SBI : राजकोषीय घाटा 6.5 प्रतिशत, चालू खाते का घाटा 3.7 फीसदी रहने का अनुमान: एसबीआई

नयी दिल्ली, 04 अगस्त: भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आर्थिक अनुसंधान विभाग की एसबीआई ईकोरैप रिपोर्ट के ताजा संस्करण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष 2022-23 में देश का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पादन जीडीपी के 6.5 प्रतिशत तक सीमित रह सकता है।

बजट अनुमान में राजकोषीय घाटा 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

एसबीआई समूह के मुख्य अर्थशास्त्री डाॅ सौम्यकांति घोष द्वारा लिखी इस रिपोर्ट के अनुसार राजकोषीय और चालू खाते के घाटे की चिंताओं पर केंद्रित इस रिपोर्ट में कहा गया है, “ वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर हमने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए चालू खाते के घाटे (कैड) के अपने अनुमानों को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 प्रतिशत से संशोधित कर 3.7 प्रतिशत कर दिया है। ”

वित्त वर्ष 2021-22 में कैड 1.2 प्रतिशत के बराबर था।

रिपोर्ट में कहा गया है, “ भारत के दोहरे घाटे-राजकोषीय और चालू खाता की समस्या खबरों में है। राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 22) में वार्षिक लक्ष्य के 21.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह वार्षिक लक्ष्य के 18.2 प्रतिशत तक था। ”

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर राजस्व माल एवं सेवाकर (जीएसटी) वसूली के रिकार्ड स्तर पर रहने से मजबूत चल रहा

है। कर वसूली में सुधार कर अनुपालन ऊंचा होने और और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के कारण संभव हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक व्यय पर भी सरकार सावधान है। सरकार ने उच्च पूंजीगत व्यय इस वर्ष इसी अवधि में बजट अनुमान का 23.4 प्रतिशत रहा जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह इस दौरान बजट अनुमान का 20.1 प्रतिशत था।

इस वर्ष जीएसटी संग्रह लगातार पांच महीने से 1.4 लाख करोड़ रुपये से ऊपर चल रहा है। जुलाई 22 में यह 1.49 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है।

मुद्रास्फीति समायोजित मासिक जीएसटी राजस्व चालू वित्त वर्ष में अब तक औसतन लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये रहा है। यह पूर्व-महामारी के मुद्रास्फीति समायोजित मासिक औसत 95,000 करोड़ रुपये की तुलना में 26 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल दर्शाता है।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि मुद्रास्फीति में तेजी के बावजूद जीएसटी संग्रह मजबूत बना हुआ है और इसमें यह वृद्धि शुद्ध खपत के प्रभाव के चलते हो सकती।

रिपोर्ट में केंद्र के हाल के राजकोषीय निर्णयों का जिक्र करते हुए कहा कि है इस बीच सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में पेट्रोलियम पर उत्पाद शुल्क में कटौती, उर्वरक और गैस पर अतिरिक्त सब्सिडी सहित बढ़ती मुद्रास्फीति को रोकने के लिए कई उपायों की घोषणा की है जिसके परिणाम स्वरूप व्यय में वृद्धि हुई है। बजट अनुमान से अधिक जीएसटी राजस्व की प्राप्ति तथा कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर और अतिरिक्त कर राजस्व से राजकोषीय स्थिति के मोर्च पर राहत मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बातों के अतिरिक्त वर्तमान कीमतों पर जीडीपी की वृद्धि ऊंचा होने से भी राहत मिल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार इन परिस्थितियों में राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 6.5 प्रतिशत तक रहने की संभावना है जबकि बजट में इसके 6.4 रहने का अनुमान लगाया गया है।

रिपोर्ट में हालांकि कहा गया है कि विदेशों के साथ व्यवहार के क्षेत्र में व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है और जुलाई’2022 में यह 31 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंच गया। व्यापार घाटे में यह उछाल निर्यात में गिरावट के कारण है। निर्यात जून में 40 अरब डॉलर के स्तर से घट कर जुलाई में 35 अरब डॉलर पर आ गयाजबकि आयात बना रहा 66 अरब डालर के सस्तर पर मजबूत बना रहा।

रिपोर्ट में हाल में मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर अंकुश लगाने के निर्णयों तथा विदेशों में रत्न-आभूषण, रसायन, सिले वस्त्रों तथा कुछ अन्य उत्पादों की मांग में नरमी का उल्लेख किया गया है।

जुलाई 22 में व्यापार घाटे में मासिक आधार पर बढ़ोतरी 4.8 अरब डॉलर थी। यह गत वर्ष सितंबर के बाद से सबसे बड़ा उछाल है, जबकि व्यापार घाटा एक माह पहले से 9.7 अरब डालर बढ़ा था। ।

अप्रैल-जुलाई,22 की अवधि में संचयी व्यापार घाटा 100.0 अरब डॉलर रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है, “ यदि हम इस संख्या के आधार वर्ष भर के व्यापार घाटे का अनुमान लगाएं तो यह वर्ष 2022-23 में जीडीपी के 8.5 प्रतिशत के स्तर होगा। दिलचस्प बात यह है कि यह वित्त वर्ष 2012-13 में हुए व्यापार घाटे से काफी कम है जबकि यह जीडीपी के 10.7 फीसदी के शिखर पर था। इस प्रकार वर्तमान स्थिति 2012-13 की तुलना में काफी बेहतर है। ”

रिपोर्ट में कहा गया है, “ वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर हमने वित्त वर्ष 2013 के लिए कैड के बारे में अनुमानों को पहले के 3.2 प्रतिशत से संशोधित कर 3.7 प्रतिशत कर दिया है। ”

वित्त वर्ष 2021-22 में कैड जीडीपी के 1.2 प्रतिशत के बराबर था।

मनोहर.श्रवण

वार्ता

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