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तकनीक का लाभ मानव के सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए हो: मोदी

अपुलिया (इटली) 14 जून : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रौद्योगिकी के मानव केन्द्रित विकास पर बल देते हुए आज कहा कि हमारी कोशिश होनी चाहिए कि टेक्नोलॉजी का लाभ सभी वर्गों तक पहुंचे, समाज के हर व्यक्ति के सामर्थ्य को उजागर करे,सामाजिक असमानताओं को दूर करने में मदद करे,और मानवीय शक्तियों को सीमित करने की बजाय उनका विस्तार करे।

श्री मोदी ने यहां जी7 आउटरीच शिखर सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, अफ्रीका और भूमध्य सागर पर आउटरीच सत्र को संबोधित किया। उन्होंने समूह को उसकी 50वीं वर्षगांठ पर बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मानव जाति के इतिहास की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दोबारा चुने जाने के बाद शिखर सम्मेलन में भाग लेना उनके लिए बहुत संतुष्टि की बात है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी को सफल बनाने के लिए इसे मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित होना होगा। उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी टेक्नोलॉजी की सदी है। मानव जीवन का शायद ही कोई ऐसा पहलु होगा जो टेक्नोलॉजी के प्रभाव से वंचित हो।एक तरफ जहाँ टेक्नोलॉजी मनुष्य को चाँद तक ले जाने का साहस देती है, वहीं दूसरी ओर साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियां भी पैदा करती है। हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि टेक्नोलॉजी का लाभ सभी वर्गों तक पहुंचे,समाज के हर व्यक्ति के सामर्थ्य को उजागर करे,सामाजिक असमानताओं को दूर करने में मदद करे,और मानवीय शक्तियों को सीमित करने की बजाय उनका विस्तार करे। यह केवल हमारी अभिलाषा नहीं, हमारा दायित्व होना चाहिए। हमें टेक्नोलॉजी में एकाधिकार को सर्वाधिकार में बदलना होगा। हमें टेक्नोलॉजी को संहारक नहीं सृजनात्मक रूप देना होगा। तभी हम एक समावेशी समाज की नींव रख सकेंगे। भारत अपनी इस मानव केन्द्रित भावना के जरिए एक बेहतर भविष्य के लिए प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का निर्माण हमारा संकल्प है। हमारी प्रतिबद्धता है कि समाज का कोई भी वर्ग देश की विकास यात्रा में पीछे न छूटे। यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में भारत राष्ट्रीय रणनीति बनाने वाले पहले कुछ देशों में शामिल है। इसी रणनीति के आधार पर हमने इस वर्ष एआई मिशन लॉन्च किया है जिसका मूल मंत्र है एआई फॉर ऑल। एआई के लिए वैश्विक साझीदारी के संस्थापक सदस्य और नेतृत्वकर्ता के रूप में हम सभी देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। पिछले वर्ष भारत की मेज़बानी में की गई जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान हमने एआई के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थापन के महत्व पर बल दिया। भविष्य में भी एआई को पारदर्शी, निष्पक्ष, सुरक्षित, सुलभ और जिम्मेदाराना बनाने के लिए हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।

प्रधानमंत्री ने भारत के ऊर्जा परिवर्तन मार्ग के बारे में विस्तार से बताया कि इसका दृष्टिकोण उपलब्धता, पहुंच, सामर्थ्य और स्वीकार्यता पर आधारित था। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत का रुख चार सिद्धांतों पर आधारित है – उपलब्धता, पहुंच, किफायत एवं स्वीकार्यता। भारत सीओपी के अंतर्गत लिए गए सभी संकल्पों को समय से पहले पूरा करने वाला पहला देश है। हम 2070 तक नेट ज़ीरो के तय लक्ष्य को पाने के अपने संकल्प को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। हमें मिलकर आने वाले समय को हरित युग बनाने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए भारत ने मिशन लाइफ यानि पर्यावरण के लिए जीवनशैली की शुरुआत की है। इस मिशन पर आगे बढ़ते हुए, 5 जून, पर्यावरण दिवस पर, उन्होंने एक अभियान शुरू किया है – एक पेड़ माँ के नाम”। अपनी माँ से सभी प्यार करते हैं । इसी भाव से हम वृक्षारोपण को एक व्यक्तिगत जुड़ाव और वैश्विक दायित्व वाला जनांदोलन बनाना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक दक्षिण, विशेष रूप से अफ्रीका की चिंताओं को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने याद दिलाया कि यह भारत के लिए सम्मान की बात थी कि एयू को उसकी अध्यक्षता में जी20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा, “वैश्विक अनिश्चिततायों और तनाव में वैश्विक दक्षिण के देशों को सबसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। भारत ने वैश्विक दक्षिण के देशों की प्राथमिकताओं और चिंताओं को विश्व पटल पर रखना अपना दायित्व समझा है। इन प्रयासों में हमने अफ्रीका को उच्च प्राथमिकता दी है। हमें गर्व है कि भारत की अध्यक्षता में जी-20 ने अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य बनाया। अफ्रीका के सभी देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास, स्थिरता और सुरक्षा में भारत योगदान देता आया है, और आगे भी देता रहेगा।”

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