Tariq Anwar : नीतीश सरकार में जनता का बुरा हाल, न शिक्षा, न स्वास्थ्य, न रोजगार केवल भ्रष्टाचार : तारिक

पटना : कांग्रेस के महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर ने बिहार में नीतीश सरकार के ‘पंद्रह साल बेमिसाल’ को लेकर आरोप लगाते हुए आज कहा कि इन पंद्रह वर्षों में राज्य के लोगों को न तो शिक्षा मिली, न स्वास्थ्य और न ही रोजगार मिल पाया।

श्री अनवर ने बुधवार को यहां कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पंद्रह साल के कार्यकाल में जनता का बुरा हाल हो चुका है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा के न होने से बिहार अपने बुरे दौर से गुजर रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि श्री कुमार के 15 साल के कार्यकाल की एकमात्र उपलब्धि यह रही है कि वे येन-केन-प्रकारेण सत्ता लगाम अपने हाथ में रखे हुए हैं। वहीं, उनके कार्यकाल में राज्य में शिक्षित बेरोजगारों की भरमार, अपराधियों का अंबार, स्वास्थ्य एवं शिक्षा भी बेकार और घोटालों का अंबार लगा हुआ है।

श्री अनवर ने कहा कि नीतीश सरकार की सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्र में सरकार है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार को हर मोर्चे पर विफल साबित किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, कृषि अनुसंधान, उद्योग, कृषि आधारित उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं में बिहार विफल हो चुका है और रही सही कसर भ्रष्टाचार ने पूरी कर दी है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य जहां के मुख्यमंत्री को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं 55 घोटालों का आरोपी बता चुके हैं। इसके बावजूद श्री नीतीश कुमार फिर उसी प्रधानमंत्री के सहयोग से मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि इस अर्थ स्पष्ट है कि मलाई दोनों लोग (श्री कुमार और श्री मोदी) मिलकर खा रहे हैं। बिहार में राजभवन बनाम सरकार का टकराव खुलेआम हो चुका है और यहां कुलपति भ्रष्टाचार के अपराध में फरार हो रहे हैं।

श्री अनवर ने कहा कि बिहार के अनेक विश्वविद्यालयों में अवैध नियुक्ति, आउटसोर्सिंग और पैसों का फर्जीवाड़ा जिस प्रकार से प्रकाश में आया है, यह दर्शाता है कि राजभवन एवं सरकार मिलकर लूट की खुली छूट का मजा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था को चौपट किया जा रहा है इसलिए बिहार के विश्वविद्यालय में हुए फर्जीवाड़ों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या स्वतंत्र एजेंसी से होनी ही चाहिए।

(वार्ता)

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