WHO: नई दवाओं की क़िल्लत से, बेहद ख़तरनाक बैक्टीरिया से ख़तरनाक जोखिम की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि सामान्य संक्रमणों के नए उपचारों के अभाव ने लोगों को, दुनिया के सबसे ख़तरनाक बैक्टीरिया की चपेट के जोखिम का सामना करने के लिये असुरक्षित छोड़ दिया है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की ये चेतावनी गुरूवार को एक रिपोर्ट में जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि इस समय जो 43 एण्टीबायोटिक्स दवाएँ तैयार की जा रही हैं, उनमें से एक भी दवा, औषधि-प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर चुके – 13 बक्टीरिया से उत्पन्न और बढ़ते जोखिम का सामना करने में पूर्ण रूप से सक्षम नहीं है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन में, एण्टीमाइक्रोबियल प्रतिरोध पर सहायक महानिदेशक डॉक्टर हनान बालख़ी का कहना है, “नई प्रभावशाली एण्टीबायोटिक्स दवाओं के विकास, उत्पादन और वितरण में लगातार नाकामी के कारण, एण्टीमाइक्रोबियल प्रतिरोध का प्रभाव और ज़्यादा बढ़ रहा है, और अन्ततः बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का सफलतापूर्वक इलाज करने की हमारी क्षमता के लिये ही ख़तरा पैदा कर रहा है.”
संगठन का कहना है कि इस स्थिति में, बच्चों व निर्धनता में जीने वाले लोगों को सबसे ज़्यादा ख़तरा है, लेकिन, ये भी ग़ौरतलब है कि एण्टीबायोटिक दवाओं के लिये प्रतिरोधी क्षमता हासिल कर चुके संक्रमण, किसी को भी प्रभावित कर सकते हैं.
नवजातों को ज़्यादा जोखिम
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जिन 10 में से 3 नवजातों को रक्त संक्रमण हो जाता है, उनकी मौत हो जाती है क्योंकि उसके इलाज के लिये जो एण्टीबायोटिक दवाएँ इस्तेमाल की जाती हैं वो रक्त संक्रमण के इलाज के लिये असरदार नहीं बची हैं.
एक अन्य रोकथाम योग्य बीमारी – बैक्टीरियाई न्यूमोनिया ने भी उपलब्ध दवाओं के लिये प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर ली है. ये बीमारी भी, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक एण्टीमाइक्रोबियल पाइपलाइन रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में उपलब्ध लगभग सभी एण्टीबायोटिक्स दवाएँ, दरअसल 1980 में विकसित की गई दवाओं के ही भिन्न व संशोधित रूप हैं.
रिपोर्ट कहती है कि हम अपने जीवन के तमाम क्षेत्रों में, इन दवाओं पर व्यापक पैमाने पर निर्भर हैं – दन्त चिकित्सक के यहाँ अपना दाँत निकलवाने से लेकर, अंग प्रत्यारोपण और कैंसर का इलाज कराने तक.
अनुत्पादक पाइपलाइन
रिपोर्ट में, परीक्षण के क्लीनिकल स्तर वाली और विकसित की जाने वाली मौजूदा एण्टीबायोटिक दवाओं की समीक्षा के बाद रेखांकित किया गया है कि ये उत्पादन की लगभग स्थिर यानि अचल पाइपलाइन है जिसमें कोई बदलाव नहीं है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस स्थिति को, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में, कमज़ोर कड़ी क़रार दिया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के – एण्टीमाइक्रोबियल प्रतिरोध वैश्विक समन्वय के निदेशक हेलेयेसस गेताहून का कहना है कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न अवसरों का फ़ायदा, नई व प्रभावशाली एण्टीबायोटिक्स दवाओं के शोध व उत्पादन में संसाधन निवेश करने के लिये उठाया जाना चाहिये.
उन्होंने कहा, “एण्टीमाइक्रोबियल जोखिम के विशाल आकार का सामना करने के लिये हमें, नए व अतिरिक्त संसाधनों व धनराशि का भण्डार बनाने के लिये टिकाऊ प्रयासों की ज़रूरत है जिनमें प्रक्रियाएँ भी शामिल हों.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हाल के वर्षों में, नियामकों ने, केवल कुछ ही दवाओं को आरम्भिक स्तर की स्वीकृति प्रदान की है और इनमें से अधिकतर एजेण्ट… मौजूदा इलाजों पर केवल सीमित चिकित्सा लाभ ही पहुँचाते हैं. 
संगठन ने आगाह करते हुए ये भी कहा है कि इन नए एजेण्टों की औषधि-प्रतिरोधी क्षमता का, बहुत तेज़ी से उभरना भी लगभग तय है., विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि सामान्य संक्रमणों के नए उपचारों के अभाव ने लोगों को, दुनिया के सबसे ख़तरनाक बैक्टीरिया की चपेट के जोखिम का सामना करने के लिये असुरक्षित छोड़ दिया है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की ये चेतावनी गुरूवार को एक रिपोर्ट में जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि इस समय जो 43 एण्टीबायोटिक्स दवाएँ तैयार की जा रही हैं, उनमें से एक भी दवा, औषधि-प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर चुके – 13 बक्टीरिया से उत्पन्न और बढ़ते जोखिम का सामना करने में पूर्ण रूप से सक्षम नहीं है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में, एण्टीमाइक्रोबियल प्रतिरोध पर सहायक महानिदेशक डॉक्टर हनान बालख़ी का कहना है, “नई प्रभावशाली एण्टीबायोटिक्स दवाओं के विकास, उत्पादन और वितरण में लगातार नाकामी के कारण, एण्टीमाइक्रोबियल प्रतिरोध का प्रभाव और ज़्यादा बढ़ रहा है, और अन्ततः बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का सफलतापूर्वक इलाज करने की हमारी क्षमता के लिये ही ख़तरा पैदा कर रहा है.”

