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चोट से दूरी और तकनीकी बारीकियों में सुधार से ओलंपिक में मिलेगी सफलता: मीराबाई

नयी दिल्ली, 21 जून: भारतीय स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू का मानना है कि स्वयं को चोट से दूर रखते हुए तकनीकी बारीकियों में सुधार से पेरिस ओलंपिक में सफलता मिलेगी।

पटियाला के नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान में एक विशेष बातचीत मीराबाई चानू ने यह बात कही। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई ने कहा कि चोट के कारण सबसे अच्छी तैयारी भी विफल हो सकती है, लेकिन मैं मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगी। उन्होंने कहा कि इस बार 49 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा बहुत कठिन होने वाली है। उन्होंने कहा कि स्पर्धा में मैं कम से कम 90 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास करुंगी। पेरिस 2024 मीराबाई चानू का तीसरा ओलंपिक होगा।

उन्होंने कहा, “एशियाई खेलों में चोट लगने के बाद विश्व कप मेरी पहली प्रतियोगिता थी। मैं निश्चित रूप से एक और चोट लगने के बारे में आशंकित थी। मैं पेरिस में अपने अवसर को बर्बाद नहीं करना चाहती थी। हाँ, चोट लगने का डर था। मेरे लिए चोट से बचना और तनाव मुक्त रहना महत्वपूर्ण होगा। मुझे वो चीजें करनी होंगी जो मुझे सही रखने में मदद करें। चोट और दर्द हमारे साथी हैं। आप कभी नहीं जान पायेंगे कि चोट और दर्द कब हमला करेंगे। हमें उन पर विजय प्राप्त करनी है और पेरिस ओलंपिक मुझे बताएगा कि मैंने खेल के इन पहलुओं को कितनी अच्छी तरह से संभाला है।”

उन्होंने कहा वह और उनकी टीम जुलाई के पहले सप्ताह में फ्रांस के ले फर्टे-मिलन के लिए रवाना होंगी और उनके पास ग्रीष्मकालीन खेलों से पहले “अनुकूलन” करने के लिए लगभग एक महीने का समय होगा। उन्होंने कहा कि फिटनेस और तकनीक के बीच सीधा संबंध है और हर मांसपेशी वजन उठाने में भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा हांग्जो में चोट लगना निश्चित रूप से दुखद था। उन्होंन कहा कि चोटों ने मुझे भारत के लिए और मजबूत वापसी करने के लिए दृढ़ संकल्पित किया है।

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