WHO: ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के आपात इस्तेमाल को मन्ज़ूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोविड-19 महामारी से बचाव के लिये ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के दो संस्करणों को आपात इस्तेमाल सूची में शामिल किये जाने को मन्ज़ूरी दे दी है. यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि वैक्सीनों के त्वरित और न्यायसंगत वितरण को सम्भव बनाने के लिये उत्पादन का स्तर बढ़ाये जाने की ज़रूरत है.

आपात इस्तेमाल सूची (Emergency Use Listing) में शामिल किये जाने के बाद इन वैक्सीनों के ‘कोवैक्स’ पहल के तहत दुनिया भर में वितरण का रास्ता स्पष्ट हो गया है. 
इन वैक्सीनों को कोरिया गणराज्य में SKBio कम्पनी और भारत में सीरम इन्स्टीट्यूट के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है. 
दोनों कम्पनियाँ एक ही वैक्सीन का उत्पादन कर रही है, लेकिन अलग-अलग उत्पादन संयंत्रों में निर्मित होने की वजह से, दोनों वैक्सीनों को समीक्षा के बाद मन्ज़ूरी दी गई है.

Media briefing on #COVID19 with @DrTedros https://t.co/NpfhUepQMH— World Health Organization (WHO) (@WHO) February 15, 2021

आपात इस्तेमाल सूची में शामिल किये जाने की प्रक्रिया के तहत, वैक्सीनों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कारगरता की जाँच की जाती है. 
यूएन की कोवैक्स पहल के अन्तर्गत वैक्सीन वितरण की यह अग्रिम शर्त भी है, जिसका उद्देश्य सभी देशों के लिये कोरोनावायरस वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. 
Pfizer-BioNTech वैक्सीन के बाद आपात इस्तेमाल सूची में शामिल होने वाली ये दूसरी और तीसरी वैक्सीन बन गई हैं. 
यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए बताया कि वैक्सीनों के त्वरित वितरण को सम्भव बनाया जा सकता है, लेकिन उसके लिये अभी उत्पादन का स्तर बढ़ाने की ज़रूरत है.
उन्होंने ध्यान दिलाया है कि वैक्सीनों का तेज़ी से और न्यायसंगत वितरण जिन्दगियाँ बचाने, और स्वास्थ्य प्रणालियों, आजीविकाओं व अर्थव्यवस्थाओं की स्थिरता के लिये अहम है.
इस क्रम में, शुक्रवार को ब्रिटेन की अध्यक्षता में जी-सात समूह की बैठक हो रही है जिसमें वैक्सीनों के न्यायोचित वितरण पर चर्चा होगी. 
संक्रमणों की संख्या में कमी
दुनिया भर में कोविड-19 के अब तक 10 करोड़ 85 लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है, और 23 लाख 96 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.
यह लगातार पाँचवा हफ़्ता है, जब दुनिया भर में संक्रमणों के मामलों में कमी दर्ज की गई है. 
पिछले हफ़्ते कुल जितने मामलों की पुष्टि हुई, उनकी संख्या किसी एक सप्ताह में पिछले वर्ष अक्टूबर के बाद सबसे कम थी. 
पाँच हफ़्तों के अन्तराल में ही एक सप्ताह में दर्ज किये जाने वाले मामलों में लगभग 50 फ़ीसदी की कमी आई है. 
4 जनवरी के सप्ताह में 50 लाख से ज़्यादा संक्रमणों की पुष्टि हुई, लेकिन 8 फ़रवरी के सप्ताह में यह संख्या घटकर 26 लाख रह गई.
यूएन एजेंसी के महानिदेशक ने कहा, “यह दर्शाता है कि सरल सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय कारगर हैं, नए प्रकार के वायरस की मौजूदगी में भी.”  
उन्होंने आगाह किया है कि आग अभी पूरी तरह बुझी नहीं है, लेकिन उसका फैलाव कम हो गया है. अगर उससे मुक़ाबले में ढिलाई बरती जाती है, तो इसके मामले फिर तेज़ी से बढ़ सकते हैं.
“हर दिन, कम संक्रमणों का अर्थ, ज़िन्दगियों को बचाना, पीड़ा की रोकथाम, और स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ को थोडा कम करना है.”
महानिदेशक घेबरेयेसस ने महामारी और उससे बचाव के सम्बन्ध में लोगों की चिन्ताओं और सवालों को सुना जाना, और उन तक सही जानकारी को पहुँचाया जाना अहम है., विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोविड-19 महामारी से बचाव के लिये ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के दो संस्करणों को आपात इस्तेमाल सूची में शामिल किये जाने को मन्ज़ूरी दे दी है. यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि वैक्सीनों के त्वरित और न्यायसंगत वितरण को सम्भव बनाने के लिये उत्पादन का स्तर बढ़ाये जाने की ज़रूरत है.

