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विपक्ष के नेता का पद संवैधानिक नहीं, वैधानिक पद है : भाजपा

दिल्ली । राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं द्वारा इसे लगातार संवैधानिक पद बताए जाने पर कटाक्ष करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि इस पद को लेकर राहुल गांधी को बरगलाया गया है और वास्तव में विपक्ष के नेता का पद संवैधानिक नहीं, बल्कि वैधानिक पद है।

भाजपा आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं पर कटाक्ष करते हुए एक्स पर पोस्ट कर कहा, “ऐसा लगता है कि किसी ने थर्ड टाइम फेल राहुल गांधी को धोखे से विपक्ष के नेता का पद दिलवा दिया है। उनको किसी ने बता दिया कि ये संवैधानिक पद है। जो उनके कमजोर करियर के लिए प्रभावी साबित होगा। तब से दरबारियों ने भी शहज़ादे की जय-जयकार करना बंद नहीं किया है।”

मालवीय ने आगे कहा, “लेकिन विपक्ष के नेता का पद कोई संवैधानिक पद नहीं है। यह एक वैधानिक पद है जिसे आपातकाल के बाद 1977 में एक गैर कांग्रेसी सरकार द्वारा पारित कानून द्वारा परिभाषित किया गया है।”

दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में सीटों की संख्या बढ़ने से उत्साहित कांग्रेस आलाकमान ने इस बार राहुल गांधी को ही विपक्ष के नेता के रूप में चुना है। नियमानुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी है। लेकिन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा को रोक कर राहुल गांधी को शुक्रवार को नीट के मसले पर लोकसभा में नहीं बोलने देने को कांग्रेस ने एक बड़ा मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस के आरोपों के जवाब में मालवीय ने राहुल गांधी पर यह कटाक्ष किया है।

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