भारतीय मुद्रा में रिकॉर्ड गिरावट, रुपया 83.08 के स्तर तक फिसला

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर। भारतीय मुद्रा में गिरावट का दौर गुरुवार को भी नजर आ रहा है। रुपया आज एक बार फिर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय मुद्रा ने बुधवार को पहली बार डॉलर के मुकाबले 83 रुपये के स्तर को पार किया था। हालांकि बाद में दो पैसे की रिकवरी के साथ भारतीय मुद्रा ने 89.99 रुपये के स्तर पर बुधवार के कारोबार का अंत किया। शुरुआती कारोबार में भारतीय मुद्रा 9 पैसे की कमजोरी के साथ 83.08 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है।

मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि डॉलर इंडेक्स में आई 0.3 प्रतिशत की मजबूती के कारण दुनिया भर की मुद्राओं पर दबाव पहले की तुलना में और बढ़ गया है। इसकी वजह से दूसरी मुद्राओं की तरह ही रुपये की कीमत में भी डॉलर की तुलना में गिरावट आई है। अगर डॉलर इंडेक्स में आने वाले दिनों में गिरावट का रुख नहीं बना तो भारतीय मुद्रा की कीमत गिरकर 83.80 रुपये प्रति डॉलर तक भी जा सकती है। मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन का कहना है कि रुपये में सुधार की संभावना तभी बन सकती है, जब रिजर्व बैंक भारतीय मुद्रा बाजार में अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर का प्रवाह बढ़ा दे।

हालांकि, डॉलर इंडेक्स की मजबूती की वजह से ये उपाय रुपये की कीमत में आ रही गिरावट पर तात्कालिक रोक तो जरूर लगा सकता है, लेकिन जैसे ही रिजर्व बैंक की ओर से डॉलर के प्रवाह को रोका जाएगा, वैसे ही एक बार फिर रुपये की कीमत में तेज गिरावट का सिलसिला बन सकता है। ऐसी स्थिति में रिजर्व बैंक को सिर्फ उसी समय मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना चाहिए, जब रुपये में अचानक तेज गिरावट आने की आशंका बने।

डॉलर इंडेक्स पिछले 20 सालों के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा हुआ है, जिसकी वजह से दुनिया भर की ज्यादातर मुद्राएं डॉलर के मुकाबले गिरकर कारोबार कर रही हैं। डॉलर इंडेक्स की मजबूती की वजह से भारतीय मुद्रा रुपये के अलावा ब्रिटिश पाउंड, जापान के येन और यूरोपियन यूनियन की मुद्रा यूरो समेत ज्यादातर देशों की मुद्रा डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर पर गिरकर कारोबार कर रही हैं।

राहत की बात ये है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट दुनिया की दूसरी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में कम है। भारतीय अर्थव्यवस्था के मूल तत्वों की मजबूती के कारण डॉलर की तुलना में रुपया बार-बार रिकवरी करने की कोशिश भी करता रहा है। ज्यादातर देशों की मुद्रा में डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है।

कुछ दिन पहले ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी साफ किया था कि भारतीय मुद्रा रुपये की गिरावट सिर्फ डॉलर के मुकाबले ही बनी हुई है और इसकी वजह रुपये की कमजोरी नहीं, बल्कि डॉलर इंडेक्स की रिकॉर्ड स्तर पर आई मजबूती है। जानकारों का कहना है कि अगर रुपया कमजोर होता तो भारतीय मुद्रा दुनिया भर की दूसरी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में भी कमजोर होती, लेकिन फिलहाल रुपया दूसरी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में मजबूती बनाए हुए है। इससे साफ है कि रुपये में लगातार मजबूती बनी हुई है लेकिन डॉलर इंडेक्स के रिकॉर्ड उच्च स्तर के कारण डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर होता नजर आ रहा है।

(हि.स.)

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