Thwaites Glacier’s existence in danger : अंटार्कटिका के सबसे बड़े और ऊंचे थ्वेट्स ग्लेशियर का अस्तित्व खतरे में

  • पांच वर्षों में पूरी तरह से पिघल जाएगी इसे समुद्री सतह पर टिकाने वाली बर्फीली चट्टान
  • ग्लेशियर के टूटकर पानी में बहने का डर, वैश्विक स्तर पर समुद्री जलस्तर में होगी वृद्धि

लंदन | अंटार्कटिका के सबसे बड़े और ऊंचे ग्लेशियर में शुमार ‘थ्वेट्स’ का अस्तित्व खतरे में है। अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन की हालिया बैठक में ग्लेशियर को समुद्री सतह पर टिकाए रखने वाली बर्फीली चट्टान के अगले तीन से पांच वर्षों में पूरी तरह से पिघलने की आशंका जताई गई है। इससे ‘थ्वेट्स’ के टूटकर समुद्र में गिरने और समुद्री जलस्तर में भारी वृद्धि होने का खतरा मंडराने लगा है।

कोऑपरेटिव इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन एंवायर्नमेंटल साइंसेज से जुड़े टेड स्कैंबोस ने कहा, समुद्री जल के गर्म होने से 120 किलोमीटर के दायरे में फैला ‘थ्वेट्स’ समुद्री सतह पर अपनी पकड़ खोता जा रहा है। ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटकर समुद्र में बहने की आशंका है। उन्होंने बताया कि साल 2004 से ‘थ्वेट्स’ का एक-तिहाई पूर्वी भाग एक तैरती हुई बर्फीली चट्टान के सहारे समुद्री सतह पर टिका हुआ है। यह चट्टान तट से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जलमग्न पहाड़ पर खड़ी है। हालांकि, बीते दो साल में एकत्रित डाटा से चट्टान के निचले हिस्से में बर्फ के तेजी से पिघलने और ग्लेशियर में दरारें पनपने के संकेत में मिले हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग से समुद्री जल के तापमान में होती वृद्धि मुख्य वजह है।

ओरेगॉन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरीन पेटिट ने कहा, समुद्र का गर्म पानी ग्लेशियर में पनपी दरारों में भी भरने लगा है। इससे ग्लेशियर के पिघलने की दर बढ़ गई है। उन्होंने चेताया कि अगर तापमान पर लगाम नहीं लगाया गया तो अगले तीन से पांच वर्षों में ‘थ्वेट्स’ को समुद्र पर टिकाए रखने वाली बर्फीली चट्टान नष्ट हो जाएगी। इससे न सिर्फ ‘थ्वेट्स’ के समुद्र में बहने, बल्कि पश्चिमी एंटार्कटिका के कई अन्य ग्लेशियर के भी अस्थिर होने का खतरा है। यही नहीं, समुद्र में ज्यादा मात्रा में बर्फ पहुंचने से उसमें पानी के स्तर में दो फीट से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

-एजेंसी

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