West Bengal Assembly Election : फर्जी खबरों को उजागर करना बंगाल सरकार की मूल रणनीति

कोलकाता, 12 सितंबर । जैसे-जैसे 2021 का विधानसभा चुनाव करीब आता जा रहा है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सरकार के बलबूते अपनी स्थिति मजबूत करने से हर संभव कोशिश में जुट गई हैं। दरअसल 2019 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने सोशल साइट का इस्तमाल जमकर किया था जिस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उनकी पार्टी और उनकी सरकार की विफलता, तुष्टिकरण और अन्य कमजोर बिंदुओं को लेकर जमकर प्रचार-प्रसार किया गया था।

दावा किया गया है कि उनमें से कई ऐसी खबरें थीं जो फर्जी थीं और उसका इस्तेमाल केवल लोगों को भावनात्मक रूप से मोड़ने के लिए किया गया। जैसे हाल ही में पश्चिम बंगाल में एक फर्जी निर्देशिका जोर शोर से सोशल साइट पर शेयर की जा रही थी जिसमें दावा किया गया था कि कोरोना महामारी के कारण पश्चिम बंगाल सरकार ने दुर्गा पूजा के आयोजन पर रोक लगा दी है। जैसे ही मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह बात आई, उन्होंने भाजपा का नाम लिए बगैर इस फर्जी खबर के लिए उन्हें जिम्मेवार ठहराया और पुलिस को ऐसे पोस्ट साझा करने वालों की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे।

अब तक इस मामले में चार लोगों को पकड़ा जा चुका है। अब जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी बड़े पैमाने पर फर्जी खबरें साझा की जा सकती हैं। इसमें मुख्य रूप से ममता बनर्जी की पार्टी और उनकी सरकार पर तुष्टीकरण के आरोप मढ़े जाएंगे, कई ऐसी फर्जी खबरें भी चल सकती हैं जिसमें सीएम पर अल्पसंख्यक समुदाय के लिए अलग से काम करने के दावे किए जा सकते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य पुलिस को साइबर अपराध से निपटने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है।राज्य सीआईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सोशल साइट पर बड़े पैमाने पर नजर रखी जा रही है ताकि फर्जी खबरों को रोका जा सके। ऐसा करने वालों की गिरफ्तारी भी तत्काल की जाएगी।

सीआईडी सूत्रों ने बताया कि 2019 के लोकसभा चुनाव के समय विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 154 से अधिक फेक न्यूज़ साझा किए गए थे। पिछले पांच महीनों में अकेले पश्चिम बंगाल में 400 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी अफवाहों के कारण की गई है। इसके पहले राज्य की तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को चिट्ठी लिखकर भारत में हो रहे भेदभाव के बारे में भी आपत्ति जताई थी। कुल मिलाकर कहें तो 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार का मूल लक्ष्य सोशल साइट के जरिए बनने वाले माहौल को अपने पक्ष में रखना भी है।

(हि. स.)

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