सुप्रीम कोर्ट ने सीएए पर दो नोडल अधिवक्ता नियुक्त किए, छह दिसंबर को हाेगी सुनवाई

Insight Online News

नयी दिल्ली, 31 अक्टूबर : उच्चतम न्यायालय ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) 2019 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं में से प्रसांगिक दस्तावेजों के संकलन के लिए दो नोडल अधिवक्ताओं को सोमवार को नियुक्त किया।

मुख्य न्यायाधीश यू. यू. ललित और न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने याचिकाकर्ताओं में शामिल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की अधिवक्ता पल्लवी प्रताप और केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं में शामिल कनु अग्रवाल को नोडल अधिवक्ता नियुक्त किया और इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए छह दिसंबर को मुकर्रर की गयी है।

पीठ ने नोडल अधिवक्ताओं से कहा कि वे याचिकाओं में से विवाद के मुख्य बिंदुओं को शामिल करते हुए भौगोलिक और धार्मिक वर्गीकरण का ध्यान रखते हुए डिजिटल तरीके से एक या दो मुख्य दस्तावेज तैयार कर संबंधित याचिकाओं के अधिवक्ताओं से साझा कर दें।

पीठ ने नोडल अधिवक्ताओं से कहा कि वे विवाद के मुख्य बिंदुओं का संकलन करते समय भौगोलिक और धार्मिक वर्गीकरण का जरूर ध्यान रखें।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष कहा कि इस मामले में 232 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें असम की 50 और त्रिपुरा की तीन याचिकाओं को छोड़कर अन्य के मामले में केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। सॉलिसिटर जनरल ने असम और त्रिपुरा के की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए मामले में जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और समय देने की गुहार लगाई। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सिर्फ कुछ दिनों की मोहलत दी जा सकती है।

शीर्ष अदालत ने 12 सितंबर को केंद्र सरकार को याचिकाओं पर अपना जवाब अगली सुनवाई 31 अक्टूबर से पहले दाखिल करने को कहा था।

केंद्र सरकार ने एक हलफनामा दायर कर जवाब दाखिल किया, जिसमें सीएए को चुनौती देने वाली याचिकाओं विरोध किया गया है।

केंद्र सरकार ने अपने 150 पृष्ठों के हलफनामे में कहा है कि वर्ष 2019 में पेश किए गए सीएए का किसी भी भारतीय नागरिक के कानूनी, लोकतांत्रिक या धर्मनिरपेक्ष अधिकार पर किसी तरह का असर नहीं होगा। सीएए केवल एक सीमित विधायी उपाय है, जो इसके आवेदन में सीमित है और किसी भी तरह से नागरिकता से संबंधित मौजूदा कानूनी अधिकारों या शासन को प्रभावित नहीं करता है।

सीएए 2019 को संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद 12 दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली थी।

शीर्ष अदालत ने 18 दिसंबर 2019 को सीएए 2019 पर रोक लगाने की अर्जी ठुकरा दी थी, लेकिन इसकी वैधता की जांच करने का फैसला किया था।

इसके बाद पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।

बीरेंद्र, उप्रेती, वार्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *