घर के वैद्य गुड़ में हैं बड़े-बड़े गुण

-धर्मराज राय

भारतीय आहार शास्त्र में गुड़ का अपना महत्व है। इसका सेवन विविध प्रकार के जटिल रोगों के नाश में तो असरकारक है ही छोटी-छोटी दैनन्दिन बीमारियों को भी शरीर से दूर ही रखता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गुड़ का अब भी प्रयोग होता है लेकिन जब से चीनी इसकी सह-उत्पाद बनी है तब से गुड़ की उपस्थिति ‘बड़े-बड़े’ लोगों के रसोई घर में कम हो गई है। वैसे आयुर्वेद में भी गुड़ के गुणों का यथोचित बखान और वर्णन हुआ है। सुश्रुत-संहिता में गुड़ को रक्तशोधक, वातपित नाशक और स्वाद में मधुर बताया गया है। राज निघण्टु सहित अन्य आयुर्वेदिक संहिताओं में गुड़ की पाचन शक्ति बढ़ाने के गुण का उल्लेख तो है ही उसके साथ गुड़ को हृदय के लिए हितकर, त्रिदोष नाशक, रक्त शोधक, खुजली सहित अन्य चर्म रोगों का नाशक बताया गया है।

हरीति-संहिता मंे गुड़ को क्षय रोग (टीबी), खांसी, अल्सर, कमजोरी, कमला, पीलिया तथा रक्त की कमी को दूर करनेवाला श्रेष्ठ पथ्य बताते हुए भोजन के तत्काल बाद गुड़ की छोटी डली के सेवन की सलाह दी गई है। गुड़ एक क्षारीय खाद्य है जिससे भोजन का पाचन तो ठीक होता ही है पेट में अम्लता के कारण उत्पन्न रोगों का उपद्रव शंात होता है। दावा तो यहां तक है कि गुड़ को भोजन के साथ लेने से शरीर को सभी आवश्यक पोषण तत्व प्राप्त होते हैं।

गुड़ का उपयोग

आहार विज्ञानियों एवं देशी-विदेशी विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार गुड़ केवल शरीर के पोषण में ही सहायक नहीं है बल्कि रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक शक्ति भी पैदा करता है। गुड़ बच्चों के सूखा रोग में तो लाभप्रद है ही, लू से भी बचाता है।

गुड़ में विटामिन ‘ए’ है। इससे यह रतौंधी, पेचिस, तपेदिक, जलोदर, आंतों की सूजन, दांत, गले तथा फेफड़े के रोगों में लाभ पहुंचाता है। गुड़ में ‘बी’ कम्पलेक्स भी है। इससे शरीर की दुर्बलता, शिथिलता, हृदय की कमजोरी, यकृत, गुर्दे तथा पाचन संस्थान की कमजोरी, मानसिक दुर्बलता तथा स्नायु रोगों से भी रक्षा कर निरोग रखता है।
एक विशेषज्ञ चिकित्सक डा0 सतीश आत्रेय ने गुड़ के औषधीय प्रयोग के लिए कुछ नुस्खे बताए हैं जो निम्नलिखित हैं-

  • गुड़ और काले तिल के लड्डू बच्चों को दो बार खिलाने से उनका बिस्तर पर पेशाब करना रूक जाता है।
  • गुड़ के साथ कड़वी लौकी के गुद्दा और सिरका को पीस कर बवासीर के मस्सों पर लेप करने से मस्से अतिशीघ्र सूख जाते हैं।
  • पकी नीम की निमौली, पुराने गुड़ के साथ दिन में तीन बार खाने से बवासीर नष्ट हो जाता है।
  • गुड़ 50 ग्राम, हरड़ का चूर्ण 50 ग्राम तथा सोंठ का चूर्ण 25 ग्राम एक साथ मिला लें। एक-एक चम्मच दिन में दो बार लेने से अपच नष्ट होता है तथा भूख बढ़ती है।
  • जुकाम है तो रात में गुड़ खाकर सो जाएं, पानी न पीयें।
  • पीलिया हो गया है तो प्रातः बासी मुंह 50 ग्राम गुड़ तथा पत्ते सहित एक मूली खाने से अत्यंत लाभ होता है।
  • 50 ग्राम गुड़ एवं 50 ग्राम मूंगफली खाने से प्रचुर प्रोटीन मिल जाता है। बच्चों और मानसिक कार्य करनेवालों को इसका सेवना करना ही चाहिए।
  • 25 ग्राम गुड़ में आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण मिलाकर भोजन के पूर्व लेने से गैस, अपच और गठिया में लाभ करता है।
  • उल्टी, वमन, पित्ताशय की खराब मंगुड़ को हरड़ के चूर्ण के साथ बराबर मात्रा में सेवन से लाभ मिलता है।
  • सर्दी, जुकाम या बहुत कफ बनता है तब तीन बार गुड़ और अदरख का सेवन करना चाहिए।
  • सफेद प्याज के रस में गुड़ और हल्दी को एक साथ घोंट कर संूघने से भी पीलिया और कमला रोग मं फायदा करता है।
  • गुड़ 50 ग्राम, सोंठ 25 ग्राम तथा पीपर 10 ग्राम एक साथ चूर्ण कर एक-एक चम्मच भोजन के बाद लेने से अजीर्ण, अपच, पेट दर्द आदि रोग नष्ट हो जाते हैं।
  • गुड़ 200 ग्राम गुड़, हरड़ का चूर्ण 100 ग्राम, सोंठ, मिर्च और पीपर का सम्मिलित चूर्ण 100 ग्राम तथा दालचीनी और तेजपत्ता के सम्मिलित तीन ग्राम चूर्ण को मिलाकर 25-25 ग्राम के लड्डू का सेवन सुबह-शाम गरम जल से लेने से खांसी, संग्रहणी, बवासीर, हाथ-पैर की सूजन, गैस, पेट की गुड़गुड़ाहट आदि नष्ट होते हैं।

गुड़ के लाभकारी होने का प्रचार होने से इनदिनों बाजार में गुड़ से बनी मिठाइयों, तिलकुट एवं अन्य खाद्य पदार्थों की उपलब्धता भी बढ़ी है। गुड़ का लकठो बहुत खाया जाता है। प्रसूता महिलाओं को गुड़ के साथ हल्दी का सेवन कराने की परंपरा थी। बच्चा जनने वाली महिलाओं को इसके सेवन से नवजीवन प्राप्त होता है।

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