कृषि बिल के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस ने रांची में किया प्रदर्शन, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

रांची, 28 सितम्बर : संसद में पारित कृषि बिल के खिलाफ सोमवार को प्रदेश कांग्रेस की ओर से रांची में पूरी शक्ति के साथ प्रदर्शन किया गया। बापू वाटिका से राजभवन मार्च के लिए निकले प्रभारी आरपीएन सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिस जमींदारी प्रथा को कांग्रेस ने 70 साल पहले खत्म किया, उसी जमींदारी प्रथा को भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार वापस थोपने जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश के 62 करोड़ किसानों के साथ खड़ी है और जब तक इस काले कानून को वापस नहीं ले लिया जाता है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। रामेश्वर उरांव ने कहा कि एक साजिश के तहत देश की मंडियों को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। इस काले कानून से कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर खत्म हो जाएंगे। कांट्रेक्ट फॉर्मिंग की पद्धति से किसानों के अलावा उपभोक्ताओं को भी नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि यह सर्वविदित थ्योरी है कि पूंजीपति कम कीमत पर किसी वस्तु को खरीदते है और उपभोक्ता से अधिक कीमत वसूलते है। इससे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों तबाह हो जाएंगे।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ यह चाहती है कि नये कृषि बिल में एमआरपी का प्रावधान कर दिया जाए। इस संबंध में सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बार-बार वक्तव्य देने से काम नहीं चलेगा। नरेंद्र मोदी ने पहले भी सभी को 15 लाख देने की बात की थी, किसी को मिलेगा क्या। उन्होंने यह भी कहा था कि जीएसटी से सभी राज्यों को फायदा होगा, लेकिन घाटा हो रहा है। इसी तरह पहले नोटबंदी के समय काले धन वापसी की बात कही गयी, लेकिन बिना सोचे-समझे इसे लागू करने से पूरे देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी।
आलमगीर आलम ने कहा कि कृषि बिल को जिस तरह से संसद में पारित कराया गया है, उसमें संसदीय परंपरा की पूरी तरह से अनदेखी की गयी और यह संघीय ढांचे की मूल भावना के भी विपरीत है। उन्होंने कहा कि नये कानून में ग्रेड-1 के अनाज की कीमत पूंजीपति ग्रेड-3 की देंगे, तब भी किसानों को न्याय नहीं मिल पाएगा, गरीब किसान किसका दरवाजा खटखटाएंगे।

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने बताया कि एक ओर देश की सीमा सुरक्षित नहीं है। वहीं किसानों को मिलने वाले एक लाख करोड़ रुपये के हक को भी मोदी सरकार खत्म करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बताना चाहिए कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य कहां मिलेगा, जनता यह जानना चाहती है कि किस मजबूरी के तहत इस काले कानून को लाया गया है।

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि कृषि संबंधित तीन काले कानून के खिलाफ पूरे देश की जनता और किसान एकजुट है और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मदद करें या ना करें, झारखंड में कांग्रेस गठबंधन सरकार 2000 करोड़ रुपये की मदद से किसानों की कर्जमाफी के वायदे को पूरा करेगी। सुबोधकांत सहाय ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के तुरंत बाद भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में पूंजीपतियों के हित में संशोधन की कोशिश की गयी। उसका चौतरफा विरोध हुआ और अब कृषि बिल से साबित हो गया है कि यह पूरी तरह से यह प्रमाणित हो गया है कि यह सरकार पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है।

बापू वाटिका से राजभवन मार्च के बाद पार्टी नेताओं के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव, विधायक दल के नेता आलमगीर आलम,सांसद धीरज प्रसाद साहू विधायक प्रदीप यादव,बंधु तिर्की ,राजेश ठाकुर, गीता कोड़ा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय सहित पार्टी के सभी विधायकों और प्रदेश पदाधिकारी और आम कार्यकर्त्ता भी मौजूद थे।

एजेंसी

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