Will congress gain from kanhaiya kumar entry : कन्हैया कुमार के कांग्रेस में प्रवेश से क्या कांग्रेस को बिहार में लाभ मिलेगा?

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कन्हैया कुमार एक गतिशील छात्र नेता हैं जिनकी मोदी विरोधी पहचान हिंदी प्रदेशों में रही है और उनकी सभाओं में भी लोकसभा चुनाव के पहले काफी भीड़ उमड़ती रही है। चुनाव में कन्हैया कुमार जैसे नेता को भी अपनी जातिगत जमीन की सीट पर चुनाव लड़ना पड़ा है। देश में कुछ ही जार्ज फर्नांडीस, मधुलीमय जैसे बड़े नेता हुये हैं जो जातिगत जमीन को छोड़कर भी बिहार से जीतते रहे हैं। ऐसी शख्सियत कन्हैया कुमार में नहीं है।

कन्हैया कुमार पिछले लोकसभा चुनाव में बेगुसराय से लड़े थे और उन्हें दूसरा स्थान मिला था तथा प्रथम स्थान वाले विजयी उम्मीदवार भाजपा के गिरीराज सिंह से लगभग ढाई लाख मतों से पीछे थे। कहने का भाव यह है कि कन्हैया कुमार जो अभी कांग्रेस में शामिल हुये हैं और बिहार से आते हैं जहां विधानसभा का चुनाव 2020 में हो चुका है इसलिए तत्काल कांग्रेस के लिए कोई बहुत बड़ी जमीन बिहार में नहीं बना पायेंगे।

इनता अवश्य है कि वो आने वाले लोकसभा चुनाव में बिहार में कांग्रेस को कुछ लाभ पहुंचाने की स्थिति में रहेंगे। कन्हैया कुमार भूमिहार समाज से आते हैं और बिहार में भूमिहार समाज का लगभग-लगभग वोट भाजपा और जदयू को जाता है। जदयू के राष्ट्ीय अध्यक्ष ललन सिंह भूमिहार से आते हैं और वर्तमान में लोकसभा के सदस्य भी हैं। वहीं भूमिहार समाज से गिरीराज सिंह केंद्रीय मंत्री भी हैं और उन्होंने कन्हैया को शिकस्त दी थी।

कांग्रेस पार्टी विभिन्न दलों के नेताओं को इकट्ठा करने के बजाय अगर कैडर निर्माण का कार्यक्रम शुरू करेगी तो उसे आने वाले लोकसभा चुनाव में कुछ अच्छा लाभ मिल सकता है। विडंबना यह है कि जिन-जिन प्रदेशों में कांग्रेस ने अपने इंचार्ज बनाकर भेजे हैं उन-उन प्रदेशों में अपना बर्चस्व कायम करने में इंचार्जों ने हाईकमान को गुमराह कर प्रदेशों में कांग्रेस को कमजोर किया।

जिसमें आज की स्थिति में पंजाब एक ज्वलंत उदाहरण है वहीं झारखंड राज्य के इंचार्ज ने भी कुछ ऐसा ही कदम उठाया है कि झारखंड कांग्रेस में घुन लगा दिया है जो आने वाले समय में घातक सिद्ध होगा। विडंबना यह है कि जितने भी इंचार्ज हैं वो अपने प्रदेशों में अपनी सीट भी नहीं बचा पाये और दूसरे प्रदेशों में जाकर सीट बढ़ाने और बचाने की दुहाई देते हैं।

कांग्रेस पार्टी ने कन्हैया कुमार जैसे गतिशील नेता को अपनी झोली में लेकर एक अच्छा कदम उठाया है और उससे बहुत बड़ी अपेक्षा नहीं रखते हुये कांग्रेस को अपने मूल कार्यकर्ताओं को भी तरजीह देते रहना होगा, ये कहना है कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का, जिसकी पूरे देश में कमी होती जा रही है।

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