झारखंड की महिलाकर्मियों को भी अब बच्चों की देखभाल के लिए मिलेगी दो साल की छुट्टी

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झारखंड : आखिरकार हेमंत सोरेन ने इस बात पर मुहर लगा ही दिया कि राज्य सरकार की महिला कर्मचारियों और अधिकारियों को 730 दिनों का चाइल्ड केयर लीव दिया जायेगा। यानी महिलाकर्मी अपने बच्चे की देखभाल के लिए दो साल की छुट्टी ले सकेंगी। महिलाओं की झोली में खुशियों की यह सौगात आ सकी है उस पीआइएल के जरिये, जिसे हाइकोर्ट में दाखिला किया था झारखंड उच्च न्यायालय सह बोकारो कोर्ट के अधिवक्ता एवं आरटीआइ एक्टिविस्ट डॉ राजकुमार ने। इसके लिए झारखण्ड पुलिस की 2012 बैच की इंस्पेक्टर संगीता ने इनसे पहल की जो वर्तमान में जमशेदपुर में पोस्टेड है। गौरतलब है कि अभी तक देश के करीब एक दर्जन राज्यों में यह प्रावधान था कि अगर कोई महिला राज्य की कर्मचारी है तो उसे अपने बच्चे की देखभाल करने के लिए दो साल की वेतन के साथ छुट्टी मिलती थी। लेकिन बीते दिनों प्रोजेक्ट भवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने घोषणा की कि अब उनके राज्य में भी महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव दिया जायेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि सहायक पुलिसकर्मियों को भी छुट्टी दी जायेगी।

अधिवक्ता डॉ राजकुमार ने हाइकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि राज्य सरकार केंद्र की तरह ही राज्य की महिला कर्मचारियों को 730 दिनों के लिए चाइल्ड केयर लीव प्रदान करें। क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश के साथ-साथ बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, यूपी, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा,राजस्थान सहित कई राज्यों में सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप और नवजात बच्चे की देखरेख करने के साथ ही बच्चों में कुपोषण को कम करने के लिए आदेश या निर्देश पारित करें। याचिका में यह भी कहा गया है कि 180 दिनों के मातृत्व अवकाश के अलावा 730 दिनों की चाइल्ड केयर लीव देने से नवजात के स्वास्थ्य और विकास में सुधार करने में मदद मिलेगी। चाइल्ड केयर लीव मिलने से नवजात के विकास में मदद मिलेगी । साथ ही मां के लिए फायदेमंद होगा। गौरतलब है कि सातवें केंद्रीय वेतन आयोग ने बाल देखभाल अवकाश शुरू करने की सिफारिश की है और केंद्र सरकार ने इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया है और 11/12/2018 के माध्यम से बाल देखभाल अवकाश की अनुमति दी है। चूंकि चाइल्ड केयर लीव मामले को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल कोलकाता, सर्किट बेंच में चुनौती दी गई थी और सर्वोच्च न्यायालय ने भी सिविल अपील संख्या 4506/2014 (एसएलपी (सी) संख्या 33244/2012 से उत्पन्न होने वाली इस अधिसूचना को बरकरार रखा है।

अधिवक्ता ने याचिका में कहा था कि चूंकि झारखंड राज्य में चाइल्ड केयर लीव की व्यवस्था नहीं दी गई है और न ही इस दिशा में कोई कदम उठाया गया है। लिहाजा याचिकाकर्ता ने चाइल्ड केयर लीव पर सूचना मांगने के लिए आरटीआई अधिनियम के तहत एक आवेदन दायर किया था, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने मुख्य सूचना आयुक्त, झारखंड के समक्ष दूसरी अपील दायर की। 2010 की सूचना और सरकारी संकल्प का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की सिफारिशों के अनुसार राज्य सरकार के कर्मचारी के लिए मातृत्व अवकाश की अवधि 135 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दी गई है, लेकिन चाइल्ड केयर लीव मामले में झारखंड सरकार चुप है। लिहाजा राज्य सरकार की चुप्पी से महिला कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

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