Sant Nirankari Mission Update : निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी, एक अध्यात्मिक सद्गुरु एवं अमन और शांति के मसीहा के रूप में पूरी दुनिया में जाने-जाते थे

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संत निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज एक अध्यात्मिक सद्गुरू (Spiritual teacher) थे, जिन्होंने पूरी दुनिया में अमन और शांति का संदेश दिया बाबा हरदेव सिंह (nirankari baba ji) जी ने साल 1980 से लेकर 2016 तक संत निरंकारी मिशन के प्रमुख पद पर रहकर मानवता की सेवा की। और जन जन तक मानव कल्याण का संदेश दिया, उन्होंने पूरी दुनिया को संदेश दिया कि मानवता ही हर धर्म का आधार है, और मानवता का धर्म ही सर्वोपरि है सद्गुरू बाबा हरदेव सिंह जी ने सभी धर्मों के इंसानों को एक रंग में रंगने की अमूल्य कोशिश की।

24 अप्रैल 1980 को जब बाबा गुरूबचन सिंह जी अपने भक्तो को अहिंसा और प्रेम की राह दिखा रहे थे तब हिंसक प्रवृति ने उनकी हत्या कर दी। और बाबा जी के बलिदान से इंसानियत चीख उठी उसके बाद 27 अप्रैल 1980 को बाबा हरदेव जी ने संत निरंकारी मिशन की कमान संभाली, बाबा हरदेव सिंह जी ने बूटा सिंह जी के द्वारा शुरू की गयी। निरंकारी परम्पारा के उस वृक्ष को संभाला जिस पर बाबा अवतार सिंह जी की अवतार बाणी पुष्प खिल रहे थे। Nirankari baba ji ने संत निरंकारी मिशन को सिर्फ देश हीं नहीं पूरी दुनिया में फैलाया और आज संत निरंकारी मिशन के 27 देशों में अपनी संगत हैं। बाबा जी ने सिर्फ मिशन हीं नहीं बल्कि कैसे ऐसे सामाजिक कार्यों में भी समाज की सेवा की जिनसे इंसानियत जिन्दा हो उठे और दुनिया में भाईचारा फैल सके।

मगर दुर्भाग्यवश 13 मई 2016 को कनाडा में एक कार एक्सिडेंट में बाबा जी का निधन हो गया और वे अपने पंचतत्व के शरीर को त्याग कर ब्रह्मलीन हो गए संत निरंकारी मंडल के प्रमुख बाबा हरदेव जी ने इंसानियत प्रेम और भाईचारे और इंसानियत की सेवा के लिए जितना कुछ किया है उसको भुलाया नहीं जा सकता इसीलिए कहते हैं।

बाबा हरदेव का शुरूआती जीवन

निरंकारी बाबा सद्गुरू हरदेव सिंह जी महाराज का जन्म 23 फरवरी सन् 1954 को दिल्ली में बाबा गुरूबचन (पिता) और कुलवंत कौर (माता) के घर में हुआ बाबा हरदेव अपनी चार बहनों के एकलौते भाई थे। बाबा हरदेव सिंह जी शुरूआती पढाई रोसरी पब्लिक स्कूल दिल्ली से हुई तथा बाद की शिक्षा पटियाला के यादवेन्द्र स्कूल से हुई बाबा जी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। वे बहुत ही सरल और सहज स्वभाव के थे उनकी इस सादगी और अध्यात्मिक सोच के कारण उनके दोस्त उनको भोला बाबा भी कहते थे।

घर में अध्यात्म की ज्ञान गंगा बह रही थी और अध्यात्म के उसी ज्ञान में डुबकी लगाकर Nirankari baba ji बाबा हरदेव सिंह जी ने वर्ष 1971 में निरंकारी सेवा दल ज्वाइन करके लोगो की सेवा करना शुरू कर दिया, 14 नवम्बर 1975 को उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन की शुरूआत की और निरंकारी भक्तों के परिवार से जुड़ी सुंदर शुशील और कर्मठ सविन्दर जी को अपने साथी के रूप में अपनाया और इस तरह से उनके सफर में हमसफर जुड़ गया और पूरा निरंकारी समुदाय खुशी से झूम उठा।

