Whatsapp Privacy policy : व्हाट्सऐप प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई टली

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नई दिल्ली, 03 जून : दिल्ली हाईकोर्ट ने व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई टाल दी है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष ये मामला लिस्टेड था लेकिन इस बेंच के नहीं बैठने की वजह से सुनवाई टाली गई। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।

इस मामले में केंद्र सरकार ने कहा है कि व्हाट्सऐप धोखाधड़ी से नई प्राइवेसी पॉलिसी के लिए यूजर्स की सहमति ले रहा है। व्हाट्सऐप का वर्तमान नोटिफिकेशन प्रतिस्पर्धा आयोग के 24 मार्च के उस आदेश की पुष्टि करता है जिसमें जांच की बात कही गई है। व्हाट्सऐप अपने कुछ-कुछ समय के अंतराल पर यूजर्स को प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार करने का नोटिफिकेशन भेजकर उन्हें स्वीकार करने के लिए बाध्य कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि व्हाट्सऐप ने हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि उसकी प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार करना किसी यूजर के लिए बाध्य नहीं है। व्हाट्सऐप ने कहा है कि कानून के मुताबिक अगर यूजर उसकी शर्तों को नहीं मानता तो कंपनी उसे सर्विस देने के लिए बाध्य नहीं है। वो यूजर को ऑप्ट आउट का विकल्प देने के लिए बाध्य नहीं है। व्हाट्सऐप ने कहा है कि उसके अपडेट में कोई भी हस्तक्षेप इंटरनेट आधारित ऐप और वेबसाइट से जुड़े सभी उद्योग को बर्बाद कर देगा। व्हाट्सऐप ने कहा है कि यूजर का डाटा माइक्रोसॉफ्ट, जोमैटो, गूगल, जूम, बिग बास्केट, ट्रूकॉलर, कू इत्यादि जैसी निजी कंपनियां भी एकत्र करती हैं। यहां तक कि सरकारी कंपनियां जैसे आरोग्य सेतु, आईआरसीटीसी, भीम ऐप इत्यादि भी यूजर का डाटा एकत्र करती हैं।

व्हाट्सऐप ने कहा है कि उद्योग जगत में जो प्रचलन में है वो भी वही कर रही है। पिछले 19 मार्च को केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल करते हुए व्हाट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी को रोकने की मांग की थी। केंद्र सरकार ने हलफनामा में कहा है कि व्हाट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी आईटी एक्ट का उल्लंघन है।

याचिका सीमा सिंह और मेघन सिंह ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि व्हाट्स ऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी से लोगों की निजता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। याचिका में कहा गया है कि व्हाट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी किसी यूजर की सभी आनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए तैयार किया गया है। डाटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी के अभाव में यूजर्स को कंपनी के रहमोकरम पर भी निर्भर रहना होगा। याचिका में व्हाटसऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी को अपडेट करने से तत्काल रोकने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि व्हाटसऐप की प्राइवेसी पॉलिसी के मुताबिक वो यूजर का डाटा किसी तीसरे पक्ष को शेयर नहीं करने के अधिकार को छीनता है। अगर व्हाटसऐप यूजर्स का डाटा फेसबुक को शेयर करती है इसका मतलब है कि वो हर सेकंड यूजर का डाटा संग्रह करेगा और एक तरह से वो फेसबुक और उसकी कंपनियों की निगरानी में रहेगा। ऐसा करना गैरकानूनी है। व्हाटसऐप के यूजर एक-दूसरे को संदेश देने के लिए उसका उपयोग करते हैं लेकिन अगर उन सूचनाओं का उपयोग किसी पक्ष से करना गैरकानूनी है।

हिन्दुस्थान समाचार

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