Sukhoi Landing On Highway : राष्ट्रीय राजमार्ग-925 पर पहली बार हुई सुखोई की लैंडिंग, वायुसेना प्रमुख के साथ उतरे राजनाथ और नितिन गडकरी

बाड़मेर । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-925 पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) का उद्घाटन किया। राजस्थान में बाड़मेर के दक्षिण में एनएच-925 के गंधव भाकासर खंड पर आपातकालीन लैंडिंग पट्टी पर पहली बार राष्ट्रीय राजमार्ग का उपयोग आईएएफ विमानों की आपातकालीन लैंडिंग के लिए किया जाएगा।

एनएचएआई ने भारतीय वायु सेना के लिए एक आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) विकसित की थी, जो गगरिया-बखासर और सट्टा-गंधव खंड के नए विकसित टू-लेन पेव्ड शोल्डर का एक हिस्सा है, जिसकी भारतमाला योजना के तहत कुल लंबाई 196.97 किलोमीटर है, जिसकी लागत 765.52 करोड़ रुपये है।

यह परियोजना अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित बाड़मेर और जालोर जिलों के गांवों के बीच संपर्क में सुधार करेगी। पश्चिमी सीमा क्षेत्र में स्थित यह खंड भारतीय सेना की सतर्कता को सुगम बनाने के साथ-साथ देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा।

इस आपातकालीन लैंडिंग पट्टी के अलावा, वायु सेना और भारतीय सेना की आवश्यकताओं के अनुसार, इस परियोजना में कुंदनपुरा, सिंघानिया और बखासर गांवों में तीन हेलीपैड (प्रत्येक आकार में 100 गुणा 30 मीटर) का निर्माण किया गया है। इसका उद्देश्य देश की पश्चिमी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर भारतीय सेना और सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत करना है।

ईएलएफ का निर्माण 19 महीने की अवधि में किया गया था। इस ईएलएफ का काम जुलाई 2019 में शुरू किया गया था और जनवरी 2021 में पूरा किया गया।

काम जीएचवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आईएएफ और एनएचएआई की देखरेख में किया गया।

सामान्य समय के दौरान सड़क यातायात के सुचारू प्रवाह के लिए ईएलएफ का उपयोग किया जाएगा। लेकिन भारतीय वायु सेना के आदेश के लिए ईएलएफ के संचालन के दौरान, सड़क यातायात के सुचारू प्रवाह के लिए सर्विस रोड का उपयोग किया जाएगा। इसका निर्माण 3.5 किमी लंबाई में किया गया है।

यह लैंडिंग स्ट्रिप भारतीय वायु सेना के सभी प्रकार के विमानों की लैंडिंग की सुविधा प्रदान करने में सक्षम होगी।

  • मात्र 19 महीनों में तैयार हुआ यह प्रोजेक्ट

बुधवार को वायुसेना ने इस हवाई पट्टी पर अपनी पहली रिहर्सल की। इस दौरान तीन फाइटर विमान उतारे। सबसे पहले हरक्यूलिस प्लेन को लैंड कराया गया। इसके बाद सुखोई, मिग और अगस्ता हेलिकॉप्टर की लैंडिंग कराई गई।  देश में यह पहली बार हुआ है जब किसी नेशनल हाइवे का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना के विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग के लिए किया जा रहा है। इस दौरान एसयू-30 एमकेआई, सुपर हरक्यूलिस एंड जगुआर फाइटर विमानों का फ्लाईपास्ट हुआ। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 24 महीने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन  इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का निर्माण 19 महीनों के भीतर ही कर लिया गया। जुलाई 2019 में इसकी शुरुआत की गई थी और इसी साल जनवरी में पूरा कर लिया गया। 

  • देश में 12 हाइवे हो रहे तैयार

इसे भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। वायुसेना की इमरजेंसी लैंडिग के लिए तैयार किया गया है। यह युद्ध और इमरजेंसी में बेहद उपयोगी साबित होगा।  32.95 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह हवाई पट्टी तीन किलोमीटर लंबी और 33 मीटर चौड़ी है। रक्षा और परिवहन मंत्रालय के सहयोग से देश में इस तरह के 12 हाईवे तैयार किए जा रहे हैं, जहां विमानों की लैंडिंग कराई जा सके। इससे पहले वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कहा कि भारतीय वायुसेना अगले दो दशक में 350 विमान खरीदने की योजना बना रही है। उन्होंने चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना की समग्र ताकत को बढ़ाने के लिए विषम क्षमताओं को विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

-Agency

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