‘आज के भारत’ की दुनिया में अग्रदूत की भूमिका : राष्ट्रपति

सिरोही (राजस्थान), 04 जनवरी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि आज के भारत की भूमिका दुनिया में अग्रदूत की है। उन्होंने यह विचार मंगलवार रात शांतिवन में आयोजित आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर अभियान के तहत आध्यात्मिक सशक्तिकरण से स्वर्णिम भारत के उदय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में व्यक्त किए।

वो राजस्थान के दो दिवसीय दौरे के तहत मंगलवार देरशाम आबूरोड शहर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन पहुंची। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि युद्ध और कलह के वातावरण में विश्व समुदाय समाधान के लिए भारत की ओर देख रहा है। माउंटआबू से शुरू ये अभियान सभी देशवासियों को सशक्त बनाने और समाज को सशक्त बनाने में संबल प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि भारत इस समय जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है। अपनी संस्कृति के आधार पर हमारा देश आध्यात्मिक व नैतिकता के निर्माण के लिए सक्रिय है। बहनें ही स्नेह, प्रेम, आत्मयीता से लोगों के भीतर जो गलत भावनाएं है, उसे खत्म करने का कार्य करेंगी। लोगों के मन में आध्यात्मिक भाव जागृत हो रहा है। वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं, जब हम आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनेंगे।

ब्रह्माकुमारी संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासक राजयोगिनी बीके मुन्नी, अतिरिक्त महासचिव बीके बृजमोहन, बीके करुणा, बीके मृत्युंजय और बीके सुषमा ने भी उद्घाटन समारोह में विचार रखे। इससे पहले संस्थान के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को स्मृति चिह्न भेंटकर उनका अभिनंदन किया। राष्ट्रपति ने संस्थान के इंदौर स्थित शक्ति सरोवर के ऑडिटोरियम का शिलान्यास किया एवं सिकंदराबाद के रिट्रीट सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने संस्थान की पूर्व मुखिया दादी हृदयमोहिनी के अव्यक्तलोक पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

(हि.स.)

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