Ugly Face of Farmer Agitation : महात्मा गांधी के देश में हिंसक किसान आंदोलन लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा

लाल किले पर धावा बोलकर अन्य झंडा फहराना देश की अस्मिता और लोकतंत्र पर बड़ा हमला

रोशी

इनसाइट ऑनलाइन न्यूज की किसान आंदोलन से उत्पन्न देश में हुये हालात की सोच पर एक पहल। किसान आंदोलन का जो उग्र रूप आज देश ने देखा है, इससे आंदोलन को भारी क्षति हुई है। महात्मा गांधी के देश में जहां अंग्रेजों की सल्तनत के खिलाफ अहिंसक आंदोलन ने आजादी का बिगुल फूंकने का पुण्य कार्य किया था। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसक आंदोलन की हमेशा निंदा की गई है और उसे बहुत ही तुच्छ माना गया है।

भाव यह है कि शांतिपूर्ण किसान आंदोलन के पीछे जिन राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संस्थाओं ने अपनी शक्ति के माध्यम से उन्हें उग्र और हिंसक आंदोलन के लिए प्रेरित किया वो अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरा धक्का पहुंचा है जिसकी भरपाई न तो आंदोलनकारी किसान न तो वो शक्तियां, जो इसके पीछे खड़ी हैं, कर पायेंगी।

दुखद है कि देश की धरोहर लाल किले पर चढ़कर झंडा फहराना देश की अस्मिता और लोकतांत्रिक प्रतिष्ठा पर बड़ा कुठाराघात है।

भाजपा और अन्य राष्ट्रहित के राजनीतिक दल एवं सामाजिक संस्था बार-बार जो चेतावनी दे रहे थे और आशंका व्यक्त कर रहे थे कि इसमें विदेशी ताकतों और देश विरोधी तत्वों का जमावड़ा है वो आज के इस घटनाक्रम ने इसे सही साबित कर दिया।

अन्य राजनीतिक दल जो इसमें बढ़-चढ़कर बोल रहे थे उनके मुंह पर भी एक करारा तमाचा आंदोलनकारियों ने लगाया है।

हाल ही में हुई अमेरिका की घटना को लोग नहीं भूले हैं जहां उनके पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कैपिटोल हिल, जो उनके लोकतंत्र का मंदिर है में हमला करवाकर अपनी छवि को दागदार कर लिया और जिसकी सिर्फ अमेरिका ही नहीं पूरे विश्व में भर्त्सना की गई। वर्तमान राष्ट्रपति जिन्होंने शपथ लेते ही अमेरिका की लोकतांत्रिक छवि को पुनः बहाल करने की शपथ ली।

पूर्व में जब देश में 1966 में गो हत्या निषेध कानून के मामले में दिल्ली में बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ था तो देश भूला नहीं कि निवर्तमान प्रधानमंत्री ने राजधानी में इस तरह की बेबुनियाद हिंसक घटना के विरोध में गोली चलाने का आदेश दे दिया था। पर आज की परिस्थिति में गोली नहीं चलाकर सरकार ने सिद्ध कर दिया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम है।

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