Yogi Adityanath : अनुसूचित जनजाति समाज की नींव , उसी पर सनातन धर्म का भवन खड़ा है : योगी

लखनऊ, 20 सितंबर । यदि हिन्दू समाज महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम से प्रेरणा लेता तो कोई विदेशी आक्रांता अयोध्या जी में श्रीराम मंदिर को क्षतिग्रस्त करके हिन्दू समाज को अपमानित करने का दुस्साहस नहीं करता। तुष्टिकरण की घृणित राजनीति करने वालों ने महाराणा प्रताप की बजाय अकबर को महान बता दिया। समाज को भ्रमित करने वालों ने विदेशी आक्रांताओं का महिमा मंडन किया।

ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक ट्वीट के जरिये कही। उन्होंने यह भी कहा कि आप सभी को याद रखना जरूरी है कि अनुसूचित जाति समाज की नींव हैं। नींव दिखती नहीं है, किन्तु भवन उसी पर खड़ा होता है।

सोमवार की सुबह मुख्यमंत्री योगी ने दर्जन भर ट्वीट किये, जिसमें उन्होंने लिखा कि तुष्टिकरण की घृणित राजनीति करने वालों ने महाराणा प्रताप की बजाय अकबर को महान बता दिया। विदेशी आक्रांताओं के महिमामंडन में ऐसे शब्द गढ़े गए कि समाज भ्रमित हो जाए। सर्वांगीण विकास पिछली सरकारों का ध्येय नहीं था। वे तो केवल खानदान के लिए काम करते रहे। समाज में हर तबके का सम्मान हो, उन्हें उनका अधिकार मिले, शासन की योजनाओं का लाभ समान रूप से सबको प्राप्त हो, यही तो भारतीय जनता पार्टी कहती है। आजादी के बाद तुष्टिकरण की जो राजनीति देश में चल रही थी, उस राजनीति को हमेशा के लिए समाप्त करेंगे।

उन्होंने कहा कि हमारे लिए ओबीसी, एससी-एसटी, महिला या युवा मोर्चा समाज को जोड़ने का माध्यम हैं, समाज के प्रत्येक तबके को जागरूक करने के लिए हैं। सबको समाज एवं राष्ट्र की मुख्यधारा के साथ जोड़कर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए माध्यम हैं। कोरोना कालखंड के दौरान विपक्षी नेता ट्विटर पर खेल रहे थे, चुनाव में भी उन्हें ट्विटर पर ही खेलने के लिए छोड़ देने की आवश्यकता है। यदि हिंदू समाज महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम से प्रेरणा लेता तो कोई विदेशी आक्रांता ‘अयोध्या जी’ में श्री राम मंदिर को क्षतिग्रस्त करके हिंदू समाज को अपमानित करने का दुस्साहस नहीं कर पाता। मैं देख रहा था, लखनऊ में एक परिवार है, वह कोरोना काल में कहीं नहीं निकला। लेकिन जब ‘सीएए’ के विरोध में उपद्रवी सड़कों पर आगजनी करने आ रहे थे, तो उनके समर्थन में पूरा खानदान निकल पड़ा था।

उन्होंने कहा कि आप सभी याद रखना, अनुसूचित जाति समाज की’नींव’ हैं। नींव दिखती नहीं है, किंतु भवन उसी पर खड़ा होता है। भवन की मजबूती उसी पर निर्भर करती है। हमारा कोई धर्म नहीं, कोई मत और मजहब नहीं, कोई उपासना विधि नहीं, बस एक ही धर्म है- राष्ट्रधर्म। ‘राष्ट्रधर्म’ का उपासक बन करके जो कार्य करेगा, अपने आप को समर्पित करेगा, वह लोक के लिए पूज्य हो जाएगा, समाज उसको पथ-पथ पर सम्मान देगा।

(हि.स.)

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