Steel Plant Privitisation : स्टील प्लांट का निजीकरण, टीआरएस विरोध में

हैदराबाद: मार्च 15: । तेलंगाना राष्ट्र समिति ने आंध्र प्रदेश के विशाखा इस्पात संयंत्र के निजीकरण का विरोध किया है। संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ पहले से ही आंदोलन चल रहा है।

आंध्र में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (तेरासा ) के कार्यकारी अध्यक्ष के रामा राव ने इस्पात संयत्र के निजीकरण का विरोध करते हुए बयान दिया है। इस पर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष संजय ने पलटवार करते हुए कहा है कि इस्पात कि संयंत्र के बारे में बोलने वाले केटीआर वर्षों से बंद पड़ी सिरपुर कागजनगर पेपर मिल ,आजम जाहि कपड़ा मिल, निजाम चीनी कंपनी और ऑलविन वॉच कंपनी के बारे में क्यों मौन हैं?

उन्होंने कहा है कि तेलंगाना के गठन के बाद इन कंपनियों को फिर से प्रारंभ करके, बेरोजगार को रोजगार का प्रबंध करने का वादा इसी सरकार ने किया था।
दरअसल, 8 मार्च को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में 100 प्रतिशत विनिवेश पर संसद में एक बयान दिया था। इस घोषणा से आंध्र प्रदेश में स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त हो गया। इसे भड़काने में केंद्र में सत्तारुढ़ भाजपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दल भी सहयोग कर रहे हैं।

18 फ़रवरी 1982 में एक नई कंपनी, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) का गठन किया गया। विशाखापट्टनम इस्पात कारखाने को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया ( सेल )और आरआईएनएल से अलग किया गया और अप्रैल 1982 में विशाखापट्टनम इस्पात कारखाने को निगम की इकाई बनाया गया।
विपक्ष तेलुगु देसम और वामपंथी दलों का भी आरोप है कि केंद्र सरकार के विनिवेश सम्बंधी फैसले से स्टील प्लांट की बिक्री का रास्ता खुल गया है।

निजीकरण के केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में प्लांट कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी मजदूर संगठन के साथ विशाखापत्तनम प्रतिरक्षण समिति का गठन किया गया था। इसके तहत संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने आंदोलन शुरू किया है। इस बीच पता चला है कि इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) विशाखापत्तनम में अपनी 22.19 एकड़ जमीन की बिक्री से एक हजार करोड़ रुपये जुटाएगा। पिछले हफ्ते ही, निर्माण कंपनी

नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी(एनबीसीसी लिमिटेड) ने कहा कि उसने विशाखापत्तनम में 22.19 एकड़ भूमि के पुनर्विकास और विमुद्रीकरण के लिए आरआईएनएल के साथ एक समझौता ज्ञापन पर समझौता किया है।
कंपनी के एक सूत्र ने बताया, “कंपनी को लगभग एक हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है ,क्योंकि जमीन का बाजार मूल्य 1 लाख रुपये प्रति गज है।”
जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी द्वारा ऋण के पिछले हिस्से का भुगतान करने के लिए किया जाएगा।

राष्ट्रीय इस्पात निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी पर 19,592 करोड़ रुपये का कर्ज था। इस्पात मंत्रालय के तहत आरआईएनएल विशाखापत्तनम में 7.3 मिलियन टन स्टील प्लांट का मालिक है और इसका संचालन करता है।

इससे पहले जनवरी में, आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने राष्ट्रीय इस्पात निगम में सरकार की हिस्सेदारी के 100 प्रतिशत विनिवेश के लिए ‘सैद्धांतिक रूप से’ मंजूरी दे दी थी। इसे विशाखापत्तनम स्टील प्लांट या विजाग स्टील भी कहा जाता है।
विशाखा इस्पात संयंत्र विशेष इस्पात उत्पादन वाला देश का पहला तट-आधारित एकीकृत इस्पात संयंत्र है। यह 1992 में स्थापित किया गया था।

तेलुगु देसम के स्थानीय विधायक श्रीनिवास राव का कहना है विशाखापट्टनम स्टील प्लांट खदानों की अनुपलब्धता के कारण घाटे में चल रहा था। उन्होंने कहा, ‘अगर प्लांट को खदानें आवंटित की जाती हैं, तो प्रति टन उत्पादन की लागत में पांच हजार रुपये की कमी आ जाएगी। उन्हों ने कहा कि जब वे सांसद थे, तब भी इसी तरह की स्थिति पैदा हो गई थी। उस समय वे एक प्रतिनिधि मंडल के साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिले थे और उस प्रस्ताव (निजीकरण) को ठुकरा दिया गया थ। उस समय केंद्र सरकार ने प्लांट के पुनर्गठन के लिए एक हजार करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए थे।

इस मुद्दे पर विपक्षी तेलुगू देसम पार्टी भी सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति की तरह दोहरा मापदंड दर्शाती रही है। तेलुगू देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू तब एकाकृत आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने सरकारी चीनी कारखानों का शत प्रतिशत निजीकरण किया था, जिनमें तेलंगाना के चार निजाम चीनी कारखाना भी शामिल है। इसी क्रम में निजीकरण के विरोध में आंदोलन को समर्थन देने चले तेलंगाना राष्ट्र समिति भी अपनी सरकार में अब तक बंद हुए कपड़ा ,चीनी और पेपर कारखानों का संचालन करने के चुनावी आश्वासन के बावजूद चुप्पी साधे हुए है।

तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम के 48 हजार कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान मुख्य मंत्री ने कहा था कि हड़ताल पर जाकर कर्मचारियों ने अपराध किया है। मुख्यमंत्री ने हड़ताल से निगम को 12 सौ करोड़ रुपये का घाटा होने और निगम पर 5 हजार करोड़ रुपये कर्ज़ होने की दलील दी थी। मुख्यमंत्री ने तब निजीकरण को ही एकमात्र उपाय बताया था।

(हि. स.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *