Supreme Court : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, यूक्रेन से लौटे मेडिकल विद्यार्थियों को भारतीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता

नयी दिल्ली, 15 सितंबर : उच्चतम न्यायालय के समक्ष हलफनामा दायर कर केंद्र सरकार ने कहा कि यूक्रेन से लौटे मेडिकल विद्यार्थियों को भारतीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है। ऐसा करने का न तो कोई कानूनी प्रावधान है और न अब तक एक भी विद्यार्थी को विदेशी विश्वविद्यालयों से यहां स्थानांतरित किया गया है।

न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ यूक्रेन में युद्ध के कारण लौटे वहां के मेडिकल कॉलेजों के भारतीय विद्यार्थियों द्वारा यहां चिकित्सा शिक्षा पूरी करने की अनुमति के लिए दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई कर सकती है।

मेडिकल विद्यार्थियों की ओर से दायर याचिका के जवाब में सरकार ने कहा है कि ऐसा कोई कानून नहीं है कि स्वदेश लौटे विद्यार्थियों को उनकी आगे की पढ़ाई यहां के मेडिकल कॉलेजों में जारी रखने का मौका दिया जा सके। यह भी कहा कि उन विद्यार्थियों को यहां के कालेजों में स्थानांतरित करने से देश में चिकित्सा शिक्षा के मानकों को नुकसान सकता है।

शीर्ष अदालत में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से पेश हलफनामे में कहा गया है कि स्वदेश लौटे भारतीयों विद्यार्थियों को यहां के मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित करने की मांग करने वाली याचिकाएं न केवल भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम- 1956, और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम-2019 के प्रावधानों के साथ-साथ इसके तहत बनाए गए नियमों का भी उल्लंघन करेगी, बल्कि गंभीर रूप से बाधित करेगी।

केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत कहा,“अब तक एनएमसी द्वारा किसी भी भारतीय चिकित्सा संस्थान / विश्वविद्यालय में किसी भी विदेशी मेडिकल विद्यार्थियों को दाखिले की अनुमति नहीं दी गई है।”

केंद्र का कहना है कि कहा पीड़ित याचिकाकर्ता दो कारणों से विदेश गए थे। पहला- राष्ट्रीय पात्रता-सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में खराब योग्यता के कारण और दूसरा- विदेशों में चिकित्सा शिक्षा पर कम आर्थिक बोझ होने के कारण।

सरकार का कहना है, “यदि खराब योग्यता वाले इन विद्यार्थियों को उसी रूप में भारत के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की अनुमति दी जाती है तो उन इच्छुक उम्मीदवारों की ओर से मुकदमे दायर किए जा सकते हैं, जो इन कॉलेजों में नामांकन से वंचित हो गए थे।”

सरकार का यह भी कहना है कि आर्थिक सामर्थ्य के आधार पर यदि इन याचिकाकर्ता विद्यार्थियों को भारत के निजी मेडिकल कॉलेज आवंटित किए जाते हैं तो वे एक बार फिर संबंधित संस्थान की फीस वहन करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।

बीरेंद्र.संजय

वार्ता

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