बाबा हरदेव सिंह अध्यात्मिक सफर

कितने भी कठिन परीक्षा क्यों ने हो सिद्ध पुरूष उस पर खरे उतरते हैं बाबा हरदेव सिंह जी के सामने भी ऐसी ही परिस्थिति थी 27 अप्रैल 1980 को साध सांगत की सेवा करने वाले बाबा हरदेव सिंह जी को सत्य गुरू का चोला पहना दिया गया। और बाबा हरदेव सिंह जी को निराश हताश और शोकाकुल दिलों की रहनुमाई सौंप दी गई। हिंसा के शिकार भक्तों को अहिंसा का ज्ञान देना आज के जमाने में जब धर्म के नाम पर अधर्म का बोल बाला हो हर तरफ अशांति के विशाल नाग फन लहरा रहे हों, Nirankari baba ji बाबा हरदेव सिंह जी के वचनों का अलग ही महत्व है। बाबा हरदेव सिंह जी निरंकारी मिशन के चैथे प्रमुख बने।

Nirankari baba ji बाबा जी हमेशा वसुधैवकुटुम्बकम् के उसूलों का प्रचार करते थे उनका कहना था की इंसानियत की हर धर्म की बुनियाद और आधार है। यही निरंकार है जो हर इंसान के अंदर है। इसलिए हर इंसान की कद्र करो और हर इंसान की सेवा करों, निरंकारी समुदाय में हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख और इसाई चारों धर्मों के लोग शामिल है, जिनकी संख्या करीब 2 करोड़ है। बाबा हरदेव जी के वचनों और कठिन प्रयासों के बाद आज निरंकारी बाबा ने दुनियां के 27 देशों में अपने संत निरंकारी मिशन के अस्तित्व को स्थापित करके अमन और शांति का पैगाम दिया।

संत निरंकारी मिशन इंसानों के लिए वो दर है जहां निरंकार (formless god) को आधार मानकर न कोई जात-पात देखी जाती है ना किसी का धर्म देखा जाता है और ना ही किसी की पदवी बस एक चीज देखी जाती है तो वो है ‘‘इंसानियत’’।

बाबा हरदेव सिंह आदेश से निम्न क्षेत्रों में उनके भक्तों द्वारा सेवा की गयी- रक्त दान, वृक्षारोपण, फ्री हेल्थ चेक अप सेवा, स्वच्छता, स्कूल, काॅलेज, आपदा में धन राशी दान, महिला व युवा सशक्तिकरण

सभी क्षेत्रों में निरंकारी द्वारा फ्री सेवा की गयी और इनको समाज और सरकार द्वारा खूब सराहा गया ब्लड डोनेशन में निरंकारी मिशन की बहुत बड़ी भूमिका है। जिसको साल 2016 में गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड में भी दर्ज किया गया क्योंकि बाबा हरदेव कहते थे।

सद्गुरू बाबा हरदेव सिंह पूरी दुनिया में रह रहे निरंकारी समुदाय तथा सांसारिक लोगों को अमन और शांति देकर, लगातार बचपन से इंसानियत का पैगाम देकर, दुनिया में भाईचारे और मिलवर्तत का संदेश देकर 13 मई 2016 को माॅट्रियल कनाडा में एक कार एक्सिडेंट में पंच तत्वों के शरीर को त्याग कर ब्रह्मलीन हो गए और दुनिया में प्यार प्रेम भाईचारा मिलवर्तन इंसानियत सिखाने वाला एक मसीहा फिर इस दुनिया से अलविदा कह गये Nirankari baba ji के अकस्मात् निधन पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी व अन्य लोगों ने दुःख जताते हुए उनको श्रद्धांजलि दी। 17 मई 2016 को, बाबा हरदेव सिंह जी की पत्नी सविन्दर कौर जी को मिशन का पांचवां प्रमुख चुना गया और सद्गुरू बाबा की जिम्मेदारी उनको सौंपी गयी 18 मई 2016 को निगमबोध शमशान घाट में उनका अंतिम संस्कार करके उनको अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी गयी।

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