कृषि क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा के उपयोग से ₹12,465 करोड़ की बचत कर सकती है राज्य सरकार

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सौर ऊर्जा के व्यापक इस्तेमाल से अगले 15 वर्षों में 36.4 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी संभव

रांची, 29 अक्टूबर, 2021 : झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (जेरेडा), सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) और झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के तत्वावधान में आयोजित एक कांफ्रेंस में माननीय श्री बादल पत्रलेख, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री (झारखंड सरकार) ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने से संबंधित ‘एनर्जी ट्रांजिशन रोडमैप’ रिपोर्ट का आज विमोचन किया, जो अगले पंद्रह वर्षों के लिए एक दूरदर्शी नीतिगत दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है और समग्र विकास को सुनिश्चित करने में अक्षय ऊर्जा की परिवर्तनकारी भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित करता है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में कृषि क्षेत्र की संरचनात्मक समस्याओं के समाधान में अक्षय ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देना और इस पर समुचित नीतिगत पहल के लिए परिचर्चा करना था, ताकि राज्य में विकास की गति को तेज किया जा सके।

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इस रोडमैप को एक सामयिक और बेहद जरूरी पहल बताते हुए श्री बादल पत्रलेख, माननीय मंत्री, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने कहा कि “ग्रामीणों की आजीविका और राज्य की आर्थिक प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए कृषि के सौरकरण की बड़ी भूमिका है। अक्षय ऊर्जा के जरिए हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर कर सकते हैं और आर्थिक एवं सामाजिक जीवन में सार्थक बदलाव ला सकते हैं। राज्य सरकार विविध कार्यक्रमों एवं योजनाओं के जरिए किसानों की स्थिति बेहतर करने को लेकर प्रतिबद्ध है। हमारा विभाग इस रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशों को योजना निर्माण के क्रम में सकारात्मक रूप से लेगा।”

इस रिपोर्ट का प्रमुख निष्कर्ष यह है कि कृषि गतिविधियों में सौर ऊर्जा के व्यापक इस्तेमाल से राज्य सरकार 12,465 करोड़ रुपये की बचत करने में सक्षम होगी और साथ ही करीब 4250 मेगावाट की संस्थापित सोलर क्षमता की वृद्धि होगी। क्लाइमेट चेंज के संदर्भ में अक्षय ऊर्जा के कई पर्यावरणीय लाभ हैं, जैसे एग्रीकल्चर के सोलराइजेशन से वर्ष 2021-22 से 2037-38 के बीच 36.4 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन से बचा जा सकता है। करीब 2,34,000 ग्रिड कनेक्टेड सिंचाई पंप और 40,5447 स्टैंडअलोन ऑफ-ग्रिड सोलर पंप सम्मिलित रूप से 700 मेगावाट की मांग को पूरा कर सकते हैं। ग्रामीण स्तर पर कृषि उत्पादों के प्रबंधन से जुड़ी बुनियादी संरचना की दिशा में 8343 माइक्रो और मॉडल कोल्ड स्टोरेज की स्थापना से अगले 15 वर्षों में 3.64 लाख मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता पैदा हो सकती है। इसी तरह ग्राम स्तर पर 81000 गोदामों की सुविधाओं के विकास से 160 मेगावाट की सोलर रूफटॉप की सम्भावना पैदा हो सकती है।

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इस अवसर पर जेरेडा के डायरेक्टर श्री केके वर्मा ने कहा कि “एक स्टेट नोडल एजेन्सी के रूप में राज्य की सभी आर्थिक गतिविधियों में अक्षय ऊर्जा के व्यापक इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं और यह रोडमैप इसी कड़ी में उठाया गया एक ठोस प्रयास है। कृषि का सौरकरण राज्य में सततशील विकास को गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है, जिसमें विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा पर आधारित समाधान प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। इस संदर्भ में सोलर आधारित एग्रीकल्चर फीडर, सोलर सिंचाई पंप, सोलर कोल्ड स्टोरेज से लेकर फ़ूड प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से जुड़े कई समाधान बेहद अहम् हैं। जेरेडा किसानों एवं ग्रामीण उद्यमियों को हरसंभव तकनीकी जानकारी, कैपेसिटी बिल्डिंग और ट्रेनिंग उपलब्ध कराता रहेगा, ताकि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा का राज्यव्यापी फैलाव सुनिश्चित हो सके।”

रोडमैप के व्यापक उद्देश्यों एवं संदर्भ पर सीड के सीईओ श्री रमापति कुमार ने कहा कि “यह रिपोर्ट कृषि के सौरकरण के पक्ष में बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक तर्क रखती है कि राज्य सरकार 12,465 करोड़ की बचत कर सकती है। चूँकि कृषि अर्थव्यवस्था का आधारस्तंभ है, इसलिए इसे एक मजबूत और आकर्षक पेशा बनाने के लिए राज्य सरकार को ‘सस्टेनेबल एग्रीकल्चर मिशन’ शुरू करना चाहिए। इस मिशन को सभी प्रमुख विभागों एवं एजेंसियों के कन्वर्जेन्स के साथ काम करना चाहिए, जो एक विज़न के साथ उचित नीति-निर्माण एवं क्रियान्वयन और समर्थनकरी वित्तीय, निवेश एवं मार्केटिंग परिदृश्य को प्रोत्साहित करे। हमें उम्मीद है कि राज्य सरकार रोडमैप के क्रियान्वयन से जुड़े ठोस कदम उठाएगी, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करके करोड़ों लोगों की आजीविका को सुरक्षित किया जा सके।”

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उदघाटन सत्र को प्रो एसके समदर्शी (झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय) एवं अन्य प्रमुख वक्ताओं ने भी संबोधित किया। कांफ्रेंस के तकनीकी सत्र में कृषि एवं ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों और किसान समूहों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की, जिनमें श्री मुकेश प्रसाद (जेरेडा), श्री देबनाथ बेरा (रांची पार्टनर्स), श्री विजय शंकर (डब्ल्यूआरआई), संजीव वर्मा (इफको किसान), श्री सुनील कुमार (प्रदान) और श्री अश्विनी अशोक (सीड) प्रमुख थे। इसमें चर्चा का एक मुख्य बिंदु यह उभर कर सामने आया कि दूरदर्शी नीतियों को अविलम्ब लागू करने की जरूरत है, जो न केवल एग्रीकल्चर, वाटर और एनर्जी से जुड़ी समस्याओं का ठोस समाधान करे और फसल उत्पादन के पश्चात उद्यमशील गतिविधियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को विकसित करे। इसके लिए सोलर आधारित स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, फ़ूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक सप्लाई चेन, ट्रांसपोर्टेशन और मार्केटिंग बेहद अहम् होंगे, जिससे कृषि उत्पादक संगठन, आजीविका समूह और कौशल विकास केंद्र को बड़ा बल मिलेगा।

इस कार्यक्रम में प्रमुख सरकारी विभागों एवं एजेंसियों, उद्योग-व्यापार संगठनों, किसान उत्पादक समूहों, अकादमिक जगत, रिन्यूएबल एनर्जी डेवेलपर्स, रिसर्च थिंकटैंक और राज्य के प्रमुख सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता हुई।

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