Uranium Update in India: भारतीय वैज्ञानिकों की खोज ने भारत में दुलर्भ जैसे यूरेनियम धातु की बड़ी मात्रा में होने की संभावना जताई

Insight Online News

उपयोग एवं आवश्यकताएं

यूरेनियम सक्रिय तत्व है। पूर्ण अवस्था में यह स्वत: वायु में जल सकता है। इसके द्वारा जल का विघटन होकर हाइड्रोजन मुक्त होता है। यह ऑक्सीजन से 190° C, क्लोरीन से 180° C, ब्रोमीन से 210° C, आयोडीन से 260° C और हाइड्रोजन से 250° C पर क्रिया कर यौगिक बनाता है। इनके अतिरिक्त यूरेनियम नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं अनेक गैसों से अभिक्रिया करता है। अम्लों से क्रिया कर यूरेनियम के त्रिसंयोंजक एवं चतुस्संयोजक यौगिक बनते हैं तथा हाइड्रोजन मुक्त होती है। यूरेनियम की 5 संयोजकताएँ हैं। इसकी मुख्य संयोजकताएँ 4 और 6 हैं। इसके लवण बड़ी सरलता से जटिल आयन बनाते हैं।

यूरेनियम चमकदार श्वेत रंग की धातु है। इसका संकेत U, परमाणु संख्या 92, परमाणु भार 238.03, गलनांक 1,130° सें0, क्वथनांक अनुमानित 3,500° सें0, घनत्व 19.05 ग्राम प्रति घन सेंमी0, विद्युत प्रतिरोधकता 32.76×109 ओम से मी० तथा क्रिस्टल संरचना त्रिद्कि पार्श्व, कमरे के ताप पर।

भारत में यूरेनियम का बड़ा भंडार हो सकता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इंडो-चाइना बॉर्डर से तीन किलोमीटर अरुणाचल प्रदेश में यूरेनियम का खजाना है। अब इस जगह को संरक्षित करके खुदाई शुरू हो चुकी है, जिसमें अच्छे संकेत मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि देश में यह पहली बार है जब यूरेनियम के भंडार की खोज के लिए किसी जगह को रिजर्व किया जा रहा है।

परमाणु खनिज निदेशालय, अन्वेषण और अनुसंधान के निदेशक डॉ. डीके सिन्हा ने कहा, ‘हमें केंद्र से प्रोत्साहन मिला और खोजबीन की है। पहाड़ियों की वजह से हेलिबॉर्न से खोज करने की कोई संभावना नहीं थी। लेकिन हम लोग खोज करने के लिए पैदल पहाड़ियों के ऊपर चढ़े।’ उन्होंने बताया कि वह मेचुका घाटी में भारतीय सीमा के सबसे दूर के गांव में गए।

  • पश्चिम सियांग जिले में मिला

डॉ. डीके सिन्हा ने बताया कि यूरेनियम के लिए खोज में उन लोगों को पॉजिटिव रिजल्ट देखने को मिले। अभी आगे और भी गतिविधि जारी रहेगी, जिसके परिणामस्वरूप खनन होगा। यह खोज जमीनी स्तर से लगभग 619 मीटर दूर अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम सियांग जिले के ऐलो में हुई। यूरेनियम का उपयोग परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लिए किया जाता है जिसे अच्छा ऊर्जा माना जाता है।

  • इसलिए हो सकी खोज

परमाणु ईंधन परिसर के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में खोज करने के पीछे एक कारण सुलभता है। दूसरी बात, राजनीतिक स्थिति ने इस तरह की गतिविधि करने के लिए स्थितियां और ज्यादा अनुकूल हो गईं।

जादूगोड़ा (झारखंड) यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड

भारत में यूरेनियम की खान अभी तक (2006) जादूगोड़ा में ही सक्रिय हैं। इसके अलावा भारत के कई और हिस्सों में यूरेनियम पाया गया है लेकिन उन स्थानों पर खनन कार्य नहीं हो रहा है। इन इलाक़ों में आंध्र प्रदेश के नलगोंडा ज़िले के कुछ इलाक़े और नागालैंड के कुछ हिस्से शामिल हैं जहां स्थानीय लोग यूरेनियम खनन का विरोध करते हैं। भारत की एकमात्र यूरेनियम की खान जादूगोड़ा(झारखंड)जो कि यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड सिंहभूम(झारखंड)के अधीन है

  • इन राज्यों में भी चल रहे प्रयास

हिमाचल प्रदेश में यूरेनियम की खोज के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि मणिपुर ने भी खोज के लिए अपनी अनुमति दे दी है। असम, नगालैंड, गुजरात, एमपी, यूपी, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में भी काम चल रहा है।

  • वर्ल्ड न्यूक्लियर ऑर्गनाइजेशन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में यूरेनियम भंडार वाले 10 प्रमुख देश हैं:
  1. दुनिया के ज्ञात यूरेनियम भंडार का 29 फीसदी ऑस्ट्रेलिया में है। यहां इसकी 17 लाख टन मात्रा है।
  2. कजाख्स्तान में 12 फीसदी (6.8 लाख टन) यूरेनियम है।
  3. रूस में 5 लाख टन यूरेनियम के साथ 9 फीसदी भंडार है।
  4. कनाडा में 8 फीसदी (4.9 लाख टन) है।
  5. नाइजर में 7 फीसीदी (4 लाख टन) है।
  6. नामीबिया में 6 फीसदी (3.8 लाख टन) है।
  7. साउथ अफ्रीका में 6 फीसदी (3.4 लाख टन) है।
  8. ब्राजील में 5 फीसदी यूरेनियम के साथ 2.7 लाख टन भंडार है।
  9. अमेरिका इस लिस्ट में नौवें नंबर पर है। उसके पास दुनिया का 4 फीसदी यूरेनियम यानी दो लाख टन का स्टोर है।
  10. चीन 4 फीसदी यूरेनियम (1.9 लाख टन) के साथ इस लिस्ट में दसवें स्थान पर है।

इसके अलावा शेष 10 फीसदी यूरेनियम दुनिया के अन्य देशों में है। यह मात्रा सात लाख टन के करीब है। साल 2013 में दुनिया में उत्खनन योग्य यूरेनियम का 65 फीसदी हिस्सा केवल पांच देशों से निकाला जा रहा था। यह देश हैं, ऑस्ट्रेलिया, कजाख्स्तान, रूस, कनाडा और नाइजर।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *