WHO: वैक्सीनों का समान वितरण ही, महामारी पर क़ाबू पाने का एक मात्र रास्ता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि कोविड-19 से मुक़ाबला करने वाली दवाइयों और उपकरणों का समान वितरण करना ही, इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट से उबरने के एक मात्र रास्ता है. 

उन्होंने मंगलवार को सलाहकारी समूह की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही, जिसके ज़रिये उन्होंने स्वास्थ्य उपकरणों और दवाइयों में संसाधन निवेश करने की ज़ोरदार हिमायत भी की.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक ने एसीटी ऐक्सेलेरेटर सुविधा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि अलबत्ता देशों ने महामारी पर नियंत्रण करने के प्रयासों में सफलता पाई है मगर, ये महामारी अब भी बहुत ख़तरनाक दौर में है.
उन्होंने कहा, “एक मात्र रास्ता, निजी बचाव उपकरण (पीपीई), परीक्षण, इलाज और वैक्सीन के समान वितरण में देशों की मदद करना है. ये कोई रॉकेट विज्ञान जैसी जटिल बात नहीं है, ना ही ये कोई दान जैसा मामला है. ये बुद्धिमानी वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य मामला है और ये हर एक सर्व हित में है.”
‘दो पटरियों वाली महामारी’
इस परिषद की अध्यक्षता नॉर्वे और दक्षिण अफ्रीका कर रहे हैं जोकि एसीटी ऐक्सेलेरेटर सुविधा के कामकाज में सलाह और मार्गदर्शन मुहैया कराती है. 
ध्यान रहे कि कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के लिये कोवैक्स नामक ये परियोजना वर्ष 2020 में शुरू की गई थी.
स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने इस बैठक को एक ऐसा मौक़ा बताया जिसमें दो पटरियों वाली महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में तत्काल ज़रूरतों पर ध्यान देने और जीवनदायक इलाजों में बढ़ोत्तरी करने पर बातचीत हुई.
उन्होंने कहा कि जो देश अब अपने यहाँ पाबन्दियाँ हटाकर स्थिति सामान्य करने की तरफ़ बढ़ रहे हैं, वो ऐसे देश हैं जिन्होंने निजी बचाव उपकरण (पीपीई), परीक्षण, ऑक्सीजन, और विशेष रूप में वैक्सीन की जीवनदाई आपूर्ति का समुचित प्रबन्ध कर लिया है.
उधर बहुत से ऐसे देश भी हैं जहाँ ज़रूरी चिकित्सा सामान की समुचित आपूर्ति व उपलब्धता नहीं होने के कारण लोग अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं और मौतें भी हो रही हैं. कोरोनावायरस के नए-नए प्रकारों (वैरिएंट) की मौजूदगी, इस स्थिति को और भी ज़्यादा जटिल बना रही है.
संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी ने आशा के संकेतों की तरफ़ ध्यान दिलाते हुए कहा कि कई देश अब वैश्विक एकजुटता पहल – कोवैक्स के तहत वैक्सीन, अन्य देशों के साथ साझा कर रहे हैं, हालाँकि अभी और ज़्यादा किये जाने की ज़रूरत है.
इस समय 180 से ज़्यादा देश व अर्थव्यवस्थाएँ, कोवैक्स योजना में शामिल हैं जिसका मक़सद, हर किसी को, हर जगह, वैक्सीन मुहैया कराना है.
टैक्नॉलॉजी हस्तान्तरण तेज़ हो
डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा कि कोवैक्स को वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने वाली प्रणाली में इस वर्ष के लिये तो पूर्ण धन मौजूद है, मगर वैक्सीन की आपूर्ति के अनुमानों में अब भी अच्छा-ख़ासा जोखिम नज़र आता.
विश्व स्वास्थ्य संगठन, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के साथ मिलकर, निम्न व मध्य आय वाले देशों में चिकित्सा उपकरणों और वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये तालमेल बिठाने के रास्ते तलाश करने पर काम कर रहा है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने जून में बताया था कि ये संस्था दक्षिण अफ्रीका में टैक्नॉलॉजी हस्तान्तरण के ज़रिये एक ऐसे एमआरएनए (mRNA) वैक्सीन केन्द्र की स्थापना में मदद कर रही है जिसमें विकासशील देशों के औषधि निर्माताओं को उपचार व औषधि तैयार करने में प्रशिक्षित किया जाएगा.
यह एक ऐसी तकनीक है जो मानव शरीर में कोशिकाओं को ऐसा प्रोटीन निर्माण करने की हिदायत देती है जिसके ज़रिये शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता बनती है. परिणामस्वरूप शरीर में ऐसी एण्टीबॉडीज़ यानि ऊर्जावान तत्वों का निर्माण होता है जो किसी बीमारी से सुरक्षा मुहैया कराते हैं.
कोविड-19 की कुछ वैक्सीनों का आधार यही तकनीक है जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में सरकारें और औषधि निर्माता कम्पनियाँ कर रही हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुखिया ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में इस वैक्सीन निर्माण केन्द्र स्थापना की घोषणा, आगे की दिशा में एक सकारात्मक क़दम है, मगर औषधि निर्माताओं को आगे आकर टैक्नॉलॉजी हस्तान्तरण और वैक्सीन उत्पादन के नुस्ख़े साझा करने की ज़रूरत है., विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि कोविड-19 से मुक़ाबला करने वाली दवाइयों और उपकरणों का समान वितरण करना ही, इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट से उबरने के एक मात्र रास्ता है. 

उन्होंने मंगलवार को सलाहकारी समूह की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही, जिसके ज़रिये उन्होंने स्वास्थ्य उपकरणों और दवाइयों में संसाधन निवेश करने की ज़ोरदार हिमायत भी की.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक ने एसीटी ऐक्सेलेरेटर सुविधा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि अलबत्ता देशों ने महामारी पर नियंत्रण करने के प्रयासों में सफलता पाई है मगर, ये महामारी अब भी बहुत ख़तरनाक दौर में है.

उन्होंने कहा, “एक मात्र रास्ता, निजी बचाव उपकरण (पीपीई), परीक्षण, इलाज और वैक्सीन के समान वितरण में देशों की मदद करना है. ये कोई रॉकेट विज्ञान जैसी जटिल बात नहीं है, ना ही ये कोई दान जैसा मामला है. ये बुद्धिमानी वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य मामला है और ये हर एक सर्व हित में है.”

‘दो पटरियों वाली महामारी’

इस परिषद की अध्यक्षता नॉर्वे और दक्षिण अफ्रीका कर रहे हैं जोकि एसीटी ऐक्सेलेरेटर सुविधा के कामकाज में सलाह और मार्गदर्शन मुहैया कराती है. 

ध्यान रहे कि कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के लिये कोवैक्स नामक ये परियोजना वर्ष 2020 में शुरू की गई थी.

स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने इस बैठक को एक ऐसा मौक़ा बताया जिसमें दो पटरियों वाली महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में तत्काल ज़रूरतों पर ध्यान देने और जीवनदायक इलाजों में बढ़ोत्तरी करने पर बातचीत हुई.

उन्होंने कहा कि जो देश अब अपने यहाँ पाबन्दियाँ हटाकर स्थिति सामान्य करने की तरफ़ बढ़ रहे हैं, वो ऐसे देश हैं जिन्होंने निजी बचाव उपकरण (पीपीई), परीक्षण, ऑक्सीजन, और विशेष रूप में वैक्सीन की जीवनदाई आपूर्ति का समुचित प्रबन्ध कर लिया है.

उधर बहुत से ऐसे देश भी हैं जहाँ ज़रूरी चिकित्सा सामान की समुचित आपूर्ति व उपलब्धता नहीं होने के कारण लोग अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं और मौतें भी हो रही हैं. कोरोनावायरस के नए-नए प्रकारों (वैरिएंट) की मौजूदगी, इस स्थिति को और भी ज़्यादा जटिल बना रही है.

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी ने आशा के संकेतों की तरफ़ ध्यान दिलाते हुए कहा कि कई देश अब वैश्विक एकजुटता पहल – कोवैक्स के तहत वैक्सीन, अन्य देशों के साथ साझा कर रहे हैं, हालाँकि अभी और ज़्यादा किये जाने की ज़रूरत है.

इस समय 180 से ज़्यादा देश व अर्थव्यवस्थाएँ, कोवैक्स योजना में शामिल हैं जिसका मक़सद, हर किसी को, हर जगह, वैक्सीन मुहैया कराना है.

टैक्नॉलॉजी हस्तान्तरण तेज़ हो

डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा कि कोवैक्स को वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने वाली प्रणाली में इस वर्ष के लिये तो पूर्ण धन मौजूद है, मगर वैक्सीन की आपूर्ति के अनुमानों में अब भी अच्छा-ख़ासा जोखिम नज़र आता.

विश्व स्वास्थ्य संगठन, अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के साथ मिलकर, निम्न व मध्य आय वाले देशों में चिकित्सा उपकरणों और वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये तालमेल बिठाने के रास्ते तलाश करने पर काम कर रहा है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने जून में बताया था कि ये संस्था दक्षिण अफ्रीका में टैक्नॉलॉजी हस्तान्तरण के ज़रिये एक ऐसे एमआरएनए (mRNA) वैक्सीन केन्द्र की स्थापना में मदद कर रही है जिसमें विकासशील देशों के औषधि निर्माताओं को उपचार व औषधि तैयार करने में प्रशिक्षित किया जाएगा.

यह एक ऐसी तकनीक है जो मानव शरीर में कोशिकाओं को ऐसा प्रोटीन निर्माण करने की हिदायत देती है जिसके ज़रिये शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता बनती है. परिणामस्वरूप शरीर में ऐसी एण्टीबॉडीज़ यानि ऊर्जावान तत्वों का निर्माण होता है जो किसी बीमारी से सुरक्षा मुहैया कराते हैं.

कोविड-19 की कुछ वैक्सीनों का आधार यही तकनीक है जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में सरकारें और औषधि निर्माता कम्पनियाँ कर रही हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुखिया ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में इस वैक्सीन निर्माण केन्द्र स्थापना की घोषणा, आगे की दिशा में एक सकारात्मक क़दम है, मगर औषधि निर्माताओं को आगे आकर टैक्नॉलॉजी हस्तान्तरण और वैक्सीन उत्पादन के नुस्ख़े साझा करने की ज़रूरत है.

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