संगठन का कहना है कि इस स्थिति में, बच्चों व निर्धनता में जीने वाले लोगों को सबसे ज़्यादा ख़तरा है, लेकिन, ये भी ग़ौरतलब है कि एण्टीबायोटिक दवाओं के लिये प्रतिरोधी क्षमता हासिल कर चुके संक्रमण, किसी को भी प्रभावित कर सकते हैं.

नवजातों को ज़्यादा जोखिम

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जिन 10 में से 3 नवजातों को रक्त संक्रमण हो जाता है, उनकी मौत हो जाती है क्योंकि उसके इलाज के लिये जो एण्टीबायोटिक दवाएँ इस्तेमाल की जाती हैं वो रक्त संक्रमण के इलाज के लिये असरदार नहीं बची हैं.

एक अन्य रोकथाम योग्य बीमारी – बैक्टीरियाई न्यूमोनिया ने भी उपलब्ध दवाओं के लिये प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर ली है. ये बीमारी भी, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की वार्षिक एण्टीमाइक्रोबियल पाइपलाइन रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में उपलब्ध लगभग सभी एण्टीबायोटिक्स दवाएँ, दरअसल 1980 में विकसित की गई दवाओं के ही भिन्न व संशोधित रूप हैं.

रिपोर्ट कहती है कि हम अपने जीवन के तमाम क्षेत्रों में, इन दवाओं पर व्यापक पैमाने पर निर्भर हैं – दन्त चिकित्सक के यहाँ अपना दाँत निकलवाने से लेकर, अंग प्रत्यारोपण और कैंसर का इलाज कराने तक.

अनुत्पादक पाइपलाइन

रिपोर्ट में, परीक्षण के क्लीनिकल स्तर वाली और विकसित की जाने वाली मौजूदा एण्टीबायोटिक दवाओं की समीक्षा के बाद रेखांकित किया गया है कि ये उत्पादन की लगभग स्थिर यानि अचल पाइपलाइन है जिसमें कोई बदलाव नहीं है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस स्थिति को, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में, कमज़ोर कड़ी क़रार दिया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के – एण्टीमाइक्रोबियल प्रतिरोध वैश्विक समन्वय के निदेशक हेलेयेसस गेताहून का कहना है कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न अवसरों का फ़ायदा, नई व प्रभावशाली एण्टीबायोटिक्स दवाओं के शोध व उत्पादन में संसाधन निवेश करने के लिये उठाया जाना चाहिये.

उन्होंने कहा, “एण्टीमाइक्रोबियल जोखिम के विशाल आकार का सामना करने के लिये हमें, नए व अतिरिक्त संसाधनों व धनराशि का भण्डार बनाने के लिये टिकाऊ प्रयासों की ज़रूरत है जिनमें प्रक्रियाएँ भी शामिल हों.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हाल के वर्षों में, नियामकों ने, केवल कुछ ही दवाओं को आरम्भिक स्तर की स्वीकृति प्रदान की है और इनमें से अधिकतर एजेण्ट… मौजूदा इलाजों पर केवल सीमित चिकित्सा लाभ ही पहुँचाते हैं. 

संगठन ने आगाह करते हुए ये भी कहा है कि इन नए एजेण्टों की औषधि-प्रतिरोधी क्षमता का, बहुत तेज़ी से उभरना भी लगभग तय है.

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