आपात इस्तेमाल सूची (Emergency Use Listing) में शामिल किये जाने के बाद इन वैक्सीनों के ‘कोवैक्स’ पहल के तहत दुनिया भर में वितरण का रास्ता स्पष्ट हो गया है. 

इन वैक्सीनों को कोरिया गणराज्य में SKBio कम्पनी और भारत में सीरम इन्स्टीट्यूट के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है. 

दोनों कम्पनियाँ एक ही वैक्सीन का उत्पादन कर रही है, लेकिन अलग-अलग उत्पादन संयंत्रों में निर्मित होने की वजह से, दोनों वैक्सीनों को समीक्षा के बाद मन्ज़ूरी दी गई है.

आपात इस्तेमाल सूची में शामिल किये जाने की प्रक्रिया के तहत, वैक्सीनों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कारगरता की जाँच की जाती है. 

यूएन की कोवैक्स पहल के अन्तर्गत वैक्सीन वितरण की यह अग्रिम शर्त भी है, जिसका उद्देश्य सभी देशों के लिये कोरोनावायरस वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. 

Pfizer-BioNTech वैक्सीन के बाद आपात इस्तेमाल सूची में शामिल होने वाली ये दूसरी और तीसरी वैक्सीन बन गई हैं. 

यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए बताया कि वैक्सीनों के त्वरित वितरण को सम्भव बनाया जा सकता है, लेकिन उसके लिये अभी उत्पादन का स्तर बढ़ाने की ज़रूरत है.

उन्होंने ध्यान दिलाया है कि वैक्सीनों का तेज़ी से और न्यायसंगत वितरण जिन्दगियाँ बचाने, और स्वास्थ्य प्रणालियों, आजीविकाओं व अर्थव्यवस्थाओं की स्थिरता के लिये अहम है.

इस क्रम में, शुक्रवार को ब्रिटेन की अध्यक्षता में जी-सात समूह की बैठक हो रही है जिसमें वैक्सीनों के न्यायोचित वितरण पर चर्चा होगी. 

संक्रमणों की संख्या में कमी

दुनिया भर में कोविड-19 के अब तक 10 करोड़ 85 लाख मामलों की पुष्टि हो चुकी है, और 23 लाख 96 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.

यह लगातार पाँचवा हफ़्ता है, जब दुनिया भर में संक्रमणों के मामलों में कमी दर्ज की गई है. 

पिछले हफ़्ते कुल जितने मामलों की पुष्टि हुई, उनकी संख्या किसी एक सप्ताह में पिछले वर्ष अक्टूबर के बाद सबसे कम थी. 

पाँच हफ़्तों के अन्तराल में ही एक सप्ताह में दर्ज किये जाने वाले मामलों में लगभग 50 फ़ीसदी की कमी आई है. 

4 जनवरी के सप्ताह में 50 लाख से ज़्यादा संक्रमणों की पुष्टि हुई, लेकिन 8 फ़रवरी के सप्ताह में यह संख्या घटकर 26 लाख रह गई.

यूएन एजेंसी के महानिदेशक ने कहा, “यह दर्शाता है कि सरल सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय कारगर हैं, नए प्रकार के वायरस की मौजूदगी में भी.”  

उन्होंने आगाह किया है कि आग अभी पूरी तरह बुझी नहीं है, लेकिन उसका फैलाव कम हो गया है. अगर उससे मुक़ाबले में ढिलाई बरती जाती है, तो इसके मामले फिर तेज़ी से बढ़ सकते हैं.

“हर दिन, कम संक्रमणों का अर्थ, ज़िन्दगियों को बचाना, पीड़ा की रोकथाम, और स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ को थोडा कम करना है.”

महानिदेशक घेबरेयेसस ने महामारी और उससे बचाव के सम्बन्ध में लोगों की चिन्ताओं और सवालों को सुना जाना, और उन तक सही जानकारी को पहुँचाया जाना अहम है.

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