्यमंत्री रही हैं इसलिए उन्हें दिल्ली मंे बड़ा बंगला भी मिल जायेगा। फिर लालू यादव के अन्य सामाजिक कार्यों के लिए दूसरे स्थान का मोहताज नहीं होना पड़ेगा।

दूसरी सीट के लिए लालू के करीबी बहुत से दिग्गज नेतागण दावेदार हैं और उनके जातीय समीकरण को कैसे लालू यादव नापेंगे ये उनपर निर्भर है। जातीय समीकरण नापने और बैठाने में लालू यादव को महारथ हासिल है और इस विषय में उनकेे सारे सहयोगी दल उनका लोहा मानते हैं।

सत्ता से बाहर रहने के कारण और दो चुनाव झेलने के बाद राजद की अर्थिक स्थिति भी डामाडोल है इसलिए किसी धनी उम्मीदवार के आने की संभावना को भी नहीं नकारा जा सकता है।
अंततः टिकट कैसे भी बंटे उसमें जातीय समीकरण का प्रभाव दिखना ही दिखना है और एनडीए को बिहार में दो सीटों का नुकसान झोलना ही झेलना है।

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